Sunday, March 07, 2021 05:14 PM

चुनाव आयोग के पास मतपेटियों का अकाल, ऐन मौके पर दूसरे राज्यों से मंगवाने पड़े इलेक्टोरल बॉक्स

विशेष संवाददाता—शिमला

पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में भाजपा सरकारी तंत्र का खुल कर दुरुपयोग कर रही है। अधिकारियों व कर्मचारियों पर दवाब बना कर उन्हें डराया धमकाया जा रहा है। यह आरेप कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह पठानिया ने लगाया है। उन्होंने कहा कि नगर निकाय चुनावों में भाजपा ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया, बावजूद इसके अधिकतर जगहों पर हार का मुंह देखना पड़ा। उन्होंने कहा कि भाजपा अब निर्दलियों को प्रलोभन देकर उन्हें अपना बनाने की पूरी कोशिश कर रही है।

 कई जगह, तो कांग्रेस के जीते हुए पार्षदों को भी प्रलोभन दिए जा रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आयोग आदर्श आचार संहिता पर अपनी आंखे मूंदे बैठा है। प्रदेश सरकार के मंत्री बीडीसी व जिला परिषद के चुनावों में सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रहे हैं। पूरा सरकारी अमला भाजपा के दबाव में काम कर रहा है। श्री पठानिया ने कहा कि नगर निकाय चुनावों में जहां कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है, वहां भी उन्हें तोड़ने के भाजपा पूरे प्रयास कर रही है।

अति दुर्गम क्षेत्र के लिए 20 को हेलिकाप्टर से जाएगी चार सदस्यीय टीम

पवन कुमार शर्मा—धर्मशाला     

प्रदेश में तीन चरणों में 17, 19 और 21 जनवरी को होने वाले पंचायत चुनाव में पहली मर्तबा कांगड़ा जिला के अति दुर्गम क्षेत्र बड़ा भंगाल में भी आखिरी चरण यानी 21 जनवरी को मतदान होगा। बैजनाथ उपमंडल के तहत आने वाले बड़ा भंगाल में बाकायदा मतदान केंद्र बनाया गया है। मतदान संपन्न करवाने के लिए चार सदस्यीय टीम 20 जनवरी को हेलिकाप्टर से बड़ा भंगाल जाएगी। हालांकि बड़ा भंगाल के अधिकतर लोग इस समय बीड़ आ चुके हैं। उनके मताधिकार के लिए यहां मतदान केंद्र भी है, लेकिन पंचायत चुनाव में मताधिकार से कोई वंचित न रहे, इसके लिए बड़ा भंगाल में पशुधन के साथ ठहरे लोगों के लिए भी मतदान केंद्र बनाया गया है।

चुनावों के आखिरी चरण में जिला की 264 पंचायतों में होने वाले चुनाव के साथ बड़ा भंगाल पंचायत के लिए भी चुनाव संपन्न करवाए जाएंगे। बड़ा भंगाल के लिए 20 जनवरी को हेलिकाप्टर से जाने वाली टीम को लेकर 17 जनवरी को बाकायदा हेलिकाप्टर से रेकी भी की जाएगी। बड़ा भंगाल की कुल आबादी 627 है और यहां पर 439 वोटर हैं, जिनमें 227 पुरुष व 212 महिला मतदाता हैं। पंचायत में कुल पांच वार्ड हैं और इस बार प्रधान का पद अनरक्षित है।  बड़ा भंगाल में करीब 25 मतदाता हैं, जो मतदान करेंगे। पंचायत में 21 जनवरी को होने वाले चुनाव में सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक मतदान होगा, जिसके बाद पोलिंग टीम बीड़ वापस आ जाएगी। सर्दियों के मौसम में बड़ा भंगाल के लोग अमूमन नवंबर से मई तक 80 किलोमीटर दूर गांव बीड़ में बनाए अपने आशियानों में रहने आ जाते हैं। इस दौरान अति बुजुर्ग लोग और उनकी देखभाल के लिए चंद परिजन ही गांव में रहते हैं। सर्दियों में पंचायत का कार्यालय भी बीड़ से ही चलता है।

