Monday, October 26, 2020 07:06 PM

लॉकडाउन में विद्यार्थियों की फिटनेस: भूपिंद्र सिंह, राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

पिछले कुछ दशकों से हिमाचल प्रदेश के नागरिकों की फिटनेस में बहुत कमी आई है। इसका प्रमुख कारण है विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों के लिए किसी भी प्रकार के फिटनेस कार्यक्रम का न होना। रट्टे वाली पढ़ाई की होड़ में हम विद्यार्थियों की फिटनेस को ही भूल गए हैं। हिमाचल प्रदेश की अधिकांश आबादी गांव में रहती थी। वहां पर सवेरे-शाम  वर्षों पहले विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ कृषि व अन्य घरेलू कार्यों में सहायता करता था। विद्यालय आने-जाने के लिए कई किलोमीटर दिन में पैदल चलता था। इसलिए उस समय के विद्यार्थी को किसी भी प्रकार के फिटनेस कार्यक्रम की कोई जरूरत नहीं थी। आज का विद्यार्थी घर के आंगन में बस पर सवार होकर विद्यालय के प्रांगण में उतरता है। पढ़ाई के नाम पर ज्यादा समय खर्च करने के कारण फिटनेस के लिए कोई समय नहीं बचता है…

मार्च के आखिरी सप्ताह से लगातार बंद शिक्षा संस्थानों के कारण उनमें पढ़ रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई तो आधी-अधूरी ऑनलाइन चल रही है, मगर उनकी शारीरिक फिटनेस के लिए न तो संस्थान कोई कार्यक्रम सुझा पाया है और न  ही आज अभिभावकों के पास कोई ऐसा माध्यम है जिससे वे अपने विद्यार्थी बच्चों की फिटनेस में किसी तरह की कोई सहायता कर सकें। इस अवधि में अधिकांश विद्यार्थी मोटापे व डिप्रेशन के कारण नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं। किसी भी सभ्यता या देश को इतनी क्षति युद्ध या महामारी से नहीं होती है, जितनी तबाही नशे के कारण हो सकती है। आज जब देश के अन्य राज्यों सहित हिमाचल प्रदेश में भी नशा युवा वर्ग पर ही नहीं, किशोरों तक चरस, अफीम, स्मैक, नशीली दवाओं तथा दूरसंचार के माध्यमों के दुरुपयोग से शिकंजा कस रहा है। इसलिए सरकार, स्कूलों व अभिभावकों को इस विषय पर सचेत हो जाना चाहिए क्योंकि लॉकडाउन से यह स्थिति और भी भयवाह हो रही है।

यदि विद्यार्थी  किशोरावस्था में नशे से बच जाता है तो वह फिर युवावस्था आते-आते समझदार हो गया होता है। इसलिए विद्यालय स्तर पर माध्यमिक से वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों को विभिन्न विधाओं में व्यस्त रखने के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस  की तरफ  मोड़ना बेहद जरूरी हो जाता है। मानव का सर्वांगीण विकास शिक्षा के बिना अधूरा है। शिक्षा की परिभाषा में साफ-साफ लिखा है कि यहां शारीरिक व मानसिक दोनों तरह से बराबर विद्यार्थियों का विकास करना है जिससे वे आगे चलकर जीवन को सफलतापूर्वक खुशहाल जी सकें। शारीरिक विकास के लिए खेलों के माध्यम से फिटनेस कार्यक्रम बहुत जरूरी हो जाता है। खेल ही वह माध्यम है जिसके द्वारा विद्यार्थी को नशे से दूर रखा जा सकता है। खेलों में उत्कृष्टता उस प्रदेश की तरक्की व खुशहाली का भी पैमाना होती है। पंजाब में हजारों प्रशिक्षक विभिन्न खेलों में खेल प्रशिक्षण के लिए नियुक्त होने के साथ-साथ खेल प्रशिक्षण के लिए आधारभूत ढांचा होना वहां के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का प्रमुख कारण रहा था। उस समय पंजाब हर क्षेत्र में अगुवा था।

