Tuesday, December 07, 2021 05:43 AM

युद्धविराम के बावजूद...

जांबाज सैनिकों की इतनी शहादत मई, 2020 के बाद हुई है और करीब 17 सालों के बाद पुंछ इलाके ने ऐसी भयावह मुठभेड़ देखी-सुनी है। जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में सेना और सुरक्षा बलों का ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा, जब तक आतंकियों और उनके स्थानीय मुखबिरों का सफाया नहीं हो जाता। 3 मई, 2020 के आतंकी हमले में हमारे 5 सैनिक शहीद हुए थे। सोमवार के आतंकी हमले में भी एक जूनियर कमीशंड अफसर (नायब सूबेदार) समेत 5 रणबांकुरों ने शहादत दी है। बीते डेढ़ साल के दौरान यह सबसे बड़ी शहादत है। हमारे राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को कुछ एहसास हुआ होगा कि कश्मीर में आतंकवाद लगातार रंग बदल रहा है, लिहाजा रणनीति पर नए सिरे से मंथन करना होगा। इन विकल्पों को लेकर भी विमर्श करना होगा कि एक और स्ट्राइक कब और कहां की जानी चाहिए, बेशक युद्धविराम घोषित है और हमारे हाथ बंधे हैं। युद्धविराम पाकिस्तान के लिए भी जिम्मेदार मुद्दा होना चाहिए। हमारे रक्षा विशेषज्ञों के आकलन हैं कि युद्धविराम के कारण पाकिस्तान को औसतन हररोज़ 1500 करोड़ रुपए का फायदा हो रहा है। भारत को जो भी निर्णायक फैसला लेना है, वह युद्धविराम के बावजूद लेना होगा।

 भारत के पास आतंकवाद के खिलाफ सभी प्रमाण और साक्ष्य मौजूद हैं, लिहाजा युद्धविराम के बावजूद संकोच नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्रीय सरोकार का मसला है। एक-एक सैनिक की शहादत राष्ट्रीय क्षति है। करीब 17 साल पहले 2004 में आतंकियों के खिलाफ इतनी प्रहारक और भयावह मुठभेड़ की गई थी कि आतंकवाद को रास्ता भूलना पड़ा था। उसके बाद पुंछ इलाके में इतना बड़ा आतंकी हमला नहीं किया जा सका। हालांकि उस मुठभेड़ी कार्रवाई में भी हमारे 4 सैनिकों को ‘सर्वोच्च बलिदान’ देना पड़ा। बहरहाल इस बार पाकिस्तान ने आतंकियों की रणनीति में बदलाव किया था। चूंकि जम्मू-कश्मीर में आतंकी गुटों के लगभग सभी प्रमुख कमांडर ढेर किए जा चुके थे और स्थानीय लड़ाकों को भर्ती से बचाया जा रहा था, उन्हें समझाया जा रहा था, लिहाजा काडर की कमी आतंकी गुट महसूस कर रहे थे। कश्मीर में मौसम ठंडा होने लगा है, लिहाजा बर्फबारी से पहले ही आतंकी हमलों की गति तेज  करने के मद्देनजर पाकिस्तान ने ‘पार्ट टाइम आतंकियों’ को मोटी रकम की पेशकश की और सिर्फ एक हमला करने की हिदायत दी थी। हमारी मिलिट्री इंटेलीजेंस ने ऐसे संवादों को इंटरसेप्ट किया था और उसी के मुताबिक रणनीति तैयार की थी। आतंकियों ने एक साथ पुंछ, अनंतनाग, बांदीपोरा और शोपियां के इलाकों में हमले किए, लिहाजा सेना को भी मुठभेड़ सभी जगह एक साथ करनी पड़ी। यह लिखते हुए ख़बर आई थी कि मंगलवार को शोपियां में एक और मुठभेड़ शुरू करनी पड़ी और दो आतंकियों को घेरा गया है। इन हमलों में कुल कितने आतंकी ढेर किए गए, यह इतना महत्त्वपूर्ण नहीं है, जितना चिंताजनक पहलू यह है कि इन मुठभेड़ों में हमारे जवान शहीद होते रहे हैं। अभी पुंछ इलाके की मुठभेड़ के पूरे ब्यौरे सार्वजनिक होने शेष हैं।

 आतंकियों के पास आधुनिक हथियार, गोली-बारूद सब कुछ है। चूंकि इन इलाकों में घने जंगल, नदी-नाले और पहाड़ हैं, लिहाजा उनके सहारे आतंकी घुसपैठ करते हैं, लेकिन वे इतने दिनों तक जि़ंदा कैसे रहते हैं? इस सवाल पर बताया जा रहा है कि करीब 60 फीसदी कश्मीर में आतंकियों के मुखबिर फैले हुए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर में जिन 16-18 स्थानों पर छापेमारी कर लोगों को गिरफ्तार किया है, उन्होंने ऐसे खुलासे किए हैं। उनकी निशानदेही पर ही दिल्ली के लक्ष्मीनगर इलाके से एक पाकिस्तानी आतंकी अशरफ अली को पकड़ा गया है। उसके पास से ए.के.-47, आधुनिक पिस्टल, 60 राउंड गोलियां, ग्रेनेड आदि हथियार बरामद किए गए हैं। त्योहारों के इस मौसम में राजधानी को दहलाने की साजि़श पर काम चल रहा था। वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लगातार संपर्क में था। उसके पास से फर्जी भारतीय पासपोर्ट भी बरामद किया गया है। आतंकवाद का यह विस्तार, यकीनन, बेहद चिंताजनक है। जो मुखबिर कश्मीर में और उसके बाहर पकड़े गए हैं, उन्हें भी कठोर दंड दिया जाना चाहिए, ताकि उनकी जमात सबक सीख सके। हम सरहदों वाले इलाकों को पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। यह व्यावहारिक और संभव नहीं है, घुसपैठ एक निरंतर समस्या बनी रहेगी, लिहाजा सरकार और सेना को एक और स्ट्राइक, बेशक कई बार, करनी चाहिए।