Friday, September 24, 2021 06:00 AM

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जासूसी मामला, पेगासस की खरीद पर रोक लगाने की अपील

एसआईटी जांच की मांग को लेकर याचिका दायर, पेगासस की खरीद पर रोक लगाने की अपील

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — नई दिल्ली

पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए कथित तौर पर भारत में विपक्षी नेताओं और पत्रकारों की जासूसी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। वरिष्ठ वकील मनोहर लाल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग की गई है। साथ ही भारत में पेगासस की खरीद पर रोक लगाने की अपील की गई है। वकील मनोहर लाल शर्मा ने शीर्ष अदालत में अर्जी दायर करके कहा है कि पेगासस जासूसी कांड ने भारतीय लोकतंत्र, न्यायपालिका और देश की सुरक्षा पर हमला किया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि स्पाइवेयर का उपयोग व्यापक तौर पर किया गया है। श्री शर्मा ने पूछा कि केंद्र सरकार ने अगर पेगासस स्पाइवेयर खरीदा है, तो क्या यह अनुच्छेद 266 (3), 267 (2) और 283 (2) का उल्लंघन नहीं है? क्या यह भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 408, 409 और 120बी का मामला नहीं बनता है?

याचिकाकर्ता ने कहा कि सर्विलांस तकनीक का इस्तेमाल व्यापक तरीके से हो रहा है और यह वैश्विक सुरक्षा और मानवाधिकार का मसला है। इसका दुनियाभर में असर हुआ है। पेगासस न सिर्फ सर्विलांस टूल है बल्कि यह एक साइबर हथियार है। अगर जासूसी कानूनी तौर पर सही भी है तो भी यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।जनहित याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत की निगरानी में एसआईटी का गठन करने का निर्देश जारी किया जाए

पेगासस मामले पर बेवजह फैलाई जा रही सनसनी नई दिल्ली। सरकार ने पेगासस जासूसी मामले को लेकर विपक्ष के हमलावर तेवरों के बीच गुरुवार को कहा कि इस मामले में जिस रिपोर्ट को लेकर हंगामा किया जा रहा है वह निराधार है और देश में टेलीफोन की जासूसी जैसे मामलों से सुरक्षा के लिए पुख्ता और जांचा-परखा नेटवर्क है। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को राज्यसभा में पेगासस मामले में सरकार का पक्ष रखने की कोशिश की। हालाकि कृषि कानूनों और पेगासस जासूसी मामले तथा अन्य मुद्दों पर सदन में शोर शराबा कर रहे विपक्षी सदस्यों ने उन्हें अपना वक्तव्य नहीं पढऩे दिया। विपक्ष के विरोध के चलते श्री वैष्णव ने अपना वक्तव्य सदन के पटल पर रख दिया। वक्तव्य में कहा गया है कि सरकार ने इस मामले में आयी सनसनीखेज मीडिया रिपोर्ट को देखा है, लेकिन सोचने की बात यह है कि इस रिपोर्ट का संसद का मानसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले आना मात्र संयोग नहीं है।