Monday, October 18, 2021 05:28 PM

गीता रहस्य

स्वामी रामस्वरूप

श्रीकृष्ण महाराज भी पूर्ण ब्रह्मलीन एवं ब्रह्म के प्रेम में मग्न होकर स्वयं में ईश्वर के गुण प्रदर्शित कर रहे हैं। ऐसे ही योगेश्वर स्वयं को परमेश्वर के गुणों में बदल कर परमेश्वर सा बनकर जब कोई ज्ञान देते हैं तब इसमें कोई दोष नहीं है क्योंकि यह विभूतियां होती ही ब्रह्मलीन हैं। परंतु यह सब गूढ़ ज्ञान केवल वेदाध्ययन, यज्ञ एवं योगाभ्यास द्वारा ही ज्ञात होता है...

गतांक से आगे...

अर्जुन यही कहते हैं कि हे श्रीकृष्ण महाराज ! इन दिव्य आत्मविभूतियों के विषय में आप ही जानने में समर्थ हो, मुझे कुछ पता नहीं। ऐसी ही मिलती-जुलती बात अर्जुन ने श्लोक 10/15 में भी कही है कि हे कृष्ण आप स्वयं ही अपने आपसे अपने आपको जानते हो। जैसा कि ऋग्वेद मंत्र 1/30/5 में कहा कि हे विद्वान! (ते विभूतिः) आपका ऐश्वर्य (नःमदायं अस्तु ) हमारे आनंद के लिए हो। श्लोक 10/16 में दिव्य आत्मविभूतियों का वर्णन है। परमेश्वर में अनंत गुण है, विभुतियां है। उन विभूतियों को श्लोक 10/16 में दिव्य आत्मविभूतियां कहा है।   दिव्य का अर्थ है कि जो इस पृथ्वीलोक से संबंधित न होकर द्युलोक से संबंधित है। ऋग्वेद मंत्र 1/64/46 में दिव्य भी ईश्वर का नाम है जिसका अर्थ है ‘प्रकाशमय’ अर्थात ईश्वर स्वयं प्रकाशक ज्योर्तिमय है। ईश्वर की दिव्य विभूतियां अनंत हैं फलस्वरूप ही ईश्वर के अनंत नाम हंै। इनमें से कुछ पिछले श्लोक 12 से 15 में परम धाम, परम पवित्रम, अज, विभु, भूतवान आदि कहा है।

 वस्तुतः श्रीकृष्ण महाराज पूर्ण योगेश्वर, ब्रह्मलीन ईश्वर की विभूति हैं। ऐसी विभूतियां स्वयं को परमेश्वर के धर्म (भावों में) परिवर्तित होने का अनुभव रखती हैं, अतः ऐसी विभूतियां अपने आपको ईश्वर जैसा ही प्रस्तुत करती है और कहीं-कहीं ईश्वर की ओर से ही व्याख्यान करती हैं। श्रीकृष्ण महाराज भी पूर्ण ब्रह्मलीन एवं ब्रह्म के प्रेम में मग्न होकर स्वयं में ईश्वर के गुण प्रदर्शित कर रहे हैं। ऐसे ही योगेश्वर स्वयं को परमेश्वर के गुणों में बदल कर परमेश्वर सा बनकर जब कोई ज्ञान देते हैं तब इसमें कोई दोष नहीं है क्योंकि यह विभूतियां होती ही ब्रह्मलीन हैं। परंतु यह सब गूढ़ ज्ञान केवल वेदाध्ययन, यज्ञ एवं योगाभ्यास द्वारा ही ज्ञात होता है। श्रीकृष्ण एवं व्यासमुनि दोनों ही वेदों के दार्शनिक एवं योग विद्या द्वारा ईश्वर में लीन थे और स्वयं को ईश्वर प्रस्तुत कर रहे हैं तब यह उचित ही है। इस प्रकार गीता ग्रंथ वेदों के दार्शनिक व्यास मुनि द्वारा रचित वैदिक रहस्यों से भरपूर हैं।