Tuesday, April 13, 2021 09:57 AM

पहली बार किसानों-बागबानों के बीच प्लानिंग बनाने पहुंचा कृषि विज्ञान केंद्र

टीम मंडी-कुल्लू

भर्ती निदेशक एम राजाराजन ने कहा कि वर्ष 2020-21 के लिए सेना की खुली भर्ती का आयोजन पहली मार्च से 12 मार्च 2021 तक सीएच सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर मैदान में किया जाएगा। यह भर्ती जिला मंडी, कुल्लू और लाहुल-स्पीति जिलों के नवयुवकों के लिए सैनिक सामान्य ड्यूटी जीडी सैनिक लिपिक/ स्टोर कीपर तकनीकी और हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों के नवयुवकों के लिए सैनिक तकनीकी, सैनिक तकनीकी एविएशन, सैनिक तकनीकी गोला बारूद परीक्षक और सैनिक तकनीकी नर्सिंग सहयोग पदों के लिए की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने 20 सितंबर 2020 तक अपना पंजीकरण किया था, केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को भर्ती में भाग लेने का मौका दिया जाएगा। उन्होंने भर्ती में भाग लेने वाले सभी उम्मीदवारों को सुचित किया है कि वे अपना एडमिट कार्ड अपनी आईडी से डाउनलोड करें। उम्मीदवारों को जिला एवं तहसील वाइज पहली मार्च से 12 मार्च 2021 के बीच आमंत्रित किया जाएगा। एडमिट कार्ड में दी गई भर्ती की तिथि एवं समय के अनुसार उम्मीदवारों को भर्ती के लिए पहुंचना होगा। भर्ती निदेशक ने कहा कि भर्ती स्थल में प्रवेश के दौरान दस्तावेज साथ लाना अनिवार्य है। इनमें एडमिट कार्ड, डोमिसाइल प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, 10वीं,12वीं की मार्क्स शीट, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र जो ओपन स्कूल, एनआईओएस उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य है। यह प्रमाण पत्र प्रधानाचार्य से हस्ताक्षरित होना चाहिए।  इसके अलावा आधार कार्ड, एफेडेविट जिसका फार्मेट जेआई, अधिसूचना के एपेन्डिक्स बी में दिया गया है। इंडेमनिटि बांड जिसका फार्मेट 29 जनवरी 2021 की अधिसूचना के एपेन्डिक्स डी में दिया गया है। नो रिस्क प्रमाण पत्र जिसका फार्मेट एपेन्डिक्स एफ  में दिया गया है,  साथ लाने होंगे।

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — कुल्लू जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी एसके पराशर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में जल शक्ति विभाग के अधिशाषी अभियंता एवं सदस्य सचिव अरुण कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि कुल्लू जिला में कुल एक लाख 19 हजार 131 घरों में नल से जल योजना को पहुंचाने का कार्य जोरों पर है। अभी तक कुल 69423 घरों को नल से जल की सुविधा प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सभी ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में वर्ष 2024 तक नल से जल प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हिमाचल सरकार ने इस लक्ष्य को जुलाई, 2022 तक हासिल करने की कार्यनीति तैयार की है।

सदस्य सचिव अरुण शर्मा ने बैठक में 13 विभिन्न योजनाओं को पारित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इन योजनाओं से 8550 घरों को नल से जल प्रदान करने का प्रावधान है। जिला जल एवं स्वच्छता समिति ने इन योजनाओं के निर्माण के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की। बैठक में सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए तथा विभाग द्वारा प्रस्तुत वार्षिक प्रगति रिपोर्ट पर भी चर्चा की गई जिस पर अध्यक्ष ने संतोष जाहिर किया। बैठक में जल शक्ति मंडल-दो के अधिशाषी अभियंता रविंद्र शर्मा, उपनिदेशक शिक्षा सीता राम बंसल, मंजवीर सिंह उपनिदेशक कृषि, वन विभाग से वंदना ठाकुर, चिकित्सा अधिकारी नरेश व खनन अधिकारी सुरेश कुमार सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

