Tuesday, April 13, 2021 10:02 AM

कुल्लू घाटी में फागली की धूम

कुल्लू में जेबीटी-डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ ने कालेज से उपायुक्त कार्यालय तक निकाली रोष रैली

निजी संवाददाता-कुल्लू जेबीटी व डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ द्वारा बुधवार को कालेज गेट से उपायुक्त कार्यालय तक रैली का आयोजन किया गया। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 12 मई, 2019 को जेबीटी के 647 पर्दों को भरने के लिए लिखित परीक्षा गई थी। उम्मीदवारों की दावेदारी के चलते परिणाम नहीं निकल पाया था। नरेंद्र सिंह का कहना है कि जेबीटी व डीएलएड की मुख्य मांगे दो वर्षों से चली आ रही हैं। 20 से 25 हजार तक जेबीटी हैं। आने वाले जेबीटी में अधिक संख्या में हैं। वहीं, प्रदेश सरकार द्वारा जेबीटी व डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगारों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अब सरकार और शिक्षा विभाग की तरफ से स्पष्ट भी किया है कि जेबीटी अध्यापकों के लिए केवल जेबीटी व डीएलएड ही योग्य होंगे। साथ ही अब काफी समय बाद 4225 में से 758 पदों पर बैचवाइज भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, जिसमें अब दो बीएड डिग्री धारकों को भी भर्ती में शामिल होने के लिए कहा गया है, जो कि जेबीटी व डीएलएड उम्मीदवारों के साथ सरासर गलत है, जिस प्रकार से कई वर्षों से गलत हो रहा है। डोलमा का कहना है कि हम भी इसी प्रदेश के निवासी व छात्र हैं। माननीय मुख्यमंत्री से विनती है की जेबीटी लिखित परीक्षा का परिणाम अतिशीघ्र घोषित किया जाए और दो वर्षों से शोषित हो रहे जेबीटी बेरोजगारों को राहत दी जाए। जेबीटी व डीएलएड प्रशिक्षित बेरोजगार संघ की प्रदेश सरकार से मांग है कि जिस पोस्ट के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है, उसे वहीं लिया जाए, ताकि जेबीटी व डीएलएड प्रशिक्षित युवाओंं को राहत मिल सके। अन्यथा इन ट्रेनिंग करवाने का क्या फायदा। डोलमा ने कहा कि सरकार ऐसी पॉलिसी बनाए, जिससे कई बेरोजगार न रहे। इस दौरान सभी जेबीटी व डीएलएड प्रशिक्षित मौजूद रहे।

स्वर्ग प्रवास से लौटे देवताओं ने की भविष्यवाणी; 42 दिन बाद खुले मंदिर के कपाट, देव प्रतिबंध से मुक्त हुए ग्रामीण

निजी संवाददाता — कुल्लू कुल्लू घाटी के जर्रे-जर्रे में देव आस्था का चमत्कारी प्रभाव अन्य राज्य के लोगों के लिए किसी अचंभे से कम नहीं है, लेकिन सदियों से चली आ रही देव अनुकंपा से ही कुल्लू घाटी के समस्त गांव की सत्ता चलती है। देव अनुकंपा का साक्षात उदाहरण बुधवार को मनाली के एतिहासिक गांव गोशाल में देखने को मिला। 42 दिनों के बाद स्वर्ग प्रवास से लौटे कुल्लू घाटी के आराध्य देवों ने बुधवार को भविष्यवाणी की। देवता के स्वर्ग प्रवास से आते ही देवालय में बंधी घंटियां खोल दी गईं। बंद पड़े रेडियो व टीवी भी ऑन हो गए। देवताओं ने गूर के माध्यम से मानव जगत के लिए वर्ष 2021 मिला जुला बताया।

स्वर्ग प्रवास से लौटे महार्षि गौतम महार्षि व्यास व कंचन नाग द्वारा बुधवार को कुल्लू घाटी के सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में दुनिया भर में होने वाले घटनाक्रम से अवगत करवाया गया। सुबह ही ऐतिहासिक गांव देव वाद्ययंत्रों से गूंज उठा। अपने आराध्य देवों के स्वर्ग प्रवास से लौटने को लेकर उत्सुक ग्रामीणों व देवता के कारकूनों ने देव विधिपूर्वक देवताओं का स्वागत किया। दोपहर बाद देवता के कारकूनों ने देव वाद्ययंत्रों के बीच देव विधि से कार्रवाई शुरू की। घाटी के लोगों ने गोशाल गांव में दस्तक देकर अपनी उत्सुकता प्रकट की। सभी कारकूनों व देवलुओं के देवालय में पहुंचते ही गोशाल गांव का माहौल भक्तिमय हो उठा। कारकूनों व पुजारियों द्वारा पूजा-अर्चना के बाद विधिपूर्वक मृदा लेप को हटाया गया। देवता के गूर व कारकूनों ने देवविधि को पूरा किया। मृदा लेप से कुमकुम, फूल, अनाज का छिलका, सेब के पत्ते निकलने से ग्रामीण खुश हुए। काले बाल व कोयला भी हल्की मात्रा में निकला है। देवता ने वर्ष 2021 दुनिया के लिए कुछ अच्छा तो कुछ बुरा बताया है। उन्होंने गुर के माध्यम से घाटी में सेब की फसल अच्छी होने से साथ-साथ शुभ कार्य अधिक रहने की बात कही। देवता के कारदार हरि सिंह ने बताया कि कुल मिलाकर यह वर्ष सभी के लिए सुखद रहेगा।

निजी संवाददाता — मनाली देवभूमि कुल्लू में इन दिनों फागली उत्सव की धूम मची हुई है। हर रोज घाटी के किसी न किसी गांव में यह उत्सव बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है की आदिकाल में कुल्लू घाटी में राक्षसों का आतंक था वे इनके आतंक से बचने के लिए देवताओ ने फैसला लिया की राक्षसों का इन दिनों मान-सम्मान किया जाएगा, ताकि इनके आतंक से बचा जाए।

इसी परंपरा को नसोगी फागली में भी निभाया जाता है व शाम के समय टुंडिया राक्षस को यहां से शलीन गांव को भेजा जाता है, जहां पर नसोगी के बाद फागली उत्सव मनाया जाता है। शंख नारायण के कारदार तारा चंद ठाकुर व पुजारी मोहन लाल ने बताया की नसोगी गांव में फागली उत्सव बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है व ओल्ड मनाली से हडिंबा माता व सियाल गांव से सियाली महादेव भी इस उत्सव मे हिस्सा लेने के लिए आए हुए हैं। गौरतलब है की इस साल नसोगी गांव के देवता शंक नारायण का नया गूर होने से लोगों में इस उत्सव के प्रति ज्यादा दिलचस्पी देखने को मिल रही है।