Tuesday, December 07, 2021 06:04 AM

बीएसएफ का ऑपरेशन क्षेत्र

अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राज्यों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का अधिकार-क्षेत्र बढ़ाया गया है। अब पूर्वोत्तर राज्यों-मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, नगालैंड, मेघालय-के साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सरीखे संघशासित क्षेत्रों में बीएसएफ का ऑपरेशन क्षेत्र पूरे राज्य में होगा। यानी सीमा के भीतर पूरी तरह अंदर जाकर बीएसएफ कार्रवाई कर सकता है, जबकि पंजाब, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल और असम में सीमा से 50 किलोमीटर राज्य के भीतर जाकर बीएसएफ तलाशी और गिरफ्तारी को अंजाम दे सकेगा। उन कार्रवाइयों के लिए अब उसे राज्य पुलिस, प्रशासन और अदालत के साथ समन्वय और अनुमति की बाध्यता नहीं होगी। विपक्ष की प्रतिक्रिया ऐसी ही होती है, लिहाजा पंजाब और बंगाल में भाजपा-विरोधी दलों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के इस निर्णय को संघीय ढांचे के खिलाफ करार दिया है। पंजाब कांग्रेस की आशंका है कि मोदी सरकार इस निर्णय के जरिए राष्ट्रपति शासन थोपना चाहती है। इस निर्णय के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की सलाह भी मानी जा रही है। आकलन यह भी सामने आया है कि आधे पंजाब पर पुलिस के बजाय बीएसएफ का नियंत्रण होगा, लिहाजा इस तरह राज्य सरकार के अधिकार क्षीण होंगे। इसे संवैधानिक तौर पर उचित नहीं माना जा रहा है, क्योंकि संविधान में कानून-व्यवस्था को राज्य सरकार के अधीन का मामला तय किया गया है। संविधान केंद्र सरकार को भी ऐसे संशोधन करने और सुरक्षा बल का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने की शक्तियां देता है। अलबत्ता उसे संसद से पारित कराना भी लाजिमी है। मोदी सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला माना है। पंजाब में हालात बेहद असुरक्षित हैं। वहां ड्रोन से हथियारों की आपूर्ति और नशीले पदार्थों की तस्करी की जाती रही है। संभव है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने मुलाकात के दौरान गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को पूरी तरह ब्रीफ किया होगा।

 सरहदी इलाकों में आतंकी घुसपैठ और हमलों की संभावना भी बनी रहती है। कश्मीर में तो अपराधी, तस्कर और आतंकी सीमा पार कर आम जनता में घुल-मिल जाते हैं, लिहाजा उनकी पहचान और धरपकड़ पेचीदा हो जाती है। चूंकि बीएसएफ राज्यों में 15 किलोमीटर भीतर तक ही छानबीन, तलाशी और जांच आदि की कार्रवाई कर सकता था, लिहाजा अब उसे विस्तार देकर 50 किलोमीटर तक किया गया है। गुजरात में 80 किलोमीटर से घटाकर 50 किलोमीटर तक ऑपरेशन-क्षेत्र तय किया गया है। बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में भी तस्करी बढ़ती जा रही है और आतंकी भी घुसपैठ कर रहे हैं। नए संदर्भों में बंगाल आतंकवाद का नया अड्डा बनता जा रहा है। बीते दिनों अलकायदा के आतंकी बंगाल के कुछ सरहदी इलाकों से पकड़े गए थे। इससे महत्त्वपूर्ण और ठोस साक्ष्य और क्या हो सकता है? राष्ट्रीय सुरक्षा केंद्र सरकार का अहम सरोकार है। यदि उसी में छिद्र और दरारें होंगी, तो भी विपक्ष चिल्ल-पौं करेगा। हमारा संघीय ढांचा और संघीय विशेषाधिकार इतने कमज़ोर नहीं हैं कि अंततः केंद्र ‘तानाशाह’ बन सके। अलबत्ता देश की सुरक्षा और संप्रभुता को बरकरार और स्थिर रखना हमारा दायित्व है। फिर सरकार में राजनीतिक दल कोई भी हो! तैनाती के अधिकार बीएसएफ के बढ़ाए गए हैं, न कि भाजपा अनधिकार चेष्टा कर सकेगी। बीएसएफ 12 राज्यों में तैनात है, लेकिन सिर्फ दो राज्यों-पंजाब और बंगाल-को ही महसूस हो रहा है कि यह संघीय अतिक्रमण की कोशिश है। यदि उनके पास ठोस दलीलें हैं, तो वे सर्वोच्च अदालत में याचिका लगा सकते हैं। बीएसएफ का ऑपरेशन क्षेत्र बढ़ाने से कुछ शुरुआती दिक्कतें झेलनी पड़ सकती हैं, लेकिन बीएसएफ को विस्तार दिया गया है, तो केंद्र सरकार और विशेषज्ञों ने कुछ मंथन किया होगा। हमें और चिल्लाते राज्यों को कुछ अंतराल तक प्रतीक्षा करनी चाहिए कि नए अधिकारों के फलितार्थ क्या रहते हैं।