कार्यालय संवाददाता — कुल्लू भारत संचार निगम लिमिटेड कुल्लू में आधुनिक ब्राड बैंड ओवर वाई फाई नई सेवा शुरू की गई है। यह जानकारी उपमहाप्रबंधक कुल्लू सुदर्शन कुमार तथा मंडल अभियंता अनिल महंत ने दी है। इस सेवा से जिला मुख्यालय कुल्लू के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्र जिसमें गांव पूइद, पीज, भेखली, बदाह, मौहल, बबेली, सेऊबाग आदि तथा भुंतर क्षेत्र के अंतर्गत भुंतर, शमशी, तेगुबेहड़, हाट, हाथीथान, जिया, शाढ़ाबाई, छोयल, सेरीबेहड़, पिरड़ी, गदौरी, कलैहली, भाटग्रां, पिपलागे, जरड़, हुरला, कहुधार आदि क्षेत्रों के निवासी भी लाभान्वित होंगे।

बीएसएनएल की यह आधुनिक सेवा पूर्णतय: तार रहित है, जिसे घर या कार्य स्थल पर एक एंटीना की सहायता से स्थापित किया जाता है, जिसमें इंटरनेट की उच्च गति की 30 एमबीपीएस तक की स्पीड मिलती है। बीएसएनएल की एफटीटीएच सेवा की भांति ही ब्राड बैंड ओवर वाई फाई (एयर फाइबर) सेवा भी अत्याधिक लोकप्रिय हो रही है, जिसका न्यूनतम मासिक प्लान 500 रुपए से शुरू होता है।

तीन जिलों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा करने वाला क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू खुद बीमार, लोग परेशान

दिव्य हिमाचल ब्यूरो-कुल्लू

तीन जिलों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का दावा करने वाले क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की हालत इन दिनों स्वयं बीमार हो चुकी है। अस्पताल में खाली चल रहे डाक्टरों के पद के चलते जनता को भारी परेशानी से गुजरना पड़ा रहा है। अस्पताल में जहां पहले तीन शिशु विशेषज्ञ डाक्टर थे। वहां पर अब एक भी नहीं है। हालांकि कुछ दिनों पहले एक शिशु विशेषज्ञ डाक्टर का तबादला अन्य अस्पताल से कुल्लू के लिए हुआ है। लेकिन अभी तक डाक्टर ने कुल्लू अस्पताल में ज्वाइनिंग नहीं दी है। वहीं, एक एनेस्थिया का भी पद खाली चल रहा है। उसके लिए भी ऑर्डर हो चुके है। उन्होेंने भी ज्वाइनिंग नहीं दी है। वहीं, स्त्री रोग विशेषज्ञ डाक्टर का पद भी खाली चल रहा था। जहां पर केवल डाक्टर अनु शर्मा ने ही अभी तक ज्वाइनिंग दी है। यानि कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल के लिए तीन डाक्टरों को भेजा गया था। जिसमें अभी तक एक ही डाक्टर ने ज्वाइनिंग दी है। बाकी दो डाक्टर कब तक ज्वाइनिंग देंगे यह कोई नहीं जानता। वहीं, अस्पताल में सर्जन का एक भी डाक्टर न होने के चलते सभी ऑपरेशन बंद पड़े हैं, जिस कारण से मरीजों को भारी परेशानी से गुजरना पड़ रहा है। सही कारण है कि जिस अस्पताल में कुछ समय पहले बेहतर डाक्टर होने के चलचे लोगोें ने निजी अस्पताल का रुख करना कम कर दिया था। वहीं, अब एक बार फिर लोगों को भारी भरकम धन खर्च कर अपना ईलाज निजी अस्पताल में करवाना पड़ रहा है।

