Sunday, July 25, 2021 08:06 AM

कोरोना का स्रोत चीन!

बेशक यह बड़ी घटना नहीं, लेकिन कोरोना काल में प्रशासनिक दरगाह ढूंढने की कोशिश तो है ही। शिमला सचिवालय की रौनक में मशरूफ नौकरशाही को कहीं ऊंचे दरवाजों से गुजारने की पहल हुई है। सत्ता के भरोसेमंद अधिकारियों या अधिकारों के भरोसे में राम सुभग सिंह,आर डी धीमान और ओंकार शर्मा को अतिरिक्त दायित्व की कसौटी पर कुछ फासले चलने होंगे, तो नई जिम्मेदारियों में निशा सिंह, कमलेश पंत, डा. अजय कुमार, डा. एसएस गुलेरिया तथा हंस राज शर्मा जैसे आईएएस अधिकारी अपना फलक विस्तृत कर रहे हैं। यह नए अमन की बिसात है, जो कोरोना काल के अकाट्य सत्य को सुशासन के पैमानों में भरेंगे। यानी हम आने वाले हर प्रशासनिक फेरबदल में सत्ता की इच्छा शक्ति तथा सुशासन की तंदरुस्ती का हिसाब लगाएंगे। हालांकि कोरोना काल के बीच बनती बिगड़ती छवियों का कोई मध्यांतर नहीं हुआ और संकट में राज्य के संकटों को जनता ने अपने अनुभवों में तसदीक किया।

विभागीय परिवर्तनों में मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार परिलक्षित है, जबकि मंत्रियों का यह दौर एक आधी नियुक्ति की दिलचस्पी हो सकती है। जैसे हम मान सकते हैं कि ओंकार शर्मा के पास बागबानी के प्रधान सचिव पद का अतिरिक्त कार्यभार दरअसल सरकार के पावर पुल मंत्री महिंद्र सिंह का पसंदीदा निर्णय रहा होगा। मुख्यमंत्री के आसपास रहे विभागीय जौहर में पुनः आरडी धीमान और राम सुभग सिंह का बढ़ता दायरा देखा जा सकता है। सरकार को अपने कार्यकाल के अंतिम पड़ाव में नई ऊर्जा का संचार इसलिए भी करना है, क्योंकि मंजिल से पहले दो उपचुनाव, कोरोना काल में रुके हुए विकास का अंजाम, घोषणाओं और वादों का इंतजाम और सुशासन की पटरियों पर बहुत कुछ लिखना होगा। यह सरकार इन्वेस्टर मीट के बहाने आशाओं के कई सेतु बनाती रही है, तो अब इनसे गुजरने का वक्त नजदीक आ रहा है। विकास के नए मॉडल में इतिहास रचने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जो खाका खींचा था उसमें इसलिए भी रंग भरने जरूरी हैं, क्योंकि जनता ने डबल इंजन सरकार के मुहावरे का अब अर्थ ढूंढना है। बेशक सचिवालय की बैठकों में तमाम कार्यों की समीक्षाएं अनवरत जारी होंगी, लेकिन इस दौर की सबसे बड़ा विश्लेषण कोरोना काल कर रहा है। इस समय हिमाचल का सबसे अहम विभाग हर दिन पूरी जनता के स्वास्थ्य का हाल पूछ रहा है, अतः सचिव अमिताभ अवस्थी का दायित्व पूरी सरकार की छवि का उत्तर होगा। सरकार ने एक साथ तीन नए नगर निगम बना कर शहरी विकास मंत्रालय का प्रसार किया है, तो समूची व्यवस्था में आयुक्त स्तर के अधिकारियों के दम पर परिवर्तन सामने लाना पड़ेगा। इसी तरह बिना परीक्षा और स्कूल से दूर ऑनलाइन शिक्षा में नए लक्ष्य और उम्मीदें पिरोने के लिए संबंधित विभाग के सचिव की भूमिका में कई प्रयोग व नवाचार की ऊर्जा अभिलषित है।

ट्रांसफर की सुगबुगाहट जिला और उपमंडल स्तर तक अगर पहुंच रही है, तो ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार एक नई पिच पर खुद को आजमाने जा रही है। कोरोना काल के दौरान कई उपायुक्तों ने अपने दायित्व के ऐसे उदाहरण पेश किए हैं कि जनता भी सोशल मीडिया में उनके प्रति अपना मोह व कृतज्ञता पेश करती दिखाई देती है। हमारा मानना है कि चिकित्सा संकट के इस दौर में प्रशासन ने न केवल तत्परता दिखाई, बल्कि नेक कार्य भी किए। इसलिए आगामी स्थानांतरणों में जिलाधीश बदले जाते हैं, तो पहले से स्थापित रिवायतों का अनुसरण करना पड़ेगा। कांगड़ा, मंडी या शिमला जैसे बड़े जिलों के कोरोना आंकड़ों का विश्लेषण सीधे-सीधे प्रशासनिक नेतृत्व से जुड़ा रहा, तो बार्डर जिलों की चौकसी में प्रशासनिक व पुलिस व्यवस्था ने खुद को पारंगत किया है। कोरोना काल के मध्य हर स्थानांतरण का मतलब केवल स्थानांतरण नहीं, बल्कि एक खास परिपाटी का अनुसरण है। उम्मीद है सरकार आगे चलकर जनता की बेहतरी के लिए प्रशासनिक क्षमता व ऊर्जा को एक नए आयाम तक पहुंचा पाएगी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन के नए कोरोना टीके ‘सिनोवैक’ को आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी है। उसे ‘कोवैक्स’ कार्यक्रम में भी शामिल किया गया है। संगठन ने चीन के पहले टीके को भी मान्यता दी थी, जबकि उसकी प्रभावशीलता 50 फीसदी ही पाई गई थी। जिन देशों में ‘सिनोफार्म’ के परीक्षण किए गए थे, उनके निष्कर्ष संदिग्ध थे। आज तक यह सवाल भी अनुत्तरित है कि क्या चीन की वुहान प्रयोगशाला में कोरोना वायरस बनाया गया और फिर उसे दुनिया में फैला दिया गया? अमरीकी राष्ट्रपति जोसेफ  बाइडेन ने खुफिया एजेंसियों से व्यापक जांच करने के आदेश दिए हैं कि क्या कोरोना वायरस का स्रोत चीन ही है? क्या यह वायरस मानव-निर्मित है? इस संदर्भ में गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड टं्रप के कार्यकाल में यह जांच जारी थी, जिसे बाइडेन ने गैर-जरूरी और आर्थिक अपव्यय करार देते हुए खारिज करा दिया था। यह खुलासा सीएनएन टीवी नेटवर्क ने किया था।

