Friday, September 25, 2020 10:22 PM

देवभूमि से अयोध्या गए कार सेवकों पर बरसी थी गोलियां, आंदोलन में प्रदेश के लोगों ने भी की थी शिरकत

राम मंदिर निर्माण के लिए शुरू हुए आंदोलन में प्रदेश के लोगों ने भी की थी शिरकत, सरयू नदी में बही थी लाशें

पालमपुर, कांगड़ा – अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर शुरू हुए आंदोलन में शिरकत करने के लिए पालमपुर के तत्कालीन विधायक डा. शिव कुमार के नेतृत्व में पालमपुर विधानसभा से भी चार लोग गए थे। जून, 1989 में पालमपुर में भाजपा की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के पारित प्रस्ताव होने के 16 माह बाद 90 के दशक के प्रारंभिक दिनों में भारतीय जनता पार्टी व विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय आह्वान पर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर खूनी संघर्ष हुआ था।

पूर्व विधायक प्रवीण कुमार बताते हैं कि मंदिर निर्माण के संकल्प को लेकर कारसेवकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई गई थी। उस समय कारसेवकों की लाशों को सरेआम सरयू नदी में तैरते हुए जनता ने देखा था। पूर्व विधायक प्रवीण कुमार ने बताया कि उसी दौरान सभी विधायकों को आदेश हुए कि सौ-सौ कारसेवकों के जत्थे के साथ अयोध्या पहुंचें।

ऐसे में अयोध्या की निरंतर बिगड़ती स्थिति के बीच तत्कालीन विधायक डा. शिव के साथ पालमपुर हल्के से तीन लोग गए थे, जिनमें आईमा से कुलदीप भारद्वाज, घुघर से रणजीत सिंह ठाकुर और प्रवीण कुमार शामिल थे। वहीं, सुलह हल्के से पंडित विष्णु दत्त, छैंछड़ी से चंदू लाल, त्रिलोक चंद, अजय धीमान, खैरा से राजेश व्यास व मनोज व्यास केवल दस लोगों के ही जत्थे ने डा. शिव कुमार के साथ अयोध्या के लिए कूच की थी।

अब खत्म होगा 1990 में मिली प्रताड़ना का दर्द

राम मंदिर का निर्माण शुरू होने जा रहा है, तो कांगड़ा के कारसेवकों को 1990 के दौरान मिली प्रताड़ना का दर्द खत्म हो गया है। विश्व हिंदू परिषद कांगड़ा के अध्यक्ष रहे हलिंदर ठाकुर यहां से अकेले ऐसे शख्स थे, जो बाबरी मस्जिद विध्वंस करने पहुंचे थे। आज जब यहां मंदिर का निर्माण होने जा रहा है, तो उनके चेहरे पर खुशी झलक रही है। उस समय की याद ताजा करते हुए हलिंदर कहते हैं कि वह 30 अक्तूबर, 1990 को कार सेवा के लिए पहुंचे थे।

पहले मुरादाबाद, फिर हरदोई और उसके बाद सीतापुर में गिरफ्तारी हुई। सेवा से लौटने के दो माह बाद फिर विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर आधा दर्जन सदस्यों के साथ सत्याग्रह में हिस्सा लेने पहुंचे। लखनऊ जाने के लिए पठानकोट पहुंचे, तो वहां कांगड़ा के करीब पांच दर्जन कार्यकर्ता मौजूद थे, जो लखनऊ के लिए रवाना हुए। वहां फिर गिरफ्तारी हुई और 27 दिसंबर 1990 को न्यायालय एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अयोध्या जिला फैजाबाद के पास जमानत हुई।

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