Monday, October 26, 2020 02:56 PM

कोरोना काल में भारतीय थाली: निर्मल असो, स्वतंत्र लेखक

निर्मल असो

स्वतंत्र लेखक

कोरोना काल में भारतीय थाली का महत्त्व बढ़ते-बढ़ते संसद तक पहुंच गया। जिस थाली को हमने कोरोना भगाने के लिए बजाया, उसमें मोहतरमा जया बच्चन उर्फ समाजवादी सांसद को छेद नजर आ रहा है। दरअसल थाली इतनी बज गई कि अब छेद नजर आना स्वाभाविक है। गनीमत यह कि जया बच्चन ने अपने संसदीय दायित्व को पूरा करके थाली में छेद ढूंढ लिया, वरना अधिकांश जनप्रतिनिधि तो अब टूटी थाली बजाकर ही प्रसन्न हैं। थालियां दरअसल अब मजबूत और खूबसूरत दिखने लगी हैं, इसलिए भारतीयता के साथ परोसा गया हर अंश बड़ा लगने लगा है। यह थाली का कमाल है कि देश खा और खिला रहा है। थाली न होती तो संसद में बहस का मजमून कितना भूखा होता, इसलिए वहां पहुंचे काबिल हैं। काबिल वही है जिसके पास ज्यादा थालियां हैं और जो परोस सकता है। हम बतौर मतदाता भी तो यही अभिलाषा करते हैं कि जिसे वोट करें, वह अंततः हमारे लिए थाली सजा दे। आजादी के बाद इसीलिए थालियां सज रही हैं। हर कोई अपने मुताबिक थाली का आविष्कार कर रहा और हर बार थाली का आकार और प्रकार बदल जाता है। जिनकी थाली का आरक्षण हो जाता है, उनकी तारीफ में सारा देश और संसद भी लगातार इसे मांजने की कोशिश करती है। अपना देश गजब का माद्दा रखता है।

लगातार कोशिश कर रहा है कि हर देशवासी का उत्थान थाली से करे, लेकिन थाली है कि पकड़ में नहीं आती। आज भाजपा की है, तो कल किसी और की हो सकती है। कभी अटल बिहारी वाजपेयी ने सरकार की थाली का कद बढ़ाकर पच्चीस पार्टियों को खिलाया था, लेकिन अब देश की इकलौती थाली का पता देश नहीं, सत्ता हो गया। अब सत्ता की थाली है, लिहाजा संसद में बज गई और हर बार इसी तरह बजेगी। ऐसे में मोहतरमा जया बच्चन का  भ्रम है कि सत्ता की थाली में छेद हो सकता है। छेद होता तो राजनीति की थाली में जया क्यों होतीं। अमिताभ बच्चन ने तरक्की यूं ही नहीं की, बल्कि जब कभी उन्हें थाली में छेद दिखा भी, थाली बदल ली। इसलिए थाली बदलिए और थाली में परोसे गए का मजा लीजिए। मुलायम सिंह की थाली ने ही आपको थाली की चमक और खनक बताई, तो दूसरे की थाली में छेद क्यों? सांसद रवि किशन हो या कंगना रणौत, दोनों तसल्ली से सत्ता की थाली में खा रहे हैं, तो आपको छेद कहां से नजर आ रहा है। यह सरासर भारत की थाली को बदनाम करने की साजिश है। हम तो कहेंगे कि आप जैसों की थालियों ने ही देश की छवि बिगाड़ी है, बल्कि वक्त आ गया है कि सांसदों का कोरोना टेस्ट करने से पहले इनका थाली टेस्ट कराया जाए, ताकि संक्रमण न फैले।

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