Saturday, November 27, 2021 11:13 PM

पीएचडी के दाखिलों को तुरंत रद्द करो

सिटी रिपोर्टर-शिमला हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में बिना प्रवेश परिक्षा दिए पीएचडी में हुए दाखिले को लेकर अब माकपा ने भी इसकी कड़ी निंदा की है। माकपा का कहना है कि प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय को धांधलियों का अड्डा बना दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह कुलपति सिकंदर कुमार ने नियमों को ताक पर रख कर कुछ छात्रों को पीएचडी में दाखिला किया है, यह एक बहुत बड़ा भ्रष्टाचार है, जिसका पार्टी पुरजोर विरोध करती है। पार्टी सचिव बाबू राम ने कहा की इससे ज्यादा शर्मनाक बात विश्वविद्यालय के लिए नहीं हो सकती जहां एक ओर आम गरीब किसान मजदूरों के बच्चे दिन रात एक करके पीएचडी में दाखिला लेने के लिए मेहनत कर रहा है, उनको बिल्कुल दरकिनार करते हुए सिर्फ अपने चहेतों को दाखिला दे दिय। वहीं विश्वविद्यालय की ओर से इन सीटों पर कोई भी विज्ञापन भी जारी नही किया गया।

उन्होंने कहा कि पहले भी प्रशासन ने दीन दयाल उपाध्याय पीठ के अंदर भी सिर्फ एक विशेष विचारधारा के लोगों को भर्ती किया था। उस दौरान भी विज्ञापन नहीं निकाले गए थे, जिससे साफ विश्वविद्यालय प्रशासन की मंशा का पता चलता है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भारी विरोध के बाद विश्वविद्यालय की ओर से एक बचकाना स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, जिसमें विश्वविद्यालय तर्क देता है कि इससे निम्न वर्ग के कर्मचारियों के बच्चों को उच्च शिक्षा हासिल करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसमें बड़ी हैरानी की बात है कि पीएचडी में दाखिला लेने के लिए वाइस चांसलर को भी निम्न श्रेणी के कर्मचारी में सम्मिलित कर दिया गया। उन्होनें आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की रैंकिंग के अंदर गिरावट के लिए भी ऐसे ही भ्रष्ट अधिकारी और उनके कारनामे जिम्मेवार हैं। उन्होंने मांग उठाई कि एचपीयू प्रशासन इस तरह के फैसले को तुरंत वापस ले, नही तो विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ एक प्रदर्शन किया जाएगा।