Saturday, January 23, 2021 06:49 PM

चुनाव में भविष्यवाणी की विफलता: प्रो. एनके सिंह, अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार

प्रो. एनके सिंह

अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार

राष्ट्रीय जनता दल को उभारने में जातीय कारक ने भूमिका निभाई है तथा तेजस्वी यादव एक नेता के रूप में प्रतिस्थापित हुए हैं। लेकिन उनकी कमजोरी यह है कि वह नौवीं क्लास फेल हैं तथा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय जरूरतों को वह समझते नहीं हैं। ऐसी योग्यता के साथ वह मुख्यमंत्री पद के लिए पात्र नहीं लगते हैं। हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान उनकी रैलियों में खूब भीड़ जुटी, लेकिन नागरिकता कानून जैसे मसलों पर वह स्पष्ट रूप से अपने को अभिव्यक्त नहीं कर पाए…

बिहार में हाल में हुए चुनावों ने यह साबित कर दिया कि विभिन्न प्रकार की प्रगति के बावजूद चुनाव परिणामों के सटीक भविष्यकथन देने में कुछ भी व्यावहारिक नहीं है। पुराने दिनों में यह मीडिएशंज व इरादे थे जो आने वाले घटनाक्रम की भविष्यवाणी के लिए मायने रखते थे जिन पर बुद्धिमान वृद्ध लोग चिंतन करते थे। वे भविष्य की भविष्यवाणी करते थे तथा आने वाले घटनाक्रम की रूपरेखा की थाह लेने की कोशिश करते थे। इन दिनों यह काम मशीनों पर निर्भर हो गया है तथा कम्प्यूटर विविध आमूल परिवर्तन व अभिकलन देते हैं। बिहार सभी गपशप और ज्योतिष का केंद्र था। मैंने इसी कॉलम में दो सप्ताह पहले बिहार के चुनाव परिणामों पर भविष्य कथन करते हुए लिखा था : ‘भाजपा सभी जातियों में एका करने के राष्ट्रवाद का अनुगमन करेगी तथा राष्ट्रीय जनता दल व कांग्रेस की सभी विरोधी पार्टियों में एकता का प्रयास करेगी। इस चुनाव के दूरगामी परिणाम होंगे जिनके देश की राजनीति के लिए भी कुछ मायने होंगे। भाजपा यह सोचकर चुनाव लड़ रही है कि उसे आगे रहना है तथा चुनाव परिणामों पर आधिपत्य करना है। लेकिन नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड को कुछ आघात लगेगा।

उसे करीब 20 फीसदी हानि होगी जबकि भाजपा को लेकर संभावना है कि वह दो दलों के गठबंधन का नेतृत्व करेगी। दूसरा विकास यह होगा कि राष्ट्रीय जनता दल संसदीय उपलब्धि की बुरी छाया से उभरते हुए प्रदर्शन करेगा जब उसे केवल चार सीटें मिली थीं। लोक जनशक्ति पार्टी को छह सीटें मिली थीं। भाजपा को 17 तथा जद यू को 16 सीटें मिली थीं। वर्ष 2019 में कांग्रेस को केवल एक सीट मिली थी। इसी तरह 2015 में असेंबली चुनाव में जनता दल यूनाइटेड को 71, जबकि भाजपा को 53 सीटें मिली थीं। इसी समय राष्ट्रीय जनता दल ने 80, जबकि कांग्रेस ने 26 सीटें जीती थीं। यह स्पष्ट दिखाता है कि पिछले अवसरों के विपरीत कांग्रेस की सीटें घटी हैं। अब वह निचले पायदान पर आ चुकी है तथा उसने यहां तक कि विपक्ष में भी अपना नेतृत्व पायदान खो दिया है। केंद्र में कांग्रेस कम से कम विपक्ष में सबसे बड़ी पार्टी है। यह साफ दिखता है कि इस चुनाव में भाजपा ज्यादा वोट और ज्यादा सीटें जीतेगी। यह स्थिति महाराष्ट्र जैसी होगी जहां मुख्यमंत्री को बहुमत हासिल नहीं है।’ इस कॉलम में यह कहा गया था कि नीतीश कुमार के दल की सीटें घटने के बावजूद वह एनडीए के नेता के रूप मेें बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे।

