Monday, October 18, 2021 04:39 PM

गैस का घड़ा भर रहा

इनसान का घड़े से कितना गहरा रिश्ता रहा है कि हम इसे देख कर ही पाप तक का अंदाजा लगा लेते थे। घड़ा बता देता था कि अमुक व्यक्ति कितना पाक दामन है। वक्त बदल गया, अब फ्रिज यह तो बता देता है कि मालिक का रुतबा क्या है, लेकिन पाप नहीं बता पाता। फिर भी घड़ा बेकार नहीं हुआ, आजकल गैस से भर जाता है। हर व्यक्ति के अस्तित्व के साथ गैस जुड़ गई है, बल्कि हर किसी की हैसियत का पता अब गैस से ही चलता है। जब से उज्ज्वला योजना आई है, रसोई गैस ने गांव और शहर की दूरी घटा दी है। अमीर-गरीब के बीच इज्जत बराबर कर दी है, क्योंकि सिलंेडर तो भरता नहीं, गैस का घड़ा भर जाता है। नेता जी कहते हैं कि उन्होंने गरीब गृहिणियों को इससे जोड़ दिया, जबकि हकीकत में खाली सिलेंडर भरवाने का सोच-सोच कर ही पेट में गैस हो जाती है। गांव के सरकारी डाक्टर के पास जाते हैं तो पता चलता है कि साहब गैस की वजह से छुट्टी पर हैं। हमने पूछा क्या डाक्टर साहब को हुई है, तो जवाब मिला बेगम साहब के पेट में गैस रही होगी जो आदर्श पति बनने के लिए वह घर में सेवा कर रहे हैं। हमने हिम्मत करके डिस्पेंसर के उपस्थित न होने का पूछा तो पता चला कि उसकी रसोई के लिए गैस नहीं थी, तो बिन खाए कैसे आते। वैसे खुशामद भी एक तरह की गैस ही है। यह खेल बड़े कमाल का है और फुटबाल की तरह हवा भरने जैसा है। कोई नेता जितने प्रशंसक अपने साथ लेकर चलता है, उससे उसके भीतर पहुंच रही हवा मालूम हो जाती है। हवा से याद आया कि माहौल तो घर से ही बिगड़ रहा है। घर-घर को चलाने के लिए हवा चाहिए और जिसका अंदाजा स्थानीय निकाय, विधानसभा से संसदीय चुनावों तक होता है।

 देश की हवा पहचान कर वोट देंगे, तो घर में किसी तरह की गैस कम नहीं होगी। लोग सोचते हैं कि देश में कांग्रेस अपनी नीतियों और पुरानी गलतियों की वजह से हार रही है, यह सही नहीं। दरअसल कांग्रेस के भीतर गैस खत्म हो गई है। पार्टी को बिना गैस के चलाएंगे, तो उड़ना मुश्किल होगा। भाजपा न केवल हर घर में गैस पैदा कर रही है, बल्कि नेताओं को भी इसी के दम पर उड़ा रही है। अभी गुजरात का मामला इस मसले को और स्पष्ट कर देता है। मुख्यमंत्री रूपाणी को उड़ाने के लिए वहां से निकल रही गैस जितनी जिम्मेदार है, उतनी ही भूपंेद्र पटेल के पतंग को उड़ाने में सक्षम हुई है। समुद्र किनारे स्थित राज्यों में प्राकृतिक गैस का प्रकोप है, इसलिए रूपाणी को जाना पड़ा, लेकिन बाकी राज्यों में नेताओं की प्रवृत्ति में गैस का घड़ा भर रहा है। अब पंजाब को ही देखें तो पुराने फौजी कैप्टन अमरेंद्र सिंह की फिटनैस के आगे नवजोत सिंह सिद्धू की प्रवृत्ति की गैस निकल रही है। आश्चर्य यह कि कांग्रेस की नाक इस काबिल भी नहीं रही कि सत्ता में बैठी भाजपा की गैस सूंघ पाए या पंजाब जैसे राज्य को सिद्धू की बदबूदार गैस से दूर किया जाए। वैसे जबसे बाबा रामदेव ने आम आदमी को अनुलोम-विलोम या प्राणायाम करवाना शुरू कर दिया है, सभी जन घड़े में गैस छोड़ रहे हैं। गैस छोड़ना अब बाबा रामदेव की सारी बातों को याद करना है, इसलिए ब्लैक मनी अब केवल बाबा के घड़े की गैस है। देश को खुशहाल देखना है, तो हर घोषणा, योजना या वादे की गैस को पहचान कर इसे घड़े में छोड़ दो, वरना देश प्रदूषित नजर आएगा।

निर्मल असो

स्वतंत्र लेखक