Saturday, October 31, 2020 12:14 AM

हक के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे बीटेक डिग्री होल्डर्स, उच्च न्यायलय के फैसले से असंतुष्ट हैं अभ्यर्थी

जेई इलेक्ट्रिकल भर्ती विवाद को लेकर शीर्ष अदालत में दायर की याचिका

हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग द्वारा हाल ही में पोस्ट कोड 663 के तहत जेई इलेक्ट्रिकल के 222 पदों के परिणाम से निराश प्रदेश भर के बीटेक डिग्री होल्डर्स अब देश की शीर्ष अदालत की शरण में चले गए हैं। उन्होंने माननीय उच्चतम न्यायल में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई है। बीटेक अभ्यर्थियों और याचिकाकर्ताओं पुनीत शर्मा, गुरजीत, आशीष, अभिषेक, बनीत, प्रवीण, पंकेश, सौरभ शर्मा, रोबिन, अरविंद, विशाल, कमलेश, साहिल, अमन व नवीन के अनुसार जेई इलेक्ट्रिकल भर्ती का परिणाम घोषित होने के बाद ऐसा लग रहा है कि प्रदेश सरकार न तो राज्य के उच्च शिक्षित वर्ग के साथ है और न ही उसे प्रदेश के बेरोजगारों की चिंता है, क्योंकि बीटेक डिग्री होल्डर्स को अयोग्य ठहराया जा रहा है और बाहरी राज्यों के 47 डिप्लोमा होल्डर्स की सिलेक्शन की गई है। बता दें कि पोस्ट कोड-663 के तहत जून, 2018 से जेई इलेक्ट्रिकल के 222 पदों के लिए होने वाली यह भर्ती प्रक्रिया विवादों में रही है। पहले इसमें डिप्लोमा धारक कोर्ट की शरण में गए, फिर बीटेक डिग्री धारक। हालांकि कोर्ट ने अंतिम फैसला डिप्लोमा धारकों के पक्ष में सुनाया और परीक्षा पास करने वाले 283 डिग्री धारकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। बीटेक डिग्री होल्डर्स में इस बात को लेकर रोष है कि इससे पहले तो कभी ऐसा नहीं हुआ कि हायर क्वालिफिकेशन वालों को बाहर किया गया हो।

आज भी इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट में ऐसे सैकड़ों जेई या एसडीओ सेवारत हैं, जो बीटेक डिग्री होल्डर्स थे और उनकी डिपार्टमेंट में सिलेक्शन हुई थी, लेकिन पहली बार सरकार ने डिग्री होल्डर्स को बाहर का रास्ता दिखाते हुए डिप्लोमा होल्डर्स को इस भर्ती के योग्य माना। बीटेक डिग्री होल्डर्स ने उच्च न्यायलय का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। अब रिजल्ट घोषित होने के उपरांत बीटेक डिग्री होल्डर्स ने सुप्रीम कोर्ट से न्याय की गुहार लगाई है। बता दें कि जेई इलेक्ट्रिकल के जो 222 पद भरे जा रहे हैं, उनमें जनरल कैटेगरी के कुल 90 पदों में से 47 पदों पर यूपी, बिहार और झारखंड राज्यों के लोगों का चयन किया गया है। एक अनुमान के अनुसार मौजूदा समय में 18 से 20 हजार बीटेक डिग्री और डिप्लोमा होल्डर्स बेरोजगार बैठे हैं, जो कि नौकरी का इंतजार कर रहे हैं।

दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी रखें पोस्ट

शिमला – प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा जूनियर मेट व हेल्पर के 1892 पदों में एक भी पद दिव्यांग श्रेणी को आरक्षित न करने के मामले में राज्य सरकार व बिजली बोर्ड को आदेश दिए कि वे इन पदों को भरते समय दिव्यांग श्रेणी के प्रार्थी के लिए एक पद रिक्त रखे। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने विद्युत बोर्ड को 2 सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश भी दिए।

याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार 4 जून 2020 को विद्युत बोर्ड ने जूनियर टी मेट के 1500 व जूनियर हेल्पर के 392 पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था। दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों को 4 फ़ीसदी आरक्षण न देने के पीछे कारण दिया गया था कि बोर्ड ने दिव्यागों के लिए बनाये अधिनियम के तहत राज्य सरकार से इस बाबत पहले ही जरूरी छूट ले रखी है। प्रार्थी की यह दलील है कि विद्युत बोर्ड द्वारा ली गई छूट कानूनी तौर पर न्यायोचित नहीं है। प्रार्थी के अनुसार जो छूट ली गई है वह पुराने अधिनियम के मुताबिक ली गई है जबकि नए अधिनियम के तहत बनाये राज्य आयुक्त से सलाह लेने के पश्चात ही राज्य सरकार से छूट ली जा सकती है। मामले पर सुनवाई 30 सितंबर को निर्धारित की गई है।

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