Tuesday, April 13, 2021 09:47 AM

मंडी में कांग्रेस ने बदल दी रणनीति

अमन अग्निहोत्री—मंडी

नगर निगम मंडी के चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस मार्च के पहले या दूसरे हफ्ते में शक्ति प्रदर्शन करेगी। यही नहीं, कांग्रेस अपने उम्मीदवार तय करने से पहले वार्डबाइज पर्यवेक्षक भी भेजेगी। पर्यवेक्षक जनता की नब्ज टटोल कर संभावित जिताऊ प्रत्याशियों की रिपोर्ट तैयार करेंगे और उसके बाद कांग्रेस टिकट फाइनल करेगी। नगर निगम चुनावों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश पैदा करने और प्रदेश सरकार व भाजपा से टक्कर लेने के लिए कांग्रेस ने भी एक बड़ी बैठक व रैली करने का निर्णय लिया है। रैली में कांग्रेस टिकट के चाहवानों को भी अपना दमखम दिखाना होगा। रैली के बाद ही कांग्रेस अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेगी। हालांकि इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस अपने उम्मीदवारों की घोषणा भाजपा से पहले कर सकती है, लेकिन भाजपा व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा नगर निगम चुनाव को लेकर अपनाई गई रणनीति को देखते हुए कांग्रेस ने भी अब नीति बदल दी है।

मंडी नगर निगम के 15 वार्डों से कांग्रेस टिकट के लिए अब तक 50 से अधिक आवेदन आ चुके हैं। गुरुवार को नगर निगम मंडी के चुनावों के संबंध में एक बैठक का आयोजन चुनाव प्रभारी जीएस बाली की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में नगर निगम चुनावों को लेकर लंबी चर्चा की गई। बैठक में पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी, विधायक सुंदर ठाकुर, विधायक विक्रमादित्य सिंह और विनोद सुलतानपुरी भी उपस्थित रहे। बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री जीएस बाली ने कहा कि कांग्रेस पूरी ताकत के साथ नगर निगम चुनाव लड़ने जा रही है। कांग्रेस जीतने वाले और पार्टी के प्रति वफादार प्रत्याशियों को ही चुनाव मैदान में उतारेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस निगम चुनावों के लिए अपना विजन डाक्यूमेंट भी जारी करेगी। इस अवसर पर कांग्रेस प्रदेश सचिव चेतराम, ओम प्रकाश ठाकुर, प्रदेश प्रवक्ता आकाश शर्मा, नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष पुष्पराम शर्मा, पूर्व जिप अध्यक्ष चंपा ठाकुर, संजीव गुलेरिया, कांग्रेस जिला प्रवक्ता योगेश सैणी और शहरी कांग्रेस अध्यक्ष अनिल सेन सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

छोटे से चुनाव में नहीं पडे़गी वीरभद्र की जरूरत

निगम चुनाव के प्रचार में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के भी उतरने को लेकर एक सवाल के जवाब में जीएस बाली ने कहा कि इस छोटे से चुनाव में कांग्रेस अपने इतने बडे़ नेता को नहीं उतारेगी। उनका आशीर्वाद वहीं से लिया जाएगा, लेकिन फिर भी अगर जरूरत पड़ी, तो वह कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत के लिए आएंगे।