Sunday, November 28, 2021 05:04 PM

पंप ऑपरेटर्ज पर वित्त विभाग लेगा फैसला, अढ़ाई साल पहले नियुक्त कर्मियों को जलशक्ति विभाग ने किया था बर्खास्त

अढ़ाई साल पहले नियुक्त कर्मियों को जलशक्ति विभाग ने किया था बर्खास्त

स्टाफ रिपोर्टर— शिमला

जलशक्ति विभाग से बर्खास्त किए गए 35 ऑपरेटरों की नौकरी पर अब वित्त विभाग फैसला लेगा। अगर वित्त विभाग से अतिरिक्त 35 पद जलशक्ति विभाग को मिलते हैं, तो फिर बर्खास्त किए 35 पंप ऑपरेटरों को दोबारा नियुक्त मिल सकती है। हाई कोर्ट ने 35 पंप ऑपरेटरों के बर्खास्त करने के आदेशों पर स्टे लगा दिया था और सरकार को मामला दोबारा रिव्यू करने को कहा था। जलशक्ति विभाग के सचिव विकास लाबरू ने बताया कि विभाग ने मामला रिव्यू करने के बाद वित्त विभाग को भेज दिया है। अब वित्त विभाग द्वारा पंप ऑपरेटरों 35 अतिरिक्त पदों पर निर्णय लिया जाना है। गौरतलब है कि जलशक्ति विभाग ने करीब अढ़ाई साल पहले नियुक्त 35 पंप ऑपरेटरों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। विभाग ने यह कार्रवाई प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग की संशोधित मेरिट लिस्ट और प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के बाद की थी। विभाग ने इन सभी पंप ऑपरेटरों को नौकरी से निकालने से पूर्व 15 दिन का नोटिस देने भी दिया था।

पंप ऑपरेटर प्रदेश सरकार की तीन साल के सेवाकाल के बाद नियमितीकरण की शर्त को पूरा करने जा रहे थे, लेकिन इससे पूर्व विभाग ने इन्हें जोर का झटका दे दिया। प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग ने अक्तूबर, 2016 में जलशक्ति विभाग में जूनियर टेक्नीशियन और पंप ऑपरेटर के 250 पदों को भरने के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। आवेदन आने के बाद आयोग ने नौ जून, 2017 को प्रदेशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर लिखित परीक्षा का आयोजन किया। लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों के लिए आयोग ने 15 अंकों की मूल्यांकन परीक्षा ली और जुलाई, 2018 में चयनित 187 अभ्यर्थियों की सूची सहित परीक्षा परिणाम घोषित किया। वहीं, कोर्ट केस के चलते 62 पद खाली रखे और दो पदों के लिए कोई भी योग्य अभ्यर्थी नहीं मिला।

इन चयनित 187 अभ्यर्थियों को जलशक्ति विभाग ने प्रदेशभर के विभिन्न अधीक्षण अभियंता सर्कल के तहत नियुक्तियां प्रदान कर दी थीं, जिन्हें नौकरी करते हुए करीब अढ़ाई वर्ष हो रहे हैं। पर इसी साल प्रदेश उच्च न्यायालय से याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय आया। इस फैसले के बाद चयन आयोग ने 22 जुलाई, 2021 को दोबारा से परीक्षा परिणाम संशोधित किया और 248 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया। इसमें 152 अभ्यर्थी पुराने चयनित हुए, जबकि पूर्व में चयनित 35 अभ्यर्थी मेरिट सूची से बाहर हो गए। अब संशोधित मेरिट सूची विभाग के पास पहुंचने और सरकार से परामर्श के बाद जलशक्ति विभाग ने उन्हें बर्खास्त करते हुए उनकी सेवाओं को समाप्त कर दिया गया है। इसके बाद इन 35 ऑपरेटरों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने सरकार के आदेशों पर स्टे लगाते हुए मामले को दोबारा रिव्यू करने के आदेश दिए थे।

पीडब्ल्यूडी में भी 56 जेई किए हैं बर्खास्त

जलशक्ति विभाग की तरह ही पीडब्ल्यूडी में भी 56 जेई को बर्खास्त किया है। यह जेई सिविल भी रिवाज्ड मेरिट लिस्ट में बाहर हो गए थे। ऐसे में विभाग ने इन जेई को टर्मिनेट करने का आदेश जारी किए थे। विभाग के आदेशों के बाद पीडब्ल्यूडी विभाग के 56 जेई ने भी कोर्ट गए हैं। ऐसे में अगर कोर्ट से उनके पक्ष में फैसला आता है, तो फिर दोबारा से पीडब्ल्यूडी विभाग को भी मामला रिव्यू पड़ेगा।