Friday, September 24, 2021 06:53 AM

ओलंपिक पदक के लिए आशीष को शुभकामनाएं

टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के बाद जहां इस बात का श्रेय आशीष ने अपने प्रशिक्षकों, खेल प्रशासकों व अपनी मेहनत को दिया, वहीं पर अपने पिता के योगदान को भी आगे रखा। आशीष ने 2020 ओलंपिक के सफर की सफलता अपने स्वर्गीय पिता को समर्पित की है। ओलंपिक बहुत बड़ा खेल आयोजन है। इसकी तैयारी कई वर्षों तक चलती है तथा इसमें बहुत धन खर्च होता है । राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में आने के बाद भी खिलाड़ी को अपनी जेब से लाखों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस प्रतिभाशाली मुक्केबाज को प्रशिक्षण के लिए पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता भी दी है। आशीष चौधरी को चाहिए कि वह अब ओलंपिक में पूरी ताकत के साथ व शांत दिमाग से अपनी फाइट लड़े ताकि वह टोक्यो में स्वर्ण पदक विजेता बनकर उभरे...

हिमाचल प्रदेश के आशीष ने पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को पार पाते हुए विश्व स्तर तक सफलता की उंचाइयों को छुआ है और अब बस उसे चूमना बाकी है। खेल जगत में ओलंपिक खेलों का विशिष्ट स्थान है। ओलंपिक में प्रतिनिधित्व करने के लिए संसार की कुछ चुनिंदा टीमों या व्यक्तिगत  क्वालीफाई रैंक में आने के लिए बहुत सी प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठतम प्रदर्शन करना पड़ता है। इसलिए कहा जाता है कि ओलंपिक खेलों में भाग लेना ही बहुत गर्व की बात है। हिमाचली खिलाडि़यों ने ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व ही नहीं किया है, अपितु संसार के इस उच्चतम खेल टूर्नामेंट में पदक भी जीते हैं। पदमश्री चरणजीत सिंह 1964 टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता टीम के कप्तान रहे हैं। हमीरपुर के शूटर विजय कुमार ने 2012 लंदन ओलंपिक में रजत पदक विजेता बन कर भारत का गौरव बढ़ाया। बिलासपुर के अनंत राम, ऊना के मोहिंदर लाल, चंबा के बीएस थापा, लाहुल-स्पीति के संकलांग दोर्जे व ऊना के दीपक ठाकुर कुछ एक नाम हैं जिन्होंने भारत का ओलंपिक में प्रतिनिधित्व किया है। पिछले साल जार्डन में संपन्न हुई ओलंपिक क्वालीफाई मुक्केबाजी प्रतियोगिता में हिमाचल प्रदेश के आशीष चौधरी ने टोक्यो ओलंपिक का टिकट पक्का कर लिया था, मगर कोरोना के कारण ओलंपिक 2020 में न होकर अब इस साल इसी महीने शुरू हो रहा है। ट्रेनिंग के लिए आशीष यूरोप में है और वहीं से सीधा टीम के साथ टोक्यो पहुंचेगा ।