अब राष्ट्रपति बाइडेन 90 दिन में ही जांच-रपट चाहते हैं। अमरीकी खुफिया सूत्रों ने ही यह ख़बर दी थी कि चीन के वैज्ञानिक वुहान प्रयोगशाला में जैविक बम और अस्त्र बनाने के प्रयोग कर रहे हैं। चीन उन अस्त्रों का, वायरस के तौर पर, दुनिया भर में प्रयोग करेगा। यदि युद्ध के आसार बने, तो इस बार जैविक, रासायनिक हथियारों वाला विश्व-युद्ध होगा! दरअसल जांच बिठाकर अमरीका चीन की एक बार फिर घेराबंदी करना चाहता है, जबकि ‘सिनोवैक’ को मान्यता देकर विश्व स्वास्थ्य संगठन चीन को ‘स्वास्थ्य नायकों’ की पंक्ति में स्थापित करने की इच्छा रखता है। आखिर पृष्ठभूमि में क्या समीकरण काम कर रहे हैं? चीन वायरस के संदर्भ में विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका सवालिया रही है, क्योंकि जो अंतरराष्ट्रीय जांच-दल वुहान गया था, उसमें आधे वैज्ञानिक चीनी थे अथवा चीन मूल के थे। शायद यही कारण है कि आज तक जांच-दल की कोई ठोस और वैज्ञानिक रपट दुनिया के फलक पर पेश नहीं की जा सकी है। चीन के कारण ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने लंबे वक्त तक कोरोना को ‘वैश्विक महामारी’ घोषित नहीं किया था। चीन से कोरोना वायरस का फैलाव हुआ, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आज तक बुनियादी और सैद्धांतिक तौर पर इस यथार्थ को स्वीकार नहीं किया है। लिहाजा विश्व स्वास्थ्य संगठन और चीन के आपसी समीकरण संदिग्ध हैं। अमरीका खुफिया जांच के जरिए इन सवालिया संबंधों को बेनकाब करना चाहता है।

अब 16 जून को अमरीका और रूस के राष्ट्रपति जिनेवा में अति महत्वपूर्ण मुलाकात कर रहे हैं। यह भी चौंकाता है। कभी एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन रहे और वैचारिक स्तर पर भी विपरीत रहे ये दोनों देश मौजूदा कालखंड में नए संबंधों को परिभाषित करने जा रहे हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन चीन का साझा विरोध साझा मुद्दा बनकर जरूर उभरा है। कोरोना के संदर्भ में चीन पर फोकस जरूर रहेगा। रूस की खुफिया एजेंसी केजीबी ने ही 2016 में दुष्प्रचार किया था कि अमरीका ने दुनिया में एड्स को फैलाया है। यह सच साबित नहीं हो सका, लेकिन महाशक्तियां अक्सर ऐसा करती रही हैं, ताकि फोकस बदलते रहें और देश ‘खलनायक’ स्थापित होते रहें। हालांकि अमरीका आज जिन जैविक, रासायनिक हथियारों की बात कर रहा है, उसने ही इराक युद्ध में इन हथियारों का अघोषित इस्तेमाल किया था। बल्कि तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन पर ऐसे अस्त्र बनाने के आरोप भी अमरीका ने ही लगाए थे, लेकिन खोदा पहाड़, निकली खाली सुरंग...! अब अमरीका और चीन के दरमियान प्रतिद्वंद्विता जारी है।

हालांकि चीन में भी कोरोना संक्रमण फैलने की ख़बरें आती रही हैं, लेकिन कितने संक्रमित हुए और कितनी मौतें हुईं, इसका पुष्ट आंकड़ा आज तक दुनिया में नहीं दिया गया। शायद विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी जानकारी नहीं है! अमरीका में कोरोना के स्रोत को लेकर भिन्न मत रहे हैं। राष्ट्रपति बाइडेन के प्रमुख सलाहकार एंथनी फाउची भी लैब थ्योरी का खंडन करते थे। अब उन्होंने पलटी मार ली है और वह समर्थन कर रहे हैं कि कोरोना वायरस वुहान की प्रयोगशाला में मानव-निर्मित वायरस हो सकता है। बहरहाल अमरीकी जांच का निष्कर्ष और मकसद क्या है, इसका खुलासा बाद में ही संभव है, लेकिन अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए चीन विश्व स्वास्थ्य संगठन, गावी और यूनिसेफ  के मंचों का इस्तेमाल कर सकता है।