Friday, September 24, 2021 06:47 AM

'लोकमान्य तिलक नाटक का शानदार मंचन

आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर एक्टिव मोनाल कल्चरल के कलाकारों ने बिखेरा कला का जादू

दिव्य हिमाचल ब्यूरो-कुल्लू आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर स्थानीय संस्था एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन के कलाकारों ने भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश के सौजन्य से आयोजित नाट्य संध्या में महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की जयंती पर उनके जीवन संग्राम पर आधारित नाटक 'लोकमान्य तिलक का शानदार मंचन किया। केहर सिंह ठाकुर द्वारा लिखित व निर्देशित और ऐतिहासिक लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र कुल्लू में प्रस्तुत इस नाटक को कुछ दर्शकों ने कलाकेंद्र में आकर भी देखा, जबकि सैकड़ों दर्शकों ने विभाग के फेसबुक पेजबुक पेज पर लाइव स्ट्रीमिंग में देखा और नाटक के कलाकारों के अभिनय की तथा भाषा विभाग व ऐक्टिव मोनाल संस्था के इस प्रयास की भूरी भूरी प्रशंसा की। नाटक मूलत: तिलक के 1880 से लेकर 1920 तक के समय भारत की आजादी व स्वराज के लिए संग्राम को दर्शाता है। कैसे तिलक ने स्कूलों, कालेजों की स्थापना की जहां भारत का आम जन भी शिक्षा आसानी से प्राप्त कर सके। जन जागरण के लिए दो समाचार पत्र 'मराठा अंग्रेजी में तथा 'केसरी मराठी भाषा में आरंभ किए उन्हें कैसे लिखे लेखों के कारण जेल यात्राएं करनी पड़ीं। भारतीय राष्ट्रीय कांगेस में शामिल होकर पूर्णकालिक राजनीति में कूद कर देश की आज़ादी के लिए लड़े।

उनकी तीन पुस्तकों 'औरायन जिसमें उन्होंने ज्योतिष गणना के अनुसार वेदों का काल 4500 वर्श पूर्व बताया, दूसरी पुस्तक 'आर्कटिक होम ऑफ वेदाज उन्होंने आर्यों का मूल स्थान ध्रव प्रदेश बताया, जबकि तीसरी पुस्तक गीता रहस्य में आज की परिस्थिति में ज्ञान योग, भक्ति योग और कर्म योग का क्या महत्त्व है का वर्णन कैसे किया किया, वह प्रस्तुत नाटक में दिखा। भारत निर्माण के लिए देशभक्ति की भावना जगाने के लिए कैसे उन्होंने गणेष उत्सव और शिवाजी उत्सव सामूहिक रूप से मनाने का आह्वान किया। इसके अलावा गर्म दल के एक महान नेता के रूप में कैसे उभरे और स्वराज और बहिष्कार तथा होमरूल लीग जैसे आंदोलनों को चलाकर कैसे आम जनता की मुखर आवाज़ बने। जिन्हें गांधी जी आधुनिक भारत का निर्माता तथा लाला लाजपराय भारत में दहाडऩे वाला शेर कहते थे। उनकी ये सब बातें प्रस्तुत नाटक में केहर सिंह ठाकुर के लेखकीय और निर्देशकीय कौशल से परिस्थितियों के साथ न्याय करती दिखीं और खूबसूरती से बहती हुईं नजऱ आईं। नाटक में मंच पर तिलक की भूमिका को स्वयं केहर ने और अन्य भूमिकाओं में आरती ठाकुर, रेवत राम विक्की, देस राज, ममता, अनुरंजनी, कल्पना, प्रेरणा, श्याम लाल तथा सूरज ने अपनी अपनी भूमिकाओं को बखूबी निभाया। वस्त्र व आलोक परिकल्पना मीनाक्षी की, पाष्र्व संगीत संचालन वैभव ठाकुर, केमरा पर सुमित ठाकुर और ष्याम जबकि ऑनलाईन स्ट्रीमिंग भरत सिंह और प्रमुख प्रस्तुति सहायक