 सुंदरनगर के महाराजा लक्ष्मण सेन स्मारक महाविद्यालय के प्रशिक्षण केन्द्र की नर्सरी से मुक्केबाजी प्रशिक्षक नरेश कुमार के प्रशिक्षण में अपनी ट्रेनिंग का श्रीगणेश कर  भिवानी व राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों में होते हुए संसार के सबसे बड़े खेल महाकुंभ तक पहुंचने का सफर इतना आसान नहीं रहा है। पिता स्वर्गीय भगत राम डोगरा व माता दुर्गा देवी के घर 18 जुलाई 1994 को सुंदरनगर शहर के साथ लगते जरल गांव में जन्मे आशीष की प्रारंभिक शिक्षा व कालेज की पढ़ाई सुंदरनगर में ही हुई। 2015 में केरल में आयोजित हुए राष्ट्रीय खेलों में हिमाचल प्रदेश के लिए स्वर्ण पदक विजेता बनने के साथ ही आशीष चौधरी ने 2020 ओलंपिक तक पहुंचने की आस भी जगा दी थी। वर्ष 2019 में संपन्न हुई एशियाई मुक्केबाजी प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर आशीष ओलंपिक क्वालीफाई के काफी नजदीक आ गया था।  पिछले छह सालों से आशीष लगातार राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान पटियाला में चल रहे राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर व विदेशी प्रशिक्षण केंद्रों में गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया है। 2017 में हिमाचल प्रदेश सरकार ने आशीष को खेल आरक्षण के अंतर्गत मंडी जिला की धर्मपुर तहसील का कल्याण अधिकारी नियुक्त कर नौकरी दी है। आशीष के पिता जी का लंबी बीमारी के बाद पिछले साल निधन हुआ है। आशीष के पिता स्वयं भी अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। साथ ही साथ वे बहुत अच्छे खेल प्रेमी भी थे। टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के बाद जहां इस बात का श्रेय आशीष ने अपने प्रशिक्षकों, खेल प्रशासकों व अपनी मेहनत को दिया, वहीं पर अपने पिता के योगदान को भी आगे रखा। आशीष ने 2020 ओलंपिक के सफर की सफलता अपने स्वर्गीय पिता को समर्पित की है। ओलंपिक बहुत बड़ा खेल आयोजन है। इसकी तैयारी कई वर्षों तक चलती है तथा इसमें बहुत धन खर्च होता है । राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में आने के बाद भी खिलाड़ी को अपनी जेब से लाखों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस प्रतिभाशाली मुक्केबाज को प्रशिक्षण के लिए पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता भी दी है।

आशीष चौधरी को चाहिए कि वह अब ओलंपिक में पूरी ताकत के साथ व शांत दिमाग से अपनी फाइट लड़े ताकि वह टोक्यो में स्वर्ण पदक विजेता बनकर तिरंगे को सबसे ऊपर लहरा कर जन गण मन की धुन पूरे विश्व को सुना सके। हिमाचल प्रदेश जगत अपने लाडले को ओलंपिक में शिरकत करने पर बधाई देता है तथा ओलंपिक में स्वर्णिम सफलता के लिए शुभकामनाएं देता है। आशीष चौधरी अगर स्वर्ण पदक हासिल कर लेते हैं, तो ओलंपिक विजेता हिमाचली खिलाडि़यों की सूची में एक और नाम दर्ज हो जाएगा। यह हिमाचल के लिए गर्व की बात होगी कि उसका एक लाडला भारत की झोली में पदक डाल देगा। इससे प्रदेश के अन्य खिलाडि़यों को भी प्रेरणा मिलेगी और वे कठिन परिश्रम के लिए तैयार हो जाएंगे। जिन कठिन परिस्थितियों में आशीष चौधरी ने ओलंपिक का रास्ता तय किया है, उन स्थितियों में इतने बड़े टूर्नामेंट के लिए तैयारी करना कोई आसान काम नहीं होता। इसके बावजूद आशीष चौधरी ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है, जो सराहनीय बात है। आशीष चौधरी से प्रेरणा लेकर अगर हिमाचल के अन्य खिलाड़ी भी इसी तरह का जज्बा दिखाएं, तो खेलों के क्षेत्र में हिमाचल का नाम चमक सकता है। खिलाडि़यों के साथ-साथ उनके प्रशिक्षकों को भी बेहतर परिणाम देने के लिए कार्य करना होगा। सरकार से भी आशा है कि वह उपलब्धियां हासिल करने वाले खिलाडि़यों तथा उनके प्रशिक्षकों को पर्याप्त सम्मान व सहायता देकर प्रदेश में खेलों के विकास के लिए बेहतर जमीन तैयार करेगी। फिर एक बार आशीष को शुभकामनाएं।

भूपिंद्र सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

ईमेलः [email protected]