Tuesday, November 30, 2021 08:08 AM

गौरव ने खोजा त्वचा रोग के इलाज वाला अर्क

जर्मनी की राइन वाल यूनिवर्सिटी की रिसर्च में मंडी के गौरव को बड़ी सफलता

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — मंडी

23 साल के गौरव ने जर्मनी की राइन वाल यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंस क्लब में जैविक संसाधनों में मास्टर स्टडीज के तहत शोध करते हुए एक ऐसे वनस्पतिक अर्क की सफलतापूर्वक खोज की है, जो त्वचा के हाइपरपिग्नेटेशन के उपचार में काम आएगा। गौरव जो मंडी शहर के प्रसिद्ध टं्रक वाले परिवार से है व टं्रक वाले के नाम से मशहूर चमन लाल गुप्ता का पोता है। उसके पिता दलीप महाजन व्यवसायी हैं, जबकि माता अनु गुप्ता गृहिणी है। 21 साल की उम्र में चंडीगढ़ से बीएससी करने के बाद गौरव उच्च शिक्षा के लिए जर्मनी गया जहां पर उसने जीवन की एक बड़ी चुनौती को सामने रखते हुए उक्त युनिवर्सिटी में एक अंतरराष्ट्रीय छात्र के नाते एमएससी की पढ़ाई शुरू की। उसने अपने मास्टर अध्ययन में अपना शोध सफलतापूर्वक पूरा करते हुए त्वचा के असाध्य रोगों के उपचार के लिए वनस्पतिक अर्क की खोज की। गौरव ने बताया कि इस शोध कार्य में उनके पयवेक्षक जर्मन के प्रो डा. आईएन जी फ्रेंक प्लैट, डा. मेड मार्टिन हरमन तथा डा. मेड रहे।

इस शोध में उनका मार्गदर्शन करने वाले गुंटर रीनर्थ उनकी इस उपलब्धि से बेहद खुश व उत्साहित हैं। गौरव महाजन के परिजनों ने बताया कि अपने जीवन में कुछ अलग हटकर करने की एक मंशा उसे बचपन से ही थी। इसी धुन में वह जर्मनी तक पहुंच गया और यह एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की। गौरव ने बताया कि इस शोध को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उसे कड़ी मेहनत करनी पड़ी मगर उन्होंने पर्यवेक्षकोंए मार्गदर्शकों व परिजनों से मिले हौंसले से ही वह यहां तक पहुंच पाए हैं। वह इस उपलब्धि पर खुश है और सोचते हैं कि उनकी जीवन कहानी अन्य युवा छात्रों के लिए एक प्रेरणा होगी जो मेहनत करने सफल होते हैं। उसका कहना है कि यह केवल माता-पिता व परिजनों के लिए ही नहीं बल्कि संपूर्ण देश के लिए भी गर्व का विषय है। गौरतलब है कि गौरव बीते चार सालों से जर्मनी में अध्ययनरत है। चार साल में केवल एक बार ही मंडी अपने घर आया है।