Monday, November 30, 2020 04:14 AM

ध्यान के नजरिये से

हजारों सालों से जैन शाकाहारी रहे हैं। उनके सभी 24 गुरु योद्धा जाति से आते हैं और वो सब मांसाहारी थे। उन लोगों का क्या हुआ? ध्यान ने उनके पूरे नजरिये को बदल दिया। न केवल उनके हाथों से तलवार छूट गई, बल्कि उनका योद्धा वाला उग्र स्वभाव भी गायब हो गया। ध्यान ने उन्हें अस्तित्व से प्रेम करना सिखाया। वो संपूर्ण रूप से एक हो गए। शाकाहारी होना उस क्रांति का केवल एक हिस्सा है। हम शाकाहारवाद को बढ़ावा नहीं देते हैं। हमारे लिए इसका कोई महत्त्व भी नहीं है। यह मेरा सिद्धांत भी नहीं है क्योंकि यह बस एक उप उत्पाद है। मैं इस पर जोर नहीं देता, बल्कि मैं ध्यान पर जोर देता हूं। मैं कहता हूं और अधिक सतर्क रहें और अधिक शांत रहें, अधिक खुशहाल रहें, अधिक उन्माद में रहें और अपने आंतरिक केंद्र को तलाशें।  अगर आप शाकाहारवाद को एक धर्म या सिद्धांत की तरह जीते हैं तो आपको लगातार मांस के लिए उत्कंठा होती रहेगी। आप उसके बारे में लगातार सोचते रहेंगे या उसका सपना देखते रहेंगे और आपका शाकाहारी होना आपके अहंकार के लिए केवल एक सजावट मात्र रह जाएगा।

 मैं जानता हूं कि अगर आप ध्यान करते हैं तो आप एक नई ग्रहणशीलता और संवेदनशीलता को विकसित करने जा रहे हैं जिसके तहत आप जानवरों को मार नहीं सकते हैं। शाकाहारी समुदाय के पास कई प्रकार के स्वादिष्ट भोजन है। ध्यान के कारण उन्होंने मांस खाना छोड़ दिया था। लेकिन वो अधिक से अधिक स्वादिष्ट भोजन की खोज करने लगे ताकि उन्हें मांस का स्वाद याद न रहे।  यह पृथ्वी और मनुष्य पर्याप्त मात्रा में शाकाहारी भोजन उगाने में सक्षम है जैसे कि सब्जियां, फल और ऐसे कई फल जिसका अस्तित्व पहले नहीं था। केवल संकरण (दूसरी जातियों से एक नई जाति के पौधे को जन्म देना) की आवश्यकता है और फिर हर रोज हमारे पास कई प्रकार के बेहतर भोजन उपलब्ध होंगे। याद रखें कि संपूर्ण जानवर साम्राज्य हमारा ही हिस्सा है, यहां तक की पेड़ भी। अब वैज्ञानिक इस निष्कर्ष को स्थापित कर रहे हैं कि पेड़ भी जीवित होते हैं। न केवल वह जीवित होते हैं, बल्कि उनमें आपसे भी अधिक संवेदना होती है।

 उन्होंने पेड़ के चारो ओर मशीन लगाकर, पेड़ों पर तार जोड़कर और कार्डियोग्राफ  तक लगाकर देखा है जिससे दिल की धड़कन का पता चलता है। यह देखा गया है कि अगर कोई पेड़ को काटने आता है तो कार्डियोग्राम पर पेड़ की धड़कन पहले से कई गुना बढ़ जाती है। पेड़ वाकई में डर से कांप जाता है। ध्यान धीरे-धीरे आपकी संवेदना को वापस ले आता है और वह व्यक्ति जिसने ध्यान के द्वारा परमानंद का अनुभव किया है, वह पेड़ और जानवरों के प्रति काफी संवेदनशील होगा। यही संवेदना लोगों को शाकाहारी बनाती है। यह एक लाभ है न कि नुकसान। यह प्राकृतिक सुंदरता के प्रति आपके प्यार, करुणा, संवेदना और समझ को और अधिक बढ़ा देगा। यह आपको महान संगीत के प्रति जागरूक करेगा भले ही वह संगीत देवदार के पेड़ों के बीच बहती हवा का या नदियों के बहते पानी का हो। शाकाहारी होना एक छोटी सी बात है। हमें एक दुनिया का निर्माण करना है, जिसमें वास्तविक में संवेदनशील लोग हों जो संगीत, कविता, पेंटिंग, प्रकृति, मानवीय खूबसूरती, चांद, तारे, सूर्य और अपने चारों ओर की दुनिया को समझ सकें।

The post ध्यान के नजरिये से appeared first on Divya Himachal.