Friday, October 23, 2020 04:55 AM

भेड़-बकरियों पर शोध-प्रसार को मिले बढ़ावा

कृषि विश्वविद्यालय में वूल फेडरेशन के अध्यक्ष के साथ बैठक में बोले कुलपति प्रो. हरिंद्र कुमार

पालमपुर-चौधरी सरवण कुमार प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरिंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि भेड़-बकरियों पर शोध व प्रसार गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कुलपति कृषि विश्वविद्यालय व प्रदेश वूल फेडरेशन के अध्यक्ष त्रिलोक कपूर के मध्य एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। कुलपति ने कहा कि भेड़-बकरियों के लिए पोषक आहार फीड  बनाने में विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विज्ञान महाविद्यालय में उचित व्यवस्था है। उन्होंने भेड़ की ऊन की गुणवत्ता जांचने के लिए एक प्रयोगशाला स्थापना पर भी बल दिया। कुलपति ने कहा कि प्रदेश के ऊंचे इलाकों में भेड़-बकरियों को चराने के कारण उनकी ऊन व मीट की गुणवत्ता बहुत बढ़ जाती है। इसके लिए भौगोलिक  सूचकांक दिलवाकर भेड़ पालकों की आमदनी कई गुना बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय, प्रदेश वूल फेडरेशन व प्रदेश पशुपालन विभाग के सहयोग से भेड़-बकरियों पर शोध को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि छोटे जुगाली करने वाले पशुओं में फुट रॉट रोग एक प्रमुख समस्या ग्रस्त क्षेत्र बन गया है।

इस बाबत विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विज्ञान महाविद्यालय एक उपचार प्रोटोकाल के साथ पशुपालन विभाग की मदद से वैक्सीन विकसित करने की संभावना का भी पता लगाएगा ताकि फुट रॉट रोग को नियंत्रित किया जा सके। इस अवसर पर इस अवसर पर बूल फेडरेशन के अध्यक्ष त्रिलोक कपूर ने कहा कि राज्य में लगभग आठ लाख भेड़ें और 11 लाख बकरियां हैं जो राज्य कि कुल पशुधन आबादी का 44 प्रतिशत है। अनुमान है कि प्रदेश के पशपालन व्यवसाय में घुमंतू पशुधन लगभग 60-70 प्रतिशत योगदान देता है जो कि लगभग 20000 परिवारों का मुख्य व्यवसाय है, जिनमें से अधिकांश राज्य के जनजातीय व कठिन क्षेत्रों से संबंध रखते हैं। अतः यह आवश्यक है कि विश्वविद्यालय में अन्य कृषि विश्वविद्यालयों की तर्ज पर मॉडल भेड़ और बकरी फार्म स्थापित किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश पशुपालन विभाग के तकनीकी सहयोग से वूल फेडरेशन जनवरी-फरवरी 2021 में भेड़पालकों के लिए एकदिवसीय प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करने जा रहा है। श्री कपूर ने कहा कि भेड़-बकरी पालकों की आर्थिकी सुधारने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश वूल फेडरेशन इसके लिए विश्वविद्यालय की सहायता चाहता है और विश्वविद्यालय की सहायता भी करेगा। बैठक में पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विज्ञान महाविद्यालय के डीन डा. मनदीप शर्मा ने अपने विचार रखे। विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों ने भी संबंधित विषयों पर प्रस्तुतियां दीं।

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