निजी अस्पतालों की भी हालत यह है कि जहां पर पहले सौ रुपए की पर्ची बना करती थी। वहीं, अब उस पर्ची के दाम भी बढ़ गए हैं। अस्पताल में चल रही डाक्टरों की कमी के चलते उपचार के लिए आने वाले मरीज व उनके तीमारदार भी सरकार को कौसते नजर  आते है। हालांकि कुछ दिनों पहले कुल्लू सदर के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने भी अस्पताल में चल रही डाक्टरों की कमी को लेकर प्रदेश सरकार के समक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से रखा था कि किस तरह से डाक्टरों के न होने के चलते कुल्लू की जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि पिछले सप्ताह प्रदेश सरकार ने तीन डाक्टरों के तबादले कुल्लू अस्पताल के लिए किए। लेकिन अभी तक महज एक ही डाक्टर ने ज्वाइनिंग दी है। शिशु विशेषज्ञ अस्पताल में एक भी डाक्टर न होने के चलते अभिभावकों को भी नन्हें बच्चों का उपचार करवाने के लिए निजी अस्पताल की शरण में ही जाना पड़ रहा है। जहां पर पहले अस्पताल में सबसे बेहतर शिशु विशेषज्ञ डाक्टर तैनात किए गए थे। लोगों ने निजी अस्पताल भी जाना कहीं न कहीं छोड़ दिया था। लेकिन एक बार फिर अस्पताल में चल रही डाक्टरों की कमी के चलते एक बार फिर कुल्लू की जनता सहित साथ लगते जिलों के लोगों को भी डाक्टरों के न मिलने पर काफी अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।  इस बारे में जानकारी देते हुए चिकित्सा अधीक्षक डा. नीना लाल ने कहा कि तीन डाक्टरों में अभी तक एक ही डाक्टर स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. अनु शर्मा ने ही ज्वाइनिंग दी है।

कुल्लू में विकलांग कल्याण संघ के प्रदेशाध्यक्ष ने की सरकार से मांग; बोले, जल्द दें राहत

कार्यालय संवाददाता-कुल्लू दिव्यांगों की लंबित मांगें आश्वासनों तक ही समिति रह रही हंै। लगातार आश्वासन मिलने से प्रदेश के दिव्यांगों ने सरकार से नाराजगी जाहिर की। एक वर्ष पहले भूख हड़ताल भी दिव्यांगों ने अपनी जायज मांगों को लेकर की, लेकिन सरकार ने आश्वासन ही दिए, लेकिन अभी तक दिव्यांगों की समस्याओं और मांगों का समाधान नहीं हो रहा है। अब इस बार फिर अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर प्रदेश के जिला कुल्लू में विकलांग कल्याण संघ हिमाचल प्रदेश ने बैठक की।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि यदि जल्द से जल्द सरकार ने मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो, विकलांग कल्याण संघ अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेगा। जिला मुख्यालय कुल्लू स्थित देवभूमि विकलांग संघ भवन में विकलांग कल्याण संघ की राज्य स्तरीय बैठक कुल्लू में हुई। बैठक की अध्यक्षता विकलांग कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष तकदीर सिंह ने की। बैठक में दिव्यांगों की कई समस्याओं पर चर्चा गई गई। विकलांग कल्याण संघ के राज्य अध्यक्ष तकदीर सिंह ने सरकार से आग्रह किया है कि दिव्यांगों की पेंशन इस महंगाई और बेरोजगारी के दौर में सम्मानजन पांच हजार होनी चाहिए। दिव्यांगों का बैकलाग जल्द भरा जाना चाहिए। दिव्यांगों का कोटा जो कि सरकारी क्षेत्र में चार प्रतिशत और निजी क्षेत्र में पांच प्रतिशत है, उसे प्रेक्टीकल रूप में लाया जाए। बैठक में प्रदेशाध्यक्ष तकदीर सिंह के साथ-साथ राजेश कुमार, मूर्त राम, चुनी देवी, अमर चंद, खेम चंद, शुक्रू राम, कर्मचंद, फागणू राम व हीरा लाल आदि मौजूद रहे।

झीलों से पैदा होने वाले खतरों की तैयारियों पर बैठक के दौरान बोले अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी

