Friday, October 30, 2020 03:56 PM

दयोल में बांडा महोत्सव, मशालों संग डांस

धूमधाम से मनाया उत्सव; तीन दिन के बजाय एक दिन में ही समापन, 25 साल से बंद रीत युवाओं की पहल से हुई शुरू

जनजातीय क्षेत्र भरमौर की होली घाटी के दयोल गांव में पारंपरिक बांडा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान बीती रात तीन बड़ी-बड़ी मशालों के बीच पारंपरिक डंडारस नृत्य का भी गांव में आयोजन हुआ। हालांकि तीन दिनों तक चलने वाला आयोजन इस साल एक दिन का ही हुआ। बहरहाल स्थानीय आयोजन समिति ने बांडा महोत्सव का आयोजन कर अपनी परंपरा को निभाया।

आयोजन को लेकर मान्यता है कि बर्फबारी होने के कारण क्षेत्र के लोग व भेड़ पालक उत्सव के आखिरी दिन अपने पशुधन के साथ निचले इलाकों की ओर पलायन कर जाते हैं। महोत्सव की शुरुआत होते ही रिश्तेदार, बहू-बेटियां एक-दूसरे से मिलने आते हैं और उत्सव के आखिरी दिन सभी एक-दूसरे से जुदा हो जाते हैं। बता दें कि भरमौर एरिया में हिमपात को देखते हुए दयोल गांव के लोगों ने सुरक्षा के लिहाज से जिला कांगड़ा के निचले क्षेत्रों में भी घर बनाए हैं। दशकों से मनाए जाने वाला बांडा महोत्सव 25 सालों से बंद पड़ा था, लेकिन गांव के युवाओं की पहल ने अपने इस पारंपरिक उत्सव को पिछले साल फिर से शुरू कर दिया और वर्षों से चली आ रही परंपराओं को पुराने रीति-रिवाजों के साथ ही निभाया जा रहा है।

महोत्सव के आखिरी दिन रात को तीन मशालें जलाई जाती हैं। मान्यता है कि ये मशालें ब्रड्डा, विष्णु व महेश का प्रतीक होती हैं। गांव की महिलाएं व पुरुष अपनी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर मशाल के चारों तरफ  घूमते हैं। मशाल के इर्द-गिर्द घूम कर डंडारस नृत्य किया जाता है और ये नृत्य तब तक किया जाता है जब तक मशालें बुझ नहीं जाती।

लिहाजा बीती रात को यह पूरा आयोजन दयोल गांव में हुआ। बांडा महोत्सव समिति के संरक्षक डा. केहर सिंह बताते है कि महोत्सव के पहले दिन खेल आयोजन हुआ। साथ ही रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन भी गांव में किया गया। उन्होंने बताया कि 25 सालों के बाद पिछले साल यह आयोजन आरंभ किया गया। लिहाजा समिति ने परंपरा को निभाते हुए इस साल भी यह आयोजन किया गया।

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