हे फेसबुक तुझे प्रणाम

अशोक गौतम

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रोट से लेकर लंगोट तक पोस्ट करने वाले मेरे फेसबुकिया मित्रों को यह दर्दनाक सूचना देते हुए मुझे मरने से भी अधिक पीड़ा हो रही है कि डॉक्टर ने मुझे सलाह दी है कि मैं कुछ दिनों तक फेसबुक से दूर रहूं, इसी में आपकी भलाई है। हालांकि जबसे फेसबुक के साथ आठ फेरे लिए हैं, अपनी भलाई के बारे में सोचने का कभी मौका ही नहीं मिला। ये कमीनी फेसबुक भी न! दारु से अधिक नशा किसी में है तो बस फेसबुक में। वैसे एक बार पहले भी डॉक्टर ने मुझे मुझ पर पड़ते फेसबुक के साइड इफैक्टों को देखते हुए फेसबुक से कुछ दिनों के लिए दूर रहने की नेक सलाह दी थी। पर मैंने उसे आपके हित में इग्नोर कर दिया था, जिस वजह से आज मेरा फेसबुकिया रोग यहां तक आन पहुंचा है। मित्रो! सच कहूं तो जितने दीवाने राजा रत्नसेन पद्मावती के लिए भी न हुए होंगे, उससे सैंकड़ों गुणा अधिक मैं इस फेसबुक का दीवाना हो गया हूं। इतनी तो मीरा भी कृष्ण की क्या ही दीवानी रही होगी, जितना मैं फेसबुक का दीवाना हूं।

अगर हीर के टाइम में फेसबुक होती तो वह रांझा की दीवानी न होकर फेसबुक की दीवानी हुई होती और आज हम हीर-रांझा के प्रेम के किस्सों के बदले हीर-फेसबुक के किस्से सुना-गुना करते। इस पगली फेसबुक ने मुझे अपना इतना लती बना दिया है कि मैं फेसबुक पर इस जन्म की तो इस जन्म की, अब अपने पिछले-अगले जन्म की पोस्टें भी पूरे आत्मविश्वास से डालने लग गया हूं। जिस दिन मुझे फेसबुक पर आपसे साझा करने के लिए कुछ नहीं मिलता, सच कहूं उस दिन मैं पागल हो जाता हूं, खूंखार हो जाता हूं।  मेरे दिल की धड़कनें रुकने लग जाती हैं। मेरा दिमाग चक्कराने लग जाता है। मेरा पूरा बदन दर्द से कहरा उठता है।  अंग-अंग भंग होने लग जाता है। तब मैं पागलों की तरह हाथ-पांव इधर-उधर मारने लग जाता हूं कि मैं अपने दोस्तों से साझा करने के लिए फेसबुक पर डालूं तो क्या डालूं? जब कुछ भी डाल देता हूं तो मेरा दिल सामान्य हो धड़कने लग जाता है। मेरे दिमाग को चक्कर आने खत्म हो जाते हैं। मेरी सांसें सामान्य हो जाती हैं। हे मेरे फेसबुकिया मित्रो! सच कहूं तो अब फेसबुक ही मेरा दीन है, मेरा ईमान है। ये फेसबुक ही अब मेरा सच्चा कर्म है, मेरा मनचाहा धर्म है। फेसबुक ही अब तो मेरी दुनिया है, मेरा जहान है।  मेरा ताजमहल है, मेरा मचान है। जिस पल मुझे अपने फेसबुक अकाउंट में कुछ पोस्ट करने को नहीं मिलता, उस पल मैं अधीर हो उठता हूं। क्लास वन होने के बाद भी फकीर हो उठता हूं।

मन करता है अपना सिर फेसबुक की वाल से टकरा-टकरा कर फोड़ दूं। आपकी कसम! फेसबुक ही अब मेरी दुनिया है, मेरा जहान है। मेरा ताजमहल है, मेरा मचान है। जिस दिन मुझे अपने फेसबुक अकाउंट में कुछ पोस्ट करने को नहीं मिलता, उस दिन मैं अधीर हो उठता हूं। मैं क्लास वन होने के बाद भी फकीर हो उठता हूं। मन करता है अपना सिर फेसबुक की वाल से टकरा-टकरा कर फोड़ दूं। तो मित्रो! अब ज्यादा न लिखते हुए मैं आपसे न चाहते हुए भी फेसबुक से कुछ दिनों के लिए दूर हो रहा हूं, पर तय मानिए, आपके दिल के बिलकुल आसपास ही रहूंगा। पर यह भी हो सकता है कि अपनी बीमारी की परवाह किए बिना मैं दो घंटे बाद ही आपसे फेसबुक पर रूबरू हो जाऊं। दोस्तो! बीमारी अपनी जगह, फेसबुक अपनी जगह। हे मेरे फेसबुक दीवानो! कोई भी बीमारी हम जैसों को फेसबुक पर सरपट दौड़ने से कतई नहीं रोक सकती।

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