Sunday, September 20, 2020 10:19 PM

चार महीनों से व्यापार अनलॉक

कोरोना ने किया कारोबारियों का धंधा ठप, भूखे मरने की नौबत, सरकार से मांगा जल्द समाधान

गगरेट-कोरोना काल में जिंदगी की गाड़ी को पटरी पर लाने के लिए बेशक सरकार ने अनलॉक-3 की घोषणा करते हुए कई इकाइयों को स्टेंडर्ड आपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) के ्रतहत चलाने की अनुमति दे दी है, लेकिन अभी भी एक वर्ग ऐसा है जो बिना काम-धंधा किए कर्जदार होता जा रहा है। पिछले चार महीनों से लॉक हुआ उनका व्यापार अभी तक अनलॉक नहीं हो पाया है। ऐसे में इन्हें स्टाफ की पगार के साथ-साथ बिल्डिंग का किराया और बिजली का बिल जेब से भरना पड़ रहा है। हालांकि सरकार ने होटल व रेस्तरां को एसओपी के तहत संचालित करने की इजाजत दे दी है लेकिन बार-रेस्टोरेंट पर अभी तक कोई निर्णय न हो पाने के चलते इस धंधे में हाथआजमाने वाले पाई-पाई के लिए मोहताज हो कर रह गए हैं। हालांकि प्रदेश में संचालित बार-रेस्टोरेंट प्रदेश सरकार की तिजोरी भरने का एक अभिन्न अंग हैं। प्रदेश में मौजूदा समय में करीब छह सौ बारह बार-रेस्टोरेंट पंजीकृत हैं। प्रत्येक बार-रेस्टोरेंट से प्रदेश सरकार एक लाख 90 हजार रुपए सालाना फीस के तौर पर वसूल करती है। मोटे आकलन के अनुसार ही बार-रेस्टोरेंट प्रदेश सरकारके सालाना ग्यारह करोड़ 62 लाख 80 हजार रुपए बतौर फीस ही देते हैं। प्रदेशकी बिगड़ती अर्थव्यवस्था को देखते हुए प्रदेश सरकार ने शराब की दुकानें खोलने का निर्णय काफी पहले ही ले लिया था, लेकिन कोरोना संकट को देखते हुए बार-रेस्टोरेंट के संचालन को अभी भी सरकार द्वारा हरी झंडी नहीं दिखाई गई है। ऐसे में बार-रेस्टोरेंट संचालकों को अपने घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है। प्रत्येक बार-रेस्टोरेंट पर अगर दो लोगों का स्टाफ भी मान कर चला जाए तो प्रत्येक माह इनकी बीस हजार रुपए सैलरी के अलावा बार-रेस्टोरेंट का किराया, बिजली के बिल सहित करीब-करीब पचास हजार रुपए प्रति माह का खर्च वहन करना पड़ रहा है। अगर सरकार ने बार-रेस्टोरेंट संचालकों के हित में जल्द कोई निर्णय न लिया तो सैकड़ों लोग बेरोजगार तो होंगे ही बल्कि ये इंडस्ट्री भी उजड़ कर रह जाएगी। हालांकि राहत भरी यह बात है कि कोरोना काल में इनसे फीस न वसूलने की छूट जरूर दी गई है। उधर, हिमाचल प्रदेश बार एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष राजन भारद्वाज व संयुक्त सचिव अनिल ठाकुर का कहना है कि बार-रेस्टोरेंट को भी स्टेंडर्ड आपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) के तहत खोलने की इजाजत प्रदेश सरकार दे। अन्यथाबार-रेस्टोरेंट संचालकों को भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।

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