Sunday, October 25, 2020 01:55 AM

कोरोना अभी जारी रहेगा

बीते कुछ दिनों में कोरोना वायरस के कुछ नए रुझान सामने आए हैं।  हररोज नए संक्रमित मरीजों की संख्या 90,000 से कम रही है, जबकि एक बार आंकड़ा एक लाख को छूने वाला था। संक्रमण से मुक्त होकर ठीक होने वालों की संख्या, बीमार लोगों की तुलना में, अधिक है और सक्रिय मरीजों की संख्या 10.5 लाख से घटकर करीब 9.7 लाख तक आ गई है। ये तमाम राष्ट्रीय रुझान पहली बार सामने आ रहे हैं। उनमें निरंतरता भी देखी जा सकती है। ये आकलन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा दिए गए डाटा के आधार पर किए गए हैं। क्या इन रुझानों के अर्थ ये हैं कि भारत में कोरोना महामारी का विषाणु दम तोड़ने लगा है? बेशक ऐसे निष्कर्ष पर पहुंचना फिलहाल जल्दबाजी होगी, लेकिन प्रख्यात चिकित्सकों और वैज्ञानिकों का ही मानना है कि यदि स्वस्थ होने की संख्या, संक्रमितों की तुलना में, लगातार ज्यादा है, यदि रोजाना संक्रमित मरीजों की औसतन संख्या 81,000 से ज्यादा तक लुढ़क आई है, यदि अस्पतालों और घरों पर उपचाराधीन आबादी की संख्या कम हो रही है और आर-फैक्टर भी ‘1’ से कम नकारात्मक स्थिति में है, तो बेशक कोरोना का संक्रमण सिकुड़ रहा है।

 अलबत्ता यह निष्कर्ष उचित नहीं है कि कोरोना वायरस समाप्त होने के मुहाने पर आ गया है। मौजूदा परिस्थितियों का एक कारण यह भी हो सकता है कि बीते सप्ताह अपेक्षाकृत 20 फीसदी टेस्टिंग कम की गई है, लिहाजा संक्रमितों का आंकड़ा भी कम आया है, लेकिन 24 घंटे में 11.5 लाख से अधिक टेस्ट कम भी नहीं होते। भारत में कुल 6.75 करोड़ से अधिक लोगों के कोरोना टेस्ट किए जा चुके हैं और इस लिहाज से हम विश्व में तीसरे स्थान पर हैं। बहरहाल रोजाना नए संक्रमित मरीजों के आंकड़े ही कम नहीं हुए हैं, बल्कि मौतें भी घटी हैं। हालांकि अब भी 106 जिले ऐसे हैं, जहां 10,000 से ज्यादा मामले हरेक जिले में मिले हैं। इनमें 32 जिले ऐसे हैं, जो बुरी तरह संक्रमित सात राज्यों से बाहर हैं। महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, उप्र, दिल्ली और पंजाब-ये सात राज्य ऐसे हैं, जहां कोरोना ने बुरी तरह और व्यापक पैमाने पर प्रहार किए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी मुख्यमंत्रियों की बैठक में इन सात राज्यों के हालात और तेजी से फैलते संक्रमण पर चिंता जताई थी।

 सितंबर माह के दौरान 11 जिलों में संक्रमण के मामले 100 फीसदी से भी अधिक बढ़े हैं। सबसे अधिक संक्रमण की बढ़ोतरी जम्मू में देखी गई। मौतों के संदर्भ में 140 जिले ऐसे हैं, जहां औसतन 100 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, लेकिन 31 जिलों में 500 से ज्यादा मौतें हुई हैं। भारत में कोरोना महामारी व्यापक स्तर पर फैली है। इसके बावजूद कुछ सकारात्मक रुझान सामने आते हैं, तो आम आदमी के भीतर उम्मीद जगना स्वाभाविक है कि कोरोना जा रहा है, लेकिन यथार्थ यह नहीं है। कोरोना के संदर्भ में आर-फैक्टर भी गौरतलब है, जो पहली बार ‘1’ से कम देखा गया है। आर-फैक्टर संकेत देता है कि जो संक्रमित हो चुके हैं, वे देश की आबादी के अन्य हिस्से को कितना संक्रमित कर पा रहे हैं या संक्रमण कम फैल रहा है। यह एक ऐसा पैमाना है कि एक संक्रमित व्यक्ति औसतन कितनों को संक्रमित कर रहा है? मौजूदा आर-वेल्यू एक सुखद संकेत है, क्योंकि औसतन ‘1’ से भी कम व्यक्ति कोरोना ग्रसित हो रहा है। यानी संक्रमण का फैलाव और प्रभाव हानिकारक नहीं है। कोरोना वायरस से ठीक होने वालों की बढ़ती संख्या और सक्रिय मरीजों का आंकड़ा जो सामने आ रहा है, वह रुझान भी पहली बार है। कोरोना वायरस की भारत के हिस्सों में ‘पहली लहर’ है अथवा दूसरी है, यह आकलन तो विशेषज्ञ ही देंगे, हम कोरोना के ‘पीक’ को लेकर भी कोई टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन जो सत्य सामने आ रहा है, वह खुशगवार है।

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