कांग्रेस के पाले से एक पार्षद को मिलाया साथ इनाम में दिया अध्यक्ष पद, पटियाला में अंडरग्राउंड हुए पार्षद को ढूंढ लाया भगवा दल

विपिन शर्मा—बीबीएन

नगर परिषद नालागढ़ की सरदारी के लिए मची खींचतान के बीच अब भाजपा ने बाजी पलटते हुए फिर बहुमत हासिल कर लिया है। भगवा बिग्रेड ने शुक्रवार रात हुए हाई वोल्टेज ड्रामे के दौरान कांग्रेस को उसके ही मोहरे से मात दी है। दरअसल, कांग्रेस के हाथों जीती बाजी हारने के बाबजूद भाजपा के पूर्व विधायक केएल ठाकुर ने नालागढ़ में नगर परिषद पर काबिज होने की उम्मीदें छोड़ी नहीं थीं।  यहां के भाजपाइयों ने कांग्रेस की कमजोर कडि़यों से संर्पक बनाए रखा और जैसे ही कोशिशें परवान चढ़ीं कांग्रेस के हाथों से जश्न का मौका छीन लिया। हालांकि कांग्रेस नेताओं ने अपने खेमे के पांचों पार्षदों को पटियाला में अंडरग्राउंड कर दिया था, लेकिन भगवा दल ने युवा नेता पुनीत शर्मा की अगवाई में इन पार्षदों को न केवल पटियाला से तलाश निकाला, बल्कि पुलिस के कडे़ पहरे के बीच रातोंरात शिमला पहुंचा दिया। मसलन बीते तीन दिन से जारी सियासी उलटफेर के बीच भाजपा ने कांग्रेस को उसके ही पैंतरे से जोरदार झटका दे डाला।

ताजा घटनाक्रम के बीच शनिवार को नालागढ़ के वार्ड नंबर तीन से कांग्रेस समर्थित पार्षद रीना ने परिवार संग शिमला में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की मौजूदगी में कांग्रेस को अलविदा कह भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा की लाज बचाने के बदले पार्टी ने भी रीना शर्मा को नगर परिषद में पांच साल के लिए अध्यक्ष पद का तोहफा दे दिया है, रीना शर्मा पांच बर्ष तक नप की अध्यक्ष रहेंगी, जबकि वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रशेखर अवस्थी (पिं्रस) की धर्मपत्नी वार्ड नंबर नौ से पार्षद तारा अवस्थी और वार्ड एक से नवनिर्वाचित पार्षद शालिनी शर्मा को अढ़ाई-अढ़ाई बर्ष के लिए उपाध्यक्ष बनाने पर सहमति बनाई है। फिलवक्त बहुमत का आंकड़ा जुटाने के बाद भाजपा के पांचों पार्षदों को शिमला में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है, यह सभी पार्षद 18 जनवरी को शिमला से नालागढ़ शपथ लेने लौटेंगे। बता दें कि नौ वार्ड पार्षदों वाली नगर परिषद नालागढ़ में एक आजाद के अलावा भाजपा सर्मथित पांच पार्षद चुनाव जीतकर आए थे, जबकि कांग्रेस सर्मथित तीन पार्षद जीते थे।

कांग्रेस ने अल्पमत में होने के बावजूद शहर की सरदारी पर काबिज होने के लिए बीते बुधवार को दांव चला और भाजपा के खाते से निर्वाचित पार्षद महेश गौतम और आजाद प्रत्याशी वंदना बंसल को अपने पाले में कर बहुमत का आंकडा छू लिया। फिर कांगे्रस नेता पांचों पार्षदों अलका वर्मा, महेश गौतम, अमरेंद्र भिंडर, रीना शर्मा और वंदना बसंल को पटियाला में महफूज जगह पर छोड़ कर आ गए थे, लेकिन पूर्व विधायक केएल ठाकुर ने दो दिन के भीतर ही कांग्रेस के हाथों से जश्न का मौका छीन लिया।

