Tuesday, December 07, 2021 04:53 AM

कालेज छात्रों के लिए ई-कंटेंट

कोरोना काल के बाद से उच्च शिक्षा से जुड़े छात्रों और अध्यापकों के लिए ई-कंटेंट का महत्त्व बहुत अधिक हो गया है। देश के अनेक राज्यों में अनेक विश्वविद्यालयों और अनेक कॉलेजों ने ई-कंटेंट को विकसित करके छात्रों को उपलब्ध करने की ओर ध्यान नहीं दिया है। मध्य प्रदेश ने इसकी शुरुआत की है। अन्य राज्यों को भी गति पकडऩी चाहिए। आने वाले दिनों में ई-कंटेंट ऑनलाइन एजुकेशन की हमारी पढऩे-पढ़ाने की क्लासिक प्रणाली के साथ एक मजबूत ऐडऑन बनने वाला है। ई-कंटेंट ई-परीक्षा के लिए भी एक उपयुक्त आधार बन सकेगा। यह कोरोना जैसी स्थितियों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र की मदद करेगा। वर्तमान में डिजिटल मोड और उच्च शिक्षा एक-दूसरे के पूरक साबित हो रहे हैं। यदि इस दिशा में आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं तो इससे हमारी उच्च शिक्षा और ज्यादा प्रोग्रेसिव तथा समकालीन हो सकेगी....

उच्च शिक्षा जगत से जुड़ी ताजा खबर है कि मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के तहत फस्र्ट ईयर के कोर्सेस के लिए सभी डिपार्टमेंट्स के 17 प्रमुख सबजेक्ट का ई-कंटेंट तैयार किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक 10 नवंबर तक 1 हजार से ज्यादा ई-कंटेंट मॉडल तैयार किए जाने की प्लानिंग है। फस्र्ट ईयर के लिए लगभग 1500 मॉड्यूल्स के ई-कंटेंट तैयार करने का लक्ष्य है। इसके बाद कुछ अन्य विषयों पर भी कंटेंट तैयार किए जाएंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आधार पर ई-कंटेंट उपलब्ध कराने वाला मध्यप्रदेश संभवत: देश का पहला राज्य होगा, जहां कॉलेज के स्टूडेंट्स को कोर्स की किताबों के अलावा पढ़ाई के लिए ई-मैटीरियल भी उपलब्ध होगा। यह ई-कंटेंट ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध होगा। तैयार किए जा रहे कंटेंट छात्रों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियम के मुताबिक वीडियो व्याख्यान, ई-टेक्स्ट, मूल्यांकन के प्रश्न और अन्य विषयवस्तु के लिए उपलब्ध होंगे। जानकारी के मुताबिक नियमित शिक्षकों, अतिथि विद्वानों द्वारा यह कार्य नि:शुल्क किया जा रहा है। राजस्थान में भी सभी विषयों के बेहतरीन कंटेंट को तैयार कर उन्हें ऑनलाइन किया जाएगा और जहां पर विषयों के लेक्चरर की कमी है, वहां पर इस ई-कंटेंट के जरिए विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा। आज के दौर में ई-कंटेंट का छात्रों के लिए बहुत महत्त्व है।

ई-कंटेंट का कांसेप्ट समझना जरूरी है। मान लो कि आपके पास अध्ययन के लिए बहुत-सी किताबें, पत्रिकाएं आदि सामग्री है। यह सामग्री आपके पास पेपर पर उपलब्ध है तो इस सामग्री को हम आम बोलचाल की भाषा में पेपर-कंटेंट कह सकते हैं। इसके विपरीत यदि यही सामग्री डिजिटल फॉर्म में या इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में हो तो इसे ई-कंटेंट कहते हैं। ई-कंटेंट ई-शिक्षा को गतिशील करने में सक्षम है। ई-कंटेंट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि छात्र अपनी सहूलियत के हिसाब से किसी भी समय और कहीं पर भी अपना शैक्षिक कार्य कर सकते हैं। अर्थात इस शैक्षिक व्यवस्था में समय और स्थान की कोई पाबंदी नहीं है। ई-कंटेंट के माध्यम से छात्र वेब आधारित स्टडी मैटीरियल को अनिश्चित काल तक एक्सेस कर सकते हैं और बार-बार देख कर इसके जटिल पहलुओं को समझ सकते हैं। ई-शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई करना काफी हद तक कम लागत वाली होती है, क्योंकि छात्रों को पुस्तकें या किसी दूसरे स्टडी मैटीरियल पर पैसा खर्च नहीं करना पड़ता है। ई-कंटेंट पर्यावरण की दृष्टि से भी लाभदायक है क्योंकि यहां जानकारी को किताब के बजाय वेब आधारित एप व पोर्टल पर स्टोर किया जाता है। इससे कागज़ के निर्माण हेतु पेड़ों की कटाई पर रोक लगती है और हमारे पर्यावरण को बचाने में मदद मिलती है। ई-शिक्षा इंटरनेट और कंप्यूटर कौशल का ज्ञान विकसित करती है जो विद्यार्थियों को अपने जीवन और करियर के क्षेत्र में आगे बढऩे में मदद करेगा।