पंजाब का इतिहास गवाह है कि पंजाब जब धीरे-धीरे खेलों से दूर हुआ तो पहले वहां आतंकवाद और फिर आजकल पंजाब नशे का अड्डा बना हुआ है। यही कारण है कि हर क्षेत्र में आज हरियाणा पंजाब से काफी आगे निकल गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एशियाई, राष्ट्रमंडल व ओलंपिक खेलों में पदक विजेता होने पर खिलाडि़यों को करोड़ों रुपए के नगद ईनाम व सम्मानजनक नौकरी देकर हरियाणा में खेलों के लिए बहुत ही उपयुक्त बातावरण तैयार किया है। उसी का नतीजा है कि आज हरियाणा का हर किशोर व युवा किसी न किसी खेल के मैदान में नजर आता है। हिमाचल प्रदेश इस समय शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। पिछले कुछ दशकों से हिमाचल प्रदेश के नागरिकों की फिटनेस में बहुत कमी आई है। इसका प्रमुख कारण है विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों के लिए किसी भी प्रकार के फिटनेस कार्यक्रम का न होना। रट्टे वाली पढ़ाई की होड़ में हम विद्यार्थियों की फिटनेस को ही भूल गए हैं। हिमाचल प्रदेश की अधिकांश आबादी गांव में रहती थी।

वहां पर सवेरे-शाम  वर्षों पहले विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ कृषि व अन्य घरेलू कार्यों में सहायता करता था। विद्यालय आने-जाने के लिए कई किलोमीटर दिन में पैदल चलता था। इसलिए उस समय के विद्यार्थी को किसी भी प्रकार के फिटनेस कार्यक्रम की कोई जरूरत नहीं थी। आज का विद्यार्थी घर के आंगन में बस पर सवार होकर विद्यालय के प्रांगण में उतरता है। पढ़ाई के नाम पर ज्यादा समय खर्च करने के कारण फिटनेस के लिए कोई समय नहीं बचता है। अब तो लॉकडाउन के कारण विद्यार्थी पिछले छह माह से अपने-अपने घरों में बंद हैं। अधिकांश स्कूलों के पास फिटनेस के लिए न तो आधारभूत ढांचा है और न ही कोई कार्यक्रम है, मगर फिर भी शिक्षा संस्थान में घूम-फिर कर ही सही कुछ न कुछ तो हो ही रहा था। आज लॉकडाउन के कारण विद्यार्थी फिटनेस व मनोरंजन के नाम पर दूरसंचार माध्यमों का कमरे में बैठ कर खूब दुरुपयोग कर रहा है।

ऐसे में विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास का क्या होगा। आज  विद्यार्थी के लिए  घर पर आधे घंटे के फिटनेस कार्यक्रम की सख्त जरूरत है। इसमें  15 से 20 मिनट धीरे-धीरे दौड़ना तथा विभिन्न कोणों पर शरीर के जोड़ों की विभिन्न क्रियाओं को पूरा करने के बाद शरीर को कूलडाउन करना होगा। कई मिनटों तक शारीरिक क्रियाओं के करने से रक्त वाहिकाओं में रक्त संचार तेज हो जाता है। उस हर मसल व अंग को उपयुक्त मात्रा में प्राणवायु मिलने से उसका समुचित विकास होता है। आज के विद्यार्थी को अगर कल का अच्छा नागरिक बनाना है तो लॉकडाउन तक घर पर उसके लिए सही फिटनेस कार्यक्रम देना होगा। तभी हम सही अर्थों में अपने बच्चों का भला कर सकेंगे। छात्र स्वयं घरों में रहकर अपने लिए फिटनेस कार्यक्रम बना सकते हैं। उन्हें सुबह और शाम के समय थोड़ी-थोड़ी देर के लिए शारीरिक फिटनेस के कार्यों में भाग लेना चाहिए। इससे वे नशों आदि असामाजिक कार्यों से भी दूर रहेंगे, साथ ही कोरोना काल के कठिन समय का सामना भी कर पाएंगे।

ईमेलः bhupindersinghhmr@gmail.com

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