कड़ी सुरक्षा में पांचों पार्षद

भाजपा अपने पांचों पार्षदों को अध्यक्ष उपाध्यक्ष पद के चुनाव तक कोई ढील बरतने के मूड में नहीं है, सरकार और प्रशासन ने भी पार्षदों की सुरक्षा का पूरा  ख्याल रखा है, उन्हें सादी वर्दी में तैनात पुलिस कर्मिंयों के घेरे में रखा गया है। शुक्रवार रात जैसे ही पटियाला से कांग्रेस सर्मथित प्रत्याशी परवाणू पहुंची, तो उसके बाद उसे भाजपा सर्मथित चार अन्य पार्षदों संग पुलिस सुरक्षा के बीच पीटरहाफ पहुंचाया गया।

मुकेश कुमार—सोलन

हिमाचल प्रदेश निर्वाचन आयोग के पास पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव निपटाने के लिए अपनी मतदान पेटियां ही पूरी नहीं हैं। प्रदेश में पंचायतों की संख्या, तो बढ़ गई, किंतु निर्वाचन आयोग समय रहते हिमाचल के चुनाव के लिए इलेक्टोरल बॉक्स का इंतजाम नहीं कर पाया। लिहाजा ऐन वक्त पर मतदान पेटियों को दूसरे राज्यों से मंगवाया गया है, ताकि पंचायतों, जिला परिषदों, पंचायत समितियों व वार्ड सदस्यों के पदों के लिए चुनावी प्रक्रिया संपन्न करवाई जा सके। हिमाचल प्रदेश निर्वाचन आयोग के पास अपनी 26 हजार के लगभग मत पेटियां हैं। कुछ समय पूर्व प्रदेश में नई ग्राम पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी की गई। प्रदेश में पहले 3226 ग्राम पंचायतें थीं तथा नई पंचायतों के अस्तित्व में आने के बाद यह आंकड़ा कहीं ज्यादा हो गया है। इस तरह 357 ग्राम पंचायतें नई गठित हुई। इसी तर्ज पर सैकड़ों नए वार्ड भी बनाए गए। निर्वाचन आयोग के समक्ष यह दुविधा उत्पन्न हो गई कि यकायक मतपेटियों की संख्या कहां से पूरी की जाए।

 विभागीय दूरदर्शिता का आलम यह था कि समय रहते न तो स्टॉक में अतिरिक्त मतपेटियां थीं तथा न ही नई ग्राम पंचायतों के गठन की भनक पाकर कोई त्वरित कार्रवाई की गई। आनन-फानन में कुल 32000 मतपेटियों की डिमांड कैसे पूरी की जाए, यह मुद्दा निर्वाचन आयोग के गले की फांस बन गया। सूत्रों के अनुसार हिमाचल प्रदेश निर्वाचन आयोग ने कुल छह हजार अतिरिक्त मतपेटियों के यक्ष प्रश्न को सुलझाने के लिए हरियाणा, पंजाब सहित कई राज्यों में संपर्क किया, किंतु उन राज्यों ने इस मामले में सहायता देने के लिए हाथ खड़े कर दिए। कड़ी मशक्कत के उपरांत राजस्थान व उत्तराखंड के निर्वाचन आयोग ने सहमति देते हुए हिमाचल को यह मतपेटियां उपलब्ध करवाई हैं। जानकारी के अनुसार अलवर व गंगानगर से 4700 मतपेटियां व देहरादून से 1500 मतपेटियों की अतिरिक्त खेप हिमाचल निर्वाचन आयोग को अब पहुंच गई है। इस खेप के आने से निर्वाचन आयोग ने राहत की सांस ली है।