Wednesday, August 05, 2020 06:45 PM

हाई कोर्ट पहुंचा दियोली सभा का महाघोटाला

न्यायालय ने मामले में संज्ञान लेकर सहकारी सभाएं के रजिस्ट्रार और एसपी से सात अगस्त तक मांगा जवाब

गगरेट-कृषि सहकारी सभा दियोली में हुआ 11 करोड़ 70 लाख रुपए का महाघोटाला अब प्रदेश उच्च न्यायालय में पहुंच गया है। इस मामले के उजागर होने के करीब एक साल बाद भी सहकारिता विभाग व पुलिस विभाग द्वारा जांच को गति न देने के रोष स्वरूप सभा की प्रबंधन समिति उच्च न्यायालय की शरण में चली गई है। प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए रजिस्ट्रार सहकारी सभाएं व एसपी ऊना को सात अगस्त को तलब कर जवाब दायर करने को कहा है। कृषि सहकारी सभा दियोली में सहकारिता विभाग द्वारा किए गए ऑडिट में ही करीब 11 करोड़ 70 लाख रुपए का महाघोटाला सामने आया था। इसके बाद सहायक पंजीयक, सहकारी सभाएं की शिकायत पर गगरेट पुलिस थाना में सभा सचिव के विरुद्ध धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था जबकि सहकारिता विभाग ने भी अपने स्तर पर इसकी जांच शुरू करने के साथ सहकारिता एक्ट की धारा 69 (1) के तहत कार्रवाई शुरू की थी। इस मामले में ढुलमुल रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए सभा के खाताधारक कई बार प्रदर्शन तक कर चुके हैं। जबकि सभा खाताधारकों द्वारा यह मामला जनता दरबार में उठाते हुए जनता दरबार में शिरकत करने आए विधानसभा उपाध्यक्ष से भी मामले की जांच विजिलेंस विभाग से करवाने की मांग की थी, लेकिन न तो इस मामले में कोई कड़ी कार्रवाई हुई और न ही जांच गति पकड़ पाई। सभा के सैकड़ों खाताधारक अपने खून पसीने की कमाई को यूं उजड़ते देख बार-बार प्रबंधन समिति को मामले का संज्ञान लेने को कह रहे थे। हर तरफ से हताश व निराश हो चुकी प्रबंधन समिति ने प्रदेश उच्च न्यायालय की शरण में जाना ही वाजिब समझा। 11 करोड़ 70 लाख रुपए का यह घोटाला उजागर करने में भी प्रबंधन समिति की प्रमुख भूमिका रही थी। प्रबंधन समिति के प्रधान सुरेंद्र सिंह के प्रयासों का ही यह नतीजा था कि यह घोटाला जनता के सामने आ सका। अब इस मामले के प्रदेश उच्च न्यायालय में पहुंच जाने के बाद खाताधारकों में उनके डूबे हुए पैसे फिर से मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि इस पूरे मामले में पुलिस विभाग व सहकारिता विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं। आखिर ऐसी क्या वजह हुई कि पुलिस इस मामले की तफतीश कर एक साल बाद भी इसका चालान न्यायालय में पेश नहीं कर पाई। उधर सहकारिता विभाग भी सहकारिता एक्ट के तहत कार्रवाई करने से क्यों बचता रहा यह हर किसी की समझ से परे है। प्रदेश उच्च न्यायालय में प्रबंधन समिति की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अजय शर्मा का कहना है कि पुलिस व सहकारिता विभाग द्वारा अपने फर्ज का निर्वहन न करने के चलते यह मामला प्रदेश उच्च न्यायालय में उठाया गया है। प्रदेश उच्च न्यायालय ने रजिस्ट्रार, सहकारी सभाएं व एसपी ऊना को नोटिस जारी कर सात अगस्त को अपना जवाब दायर करने को कहा है।

 

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