दिव्य हिमाचल ब्यूरो-कुल्लू जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कुल्लू द्वारा जिला परिषद सभागार में हिमालयन रेंज में विद्यमान ग्लेशियल झीलों के फटने से उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए तैयारियों पर समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी एसके पराशर ने बैठक की अध्यक्षता की। विभिन्न विभागाध्यक्षों के अलावा जिला में आपदा प्रबंधन से जुड़ी गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। एसके पराशर ने कहा कि हर वो घटना आपदा है, जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है। उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र विशेष में आपदा घटित होने पर तुरंत कम्युनिकेशन तथा रिस्पांस नितांत आवश्यक है। इसमें स्थानीय लोग प्रथम प्रतिक्रिया के तौर पर अपनी भूमिका निभाकर नुकसान को कम करने में मददगार होते हैं। इसलिए जरूरी है कि स्थानीय तौर पर युवाओं को आपदाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि जिला में ग्रामीण स्तर पर आपदा प्रबंधन समितियों का गठन किया गया है और समय-समय पर प्राधिकरण की ओर से इन्हें प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

उन्होंने कहा कि अनेक स्वयंसेवी संस्थाएं आपदा प्रबंधन से जुड़ी हैं और समय-समय पर इन्होंने अपना योगदान करके बहुमूल्य जिंदगियां बचाई हैं और आपदाओं के दौरान नुकसान को कम करने में मदद की है। उन्होंने कहा कि कोई न कोई आपदा घटित होना स्वाभाविक है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन सभी स्तरों पर हर समय तत्पर रहना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि आपदा आए या न आए, लेकिन तैयारियां पूरी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले की गई तैयारी ही बचाव करेगी।

गोताखोरों की उपलब्धता जरूरी लिटल रिबेल सर्च एंड रेस्क्यू पार्वती घाटी के अध्यक्ष शिव राम ने कहा मणिकर्ण घाटी की पार्वती नदी मानव हादसों की दृष्टि से काफी संवेदनशील है और आए दिन यहां कोई न कोई जान चली जाती है। उन्होंने घाटी में गोताखोरों की पर्याप्त संख्या में उपलब्धता की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गोताखोरों के लिए समुचित प्रशिक्षण की व्यवस्था तथा उपकरणों की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। इसके अलावाए सैलानियों को नदी के समीप जाने से रोकने के लिए भी कोई ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। घाटी में हैं अनेकों ग्लेशियर प्वांइट, कई झीलें भी मौजूद एडवेंचन टूअर ऑप्रेटर एसोसिएशन के चेयरमैन विशाल ठाकुर ने कहा कि घाटी में अनेकों ग्लेशियर प्वांइट हैं और इनके नीचे अनेक जगहों पर झीलों की मौजूदगी है। घेपन घाट झील में काफी हलचल है और उत्तराखंड के चमोली जैसे हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कार्बन इफैक्ट को कम करने के होंगे प्रयास नेचर एंड लाइफ एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम मंहत तथा लायुल वैलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन शेर सिंह यांबा ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि विकास और विनाश साथ-साथ चलते हैं। विकास को रोका नहीं जा सकता। अत्यधिक धूल, धुएं के कण हिमालयन ग्लेशियरों पर सैटल हो रहे हैं जिससे इनका रंग काला पड़ रहा है और ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने पर्यावरण में कार्बन के प्रभाव में कमी लाने का सुझाव दिया। बैठक की कार्रवाई का संचालन जिला आपदा प्रबंधन के प्रभारी प्रशांत ने किया। उन्होंने सभी स्वयंसेवी संस्थाओं से सदस्यों की अद्यतन सूची सांझा करने को कहा। उन्होंने कहा कि सदस्यों को आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यकलापों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। अटल बिहारी पर्वतारोहण संस्थान से लुदर सिंहए जिला युवा अधिकारी सोनिका चंद्रा, जिला राजस्व अधिकारी मनोज कुमार के अलावा गैर-सरकारी संस्थाओं से सोम देव शर्मा, बीजू, तेज सिंह, जय सिंह, हितेश्वर सिंह, बेली राम, खेख राम, चुन्नी लाल, चमन लाल, डा. आरके शर्मा छापे राम, डा. राम सिंह, निशा कुमारी व लाल चंद बैठक में उपस्थित रहे।

कार्यालय संवाददाता-कुल्लू जिला कुल्लू के उपमंडल आनी के शरशाह में एक व्यक्ति का अचानक पैर फिसला और इससे वह खेत में जा गिरा। इस घटना से उसे गंभीर चोटें आर्इं और उसकी मौत हो गई। पुलिस की जानकारी के अनुसार पुलिस चौकी नित्थर को ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान ने सूचना दी कि एक व्यक्ति बड़ा शरशाह में खेत के रास्ते में गिर गया है।

जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के दौरान पाया कि 43 वर्षीय नील चंद बड़ा शरशाह डाक घर शारवी उप तहसील नित्थर जिला कुल्लू खेत के रास्ते के साथ पैर फिसलने से नीचे 15 फुट नीचे खेत में गिर गया था, जिस कारण उसकी मौत हो गई। परिजनों के बयान के आधार पर पाया गया कि व्यक्ति की मृत्यु गिरने के कारण हुई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए निरमंड भेज दिया गया है। एसपी कुल्लू गौरव सिंह ने बताया कि पुलिस ने घटना में सीआरपीसी की धारा 174 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उन्होंने बताया कि शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद व्यक्ति की मौत के असली कारणों का पता चलेगा।

मौहल में एकजुट हुए बागबान-वैज्ञानिक, बनाई रणनीति

स्टाफ रिपोर्टर-भुंतर जिला कुल्लू के किसानों-बागबानों के मसलों रणनीति बनाने के लिए पहली बार जिला कृषि विज्ञान किसानों के बीच पहुंचा। जिला कुल्लू के मौहल में कृषि विज्ञान केंद्र कुल्लू की 35वीं वैज्ञानिक-सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति डा. हरिंद्र कुमार चौधरी ने विशेष तौर से भाग लिया व कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा 200 किसानों के बीच पिछले एक साल में की गई गतिविधियों पर चर्चा के साथ आगामी रणनीति बनाई गई।

इस मौके पर केवीके बजौरा के प्रभारी ने जानकारी दी की कि जलवायु परिवर्तन के लिए निक्रा परियोजना चलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि जिला में 94.5 जमीन लघु व किसानों के पास है। उन्होंने कहा कि मक्की की 25 क्विंटल प्रति हैक्टेयर पैदावार हो रही है, जो प्रदेश के औसत आंकड़े से अधिक हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ चर्चा कर व विभिन्न संगठनों व प्रतिनिधियों के साथ मिलकर प्लान बनाया जाता है। ग्रामीण युवाओं व उद्यमियों के विकास के लिए भी योजना बनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि एक साल में केवीके में 38 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एक हजार से अधिक किसानों को लाभ दिया है। कुल 93 सभी प्रकार के कार्यक्रम किए गए हैं। नौ प्रदर्शन किए गए हैं। कुल्लू को विभिन्न गतिविधियों के लिए दो पुरस्कार भी इस बार मिले हैं। 2500 कैलेंडर भी साल भर में किसानों को बांटे गए हैं। बजौरा में तैयार हो रहे विभिन्न सब्जियों के बीज के बारे में उन्होंने जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र बजौरा व मौहल पंचायत की ओर से मुख्यातिथि का स्वागत किया गया तो उन्होंने कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों व संस्थाओं द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

कुलपति डा. एचके चौधरी ने इस दौरान किसानों-बागबानों को विश्वविद्यालय के द्वारा की जा रही गतिविधियों के बारे में जानकारी दी तो साथ ही किसानों-बागबानों को उन्नत कृषि-बागबानी तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय क्या और कैसे काम करता है, इसकी जानकारी सब किसानों को होनी चाहिए और इसी कारण किसानों के खेत में जाकर कार्यक्रम करवाने का फैसला लिया गया है। इसलिए गांव-गांव में कार्यक्रम करने का फैसला लिया गया है। इस दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं भी रखी। इस दौरान कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के प्रसार निदेशक डा. मधुमीत सिंह, रिसर्च निदेशक डा. डीके वत्स, सीओएवीएस के डीन मनदीप शर्मा सहित पंचायत समिति कुल्लू के उपाध्यक्ष यशपाल डडवाल, मौहल पंचायत प्रधान ईशरा देवी, पंचायत समिति सदस्य राजेश कुमार सहित बजौरा सहित कृषि, बागबानी व पशुपालन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारियों व वैज्ञानिकों ने भी भाग लिया। इस दौरान प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया।