Tuesday, January 26, 2021 03:05 PM

डेनमार्क की टेक्नीक से तैयार होगी मछली

पतलीकूहल में लगेगा ‘रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम इन ट्राउट’ यूनिट; विभाग को सरकार से भी मिली मंजूरी, बाहर के एक्सपर्ट करेंगे मदद, कम पानी में होगी ज्यादा पैदावार

बिलासपुर –हिमाचल में ट्राउट प्रोडक्शन बढ़ाने को लेकर अब मत्स्य विभाग नई तकनीक पर आधारित प्रोजेक्ट स्थापित करने की तैयारी में है। रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) इन ट्राउट नामक पहला यूनिट कुल्लू के पतलीकूहल में स्थापित किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए डेनमार्क से नई तकनीक आयात की जाएगी, जिसे बाहर के एक्सपर्ट की मदद से शुरू करवाया जाएगा। इसके लिए मत्स्य विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। यूनिट की खासियत यह है कि रेसवेज में कम पानी में भी ट्राउट की ज्यादा प्रोडक्शन की जा सकेगी।

यह यूनिट देश में अपनी तरह का ऐसा पहला ही होगा। मत्स्य विभाग के निदेशक सतपाल मेहता ने बताया कि यह एक डेमो यूनिट होगा, जिसके लिए नई टेक्नोलॉजी डेनमार्क से ली जाएगी और पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर ट्राउट उत्पादन का कार्य शुरू किया जाएगा। यदि यह योजना सफल रहती है, तो प्रदेश को एक बड़ा एडवांटेज होगा और बाद में अन्य जगह भी इस योजना का क्रियान्वयन किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि देश में कोल्ड वाटर ज़ोन में आधा दर्जन के करीब राज्य आते हैं, जिनमें से किसी एक राज्य के लिए यह प्रोजेक्ट मिलना था। अन्य राज्य भी प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे थे, लेकिन सौभाग्यवश यह प्रोजेक्ट हिमाचल के हिस्से आया है और अब इसे पतलीकूहल में स्थापित करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने बताया कि लगभग 80 लाख रुपए से यह प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा, जिसके तहत रेसवेज का निर्माण होगा, जहां रेनबो ट्राउट प्रजाति का बीज डाला जाएगा। नई तकनीक आधारित इस यूनिट में टेम्प्रेचर कंट्रोल करने की पूरी व्यवस्था होगी। यूनिट में कम पानी में भी मछली की ज्यादा ग्रोथ होगी और मछली की ग्रोथ के लिए वहां टेम्प्रेचर मेंटेन होगा। अहम यह है कि बाहर से एक्सपर्ट बुलाकर इस डेमो यूनिट को स्थापित किया जाएगा। मत्स्य पालन करने के इच्छुक लोगों को सरकार की तरफ से बाकायदा सबसिडी भी दी जाएगी, जिसके तहत सामान्य वर्ग के लिए 40 और एससी-एसटी वर्ग के लिए 60 फीसदी सबसिडी का प्रावधान है।

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