हां, यह जरूर है कि अगर लोक जनशक्ति पार्टी ने जनता दल यूनाइटेड को आघात न पहुंचाया होता तो उसकी सीटें ज्यादा हो सकती थीं। मैंने जो अनुमान व्यक्त किया था, भाजपा ने उसी के अनुरूप इस चुनाव में प्रदर्शन किया है। कांग्रेस को लेकर मेरा अनुमान घटतर था तथा मैंने लिखा था कि इस पार्टी को इस चुनाव में ज्यादा नुकसान होगा। इस पार्टी ने इसे दी गई कुल सीटों का लगभग तीन-चौथाई घाटा खाया तथा इसके कारण राष्ट्रीय जनता दल के प्रदर्शन में भी कमी आई। इसी तरह जनता दल यूनाइटेड के मामले में उन्होंने इतना कुछ न खोया होता अगर चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने सभी सीटों पर चुनाव न लड़ा होता, जहां उसने अन्य दलों को भी नुकसान पहुंचाया। इस चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी की उपलब्धि यही है कि इसने एक सीट जीती तथा अन्य सीटों पर इसने अन्य दलों को नुकसान पहुंचाया। उन्हें ठीक ही वोट कटवा पार्टी का नाम दिया गया है। एक हिंदी दैनिक के अलावा अन्य किसी भी अखबार ने यह भविष्यवाणी नहीं की थी कि भाजपा नीतीश कुमार के साथ मिलकर सरकार का निर्माण करेगी। ‘दिव्य हिमाचल’ में मैंने यह भविष्यवाणी की थी। उस समय मेरी इस भविष्यवाणी की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया क्योंकि सभी तेजस्वी यादव को उभरते सितारे के रूप में देख रहे थे। हालांकि इस बात में कोई संदेह नहीं कि वह भारी भीड़ को आकर्षित कर रहे थे। यह लगभग सार्वभौमिक रूप से दावा किया जा रहा था कि नीतीश कुमार अब थक चुके हैं तथा प्रभावी नहीं रहे हैं। इसमें संदेह नहीं कि यह सब कुछ दिख रहा था। इसी का परिणाम है कि उन्होंने चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में यह उद्घोषित किया कि यह चुनाव उनका अंतिम चुनाव है। वह अंतिम बार सत्ता के लिए लड़ रहे हैं।

मेरे विचार में अगर उन्होंने ऐसा न किया होता तो उन्हें वोटों के मामले में और ज्यादा नुकसान हो सकता था। यह उनकी संभावित हार की स्वीकृति की तरह था। मीडिया के कुछ ऐसे अपरिपक्व कर्मी भी हैं जिन्होंने राष्ट्रीय जनता दल की जीत का जश्न भी पहले ही मना लिया। उनका विश्वास था कि यादव सरकार सत्ता में आ जाएगी। जिन लोगों ने मुझसे पूछा, उन्हें मैंने यही बताया कि एनडीए सरकार बनाएगा। अब मुझसे कई लोग पूछ रहे हैं कि आपने यह सही-सही अनुमान कैसे लगा लिया। मेरा मानना है कि सभी पार्टियों का डाटा एकत्र करके निष्पक्ष दिमाग से सोचने पर ऐसा किया जा सकता है। आगे की ओर देखते हुए भविष्य के घटनाक्रम की तस्वीर उभारी जा सकती है। बिहार चुनाव इसलिए भी निर्णायक हैं कि यह भावी भारतीय शासन की नींव रखते हैं। देश के लोग जंगल राज को ज्यादा समय तक स्वीकार नहीं कर सकते तथा वे राज्यों की विकासात्मक जरूरतों के प्रति जागरूक हैं। राष्ट्रीय जनता दल को उभारने में जातीय कारक ने भूमिका निभाई है तथा तेजस्वी यादव एक नेता के रूप में प्रतिस्थापित हुए हैं। लेकिन उनकी कमजोरी यह है कि वह नौवीं क्लास फेल हैं तथा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय जरूरतों को वह समझते नहीं हैं। ऐसी योग्यता के साथ वह मुख्यमंत्री पद के लिए पात्र नहीं लगते हैं। हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान उनकी रैलियों में खूब भीड़ जुटी, लेकिन नागरिकता कानून जैसे मसलों पर वह स्पष्ट रूप से अपने को अभिव्यक्त नहीं कर पाए।

आने वाले दिनों में उनकी पहचान राहुल गांधी की तरह एक कमजोर पक्ष वाले नेता की हो सकती है। देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को कोई चुनौती नहीं है। नीतीश कुमार के शपथ लेने के बाद यह भी साफ हो गया है कि भाजपा एक साफ छवि वाली पार्टी है तथा उसकी जनता में विश्वसनीयता भी है। पार्टी अपने वादों और वचनबद्धताओं के प्रति कटिबद्ध लगती है। यही उसके फैलाव का आधार है। भाजपा अपना विस्तार कर रही है तथा शीघ्र ही वह अन्य राज्यों में भी बेहतर कर सकती है। पार्टी की सफलता का राज ईमानदार तथा कटिबद्ध कैडर है। यही इसकी शक्ति है। यह अपने भावी पीढ़ी के नेताओं को भी उभार पा रही है, जबकि कांग्रेस परिवारवाद की छाया से बाहर नहीं निकल पा रही है। जिस तरह से जेपी नड्डा ने बिहार चुनाव में कमान संभाली, उससे उनके कद में छलांग सुनिश्चित हुई। यह दुखद है कि कांग्रेस, जिसे विपक्ष में अगुवा होना चाहिए था, वह विषाद से बाहर नहीं निकल पा रही है। ग्यारह राज्यों में चुनाव हारने के बावजूद यह पार्टी जाग नहीं पा रही है तथा हार पर कोई मंथन नहीं हो रहा है। इस पार्टी का क्या भविष्य है, यह बताना कठिन है।

ई-मेलः [email protected]

The post चुनाव में भविष्यवाणी की विफलता: प्रो. एनके सिंह, अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार appeared first on Divya Himachal.