ई-शिक्षा की राह में चुनौतियां भी हैं। बिना आत्म अनुशासन या अच्छे संगठनात्मक कौशल के अभाव में विद्यार्थी ई-शिक्षा मोड में की जाने वाली पढ़ाई में पिछड़ सकते हैं। छात्र बिना किसी शिक्षक और सहपाठियों के अकेला महसूस कर सकते हैं। परिणामस्वरूप वे अवसाद से पीडि़त हो सकते हैं। खराब इंटरनेट कनेक्शन या पुराने कंप्यूटर, पाठ्यक्रम एक्सेस करने वाली सामग्री को निराशाजनक बना सकते हैं। भारत में बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी का अभाव व इंटरनेट की कम गति ई-शिक्षा की राह में सबसे बड़ी चुनौती है। वर्चुअल क्लासरूम में प्रैक्टिकल या लैब वर्क करना मुश्किल होता है। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों की भांति विद्युत व्यवस्था का अभाव है, जो ई-शिक्षा में रुकावट बन सकती है। आज के दौर में ई-कंटेंट विद्यार्थियों की आवश्यक मजबूरी बन गया है। दरअसल ई-सामग्री की कुछ विशेषताएं ही इसे अति महत्त्वपूर्ण बना देती हैं। ई-कंटेंट की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता इसका अपडेटेड होना है। सामान्यत: देखा जाता है कि मार्केट में उपलब्ध किताबें एक वर्ष पुरानी होती हैं। अपडेटेड सामग्री (एक वर्ष के भीतर के समसामयिक घटनाक्रम) का प्राय: उनमें अभाव होता है, जबकि परीक्षा में ज्यादातर प्रश्न इन्हीं अपडेटेड जानकारियों से पूछे जाते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ विषय जैसे अर्थशास्त्र, अंतरराष्ट्रीय संबंध, दिन-प्रतिदिन की प्रौद्योगिकी आदि में घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं। अत: इनमें ई-कंटेंट कहीं अधिक प्रासंगिक हो जाता है। कुल मिला कर विभिन्न विषयों जैसे अर्थशास्त्र, विधि, विज्ञान व प्रौद्योगिकी आदि की नवनीनतम सामग्री कहीं अधिक उपयोगी होती है। इसके अतिरिक्त ई-कंटेंट की जो दूसरी महत्त्वपूर्ण विशेषता है, वह यह है कि इसमें रंगीन चित्र, चार्ट व वीडियो आदि के माध्यम से विषय को जीवंत बना दिया जाता है, जबकि पेपर-कंटेंट में बहुत कम किताबें ऐसी होती हैं, जिनमें रंगीन चित्र, चार्ट आदि का बहुतायत में समावेश हो।

दरअसल ऐसा इसलिए नहीं होता क्योंकि इसकी वजह से किताबों के दाम में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है। कुछ विषय ऐसे होते हैं जैसे विज्ञान, भूगोल आदि, जिनमें रंगीन चित्रों या वीडियो से विषय को बहुत आसानी से समझा जा सकता है। इन चित्रों व डायग्राम के अभाव में विषय को समझ पाना काफी दुष्कर कार्य है। कोरोना काल के बाद से उच्च शिक्षा से जुड़े छात्रों और अध्यापकों के लिए ई-कंटेंट का महत्त्व बहुत अधिक हो गया है। देश के अनेक राज्यों में अनेक विश्वविद्यालयों और अनेक कॉलेजों ने ई-कंटेंट को विकसित करके छात्रों को उपलब्ध करने की ओर ध्यान नहीं दिया है। मध्य प्रदेश ने इसकी शुरुआत की है। अन्य राज्यों को भी गति पकडऩी चाहिए। आने वाले दिनों में ई-कंटेंट ऑनलाइन एजुकेशन की हमारी पढऩे-पढ़ाने की क्लासिक प्रणाली के साथ एक मजबूत ऐडऑन बनने वाला है। ई-कंटेंट ई-परीक्षा के लिए भी एक उपयुक्त आधार बन सकेगा। यह कोरोना जैसी स्थितियों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र की मदद करेगा। वर्तमान में डिजिटल मोड और उच्च शिक्षा एक-दूसरे के पूरक साबित हो रहे हैं। यदि इस दिशा में आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं तो इससे हमारी उच्च शिक्षा और ज्यादा प्रोग्रेसिव तथा समकालीन हो सकेगी। ई-कंटेंट की उपलब्धता और प्रयोग से छात्रों, अध्यापकों, परीक्षा से जुड़ी रेगुलेटरी संस्थाओं को काफी लचक मिल सकेगी। ई-कंटेंट क्लास टीचिंग का विकल्प न होकर एक डिजिटल लर्निंग टूल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उत्तर भारत के राज्यों में उच्च शिक्षा प्रशासन इस पर प्रोग्रेसिव कदम उठाए ताकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का श्रेष्ठ क्रियान्वयन हो सके।

डा. वरिंदर भाटिया

कालेज प्रिंसीपल

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