Friday, September 25, 2020 09:00 AM

बिलासपुर में सजा संस्कृत कवि सम्मेलन

बिलासपुर – भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर द्वारा संस्कृत पखवाडे़ के तहत राज्य स्तरीय संस्कृत शिक्षक परिषद के संयुक्त तत्त्वावधान में ऑनलाइन गूगल मीट ऐप के माध्यम से जिला स्तरीय संस्कृत कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने की। जबकि कार्यक्रम का संचालन राज्य स्तरीय संस्कृत शिक्षक परिषद के राज्य अध्यक्ष आचार्य मनोज शैल ने किया। कार्यक्रम में लगभग 16 संस्कृत के विद्वानों के अपनी रचनाओं का वाचन किया। सर्वप्रथम खेम चंद शास्त्री ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इसके बाद कृष्ण मोहन पाण्डेय ने कोरोना काल में मातृभूमि की महता, डा. सुदेश गौतम ने मां महामाया योगमाया की वंदना, डा. श्रीधरनाथ ने धीरे-धीरे शीर्षक पर अभिवादन, हेमराज सहोता ने चीन देश की कुटिलता, डा. अमनदीप शर्मा ने कोरोना काल में अनुशासन की महता, सतीश शर्मा ने शिरगुलाश्टक, डा. शिवकुमार ने  देव भूमि हिमाचल, नीरज शास्त्री ने सब जगह कोरोना दिख रहा, गोरखू राम शास्त्री ने कवियों के स्वागत एवं भारतीय संस्कृति, सोहनलाल शास्त्री ने कोरोना काल में माता एवं पुत्री का संवाद, नरेश मलोटिया ने पुण्य भूमि हिमाचल, अमित शर्मा ने  शिव स्त्वन पर आधारित व डा. मनोज शैल ने कर्म की महता, विषय पर अपनी संस्कृत रचना का पाठ किया।

इस अवसर पर जिला भाषा संस्कृति अधिकारी नीमल चंदेल ने सभी कवियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है एवं समस्त भारतीय भाषाओं की जननी है। संस्कृत भाषा को देववाणी भी कहा जाता है, यानि देवताओं की भाषा। उन्होंने बताया कि संस्कृत शब्द का शाब्दिक अर्थ है परिपूर्ण भाषा। संस्कृत भाषा पूर्णतः वैज्ञानिक है, विश्व के वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी और आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि विभाग का सदैव यह प्रयास रहता है कि भाषाओं का उत्थान प्रचार-प्रसार को बढ़ाया जाए। विभाग द्वारा कोविड-19 महामारी के चलते अब ऑनलाईन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करवाया जाएगा। इस ऑनलाईन कवि सम्मेलन में इंद्र सिंह चंदेल, प्रियंका चंदेल व तन्वी राणा सहित अन्य उपस्थित रहे।

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