Sunday, July 25, 2021 08:11 AM

नौकरशाही के ऊंचे दरवाजे

बेशक यह बड़ी घटना नहीं, लेकिन कोरोना काल में प्रशासनिक दरगाह ढूंढने की कोशिश तो है ही। शिमला सचिवालय की रौनक में मशरूफ नौकरशाही को कहीं ऊंचे दरवाजों से गुजारने की पहल हुई है। सत्ता के भरोसेमंद अधिकारियों या अधिकारों के भरोसे में राम सुभग सिंह,आर डी धीमान और ओंकार शर्मा को अतिरिक्त दायित्व की कसौटी पर कुछ फासले चलने होंगे, तो नई जिम्मेदारियों में निशा सिंह, कमलेश पंत, डा. अजय कुमार, डा. एसएस गुलेरिया तथा हंस राज शर्मा जैसे आईएएस अधिकारी अपना फलक विस्तृत कर रहे हैं। यह नए अमन की बिसात है, जो कोरोना काल के अकाट्य सत्य को सुशासन के पैमानों में भरेंगे। यानी हम आने वाले हर प्रशासनिक फेरबदल में सत्ता की इच्छा शक्ति तथा सुशासन की तंदरुस्ती का हिसाब लगाएंगे। हालांकि कोरोना काल के बीच बनती बिगड़ती छवियों का कोई मध्यांतर नहीं हुआ और संकट में राज्य के संकटों को जनता ने अपने अनुभवों में तसदीक किया।

विभागीय परिवर्तनों में मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार परिलक्षित है, जबकि मंत्रियों का यह दौर एक आधी नियुक्ति की दिलचस्पी हो सकती है। जैसे हम मान सकते हैं कि ओंकार शर्मा के पास बागबानी के प्रधान सचिव पद का अतिरिक्त कार्यभार दरअसल सरकार के पावर पुल मंत्री महिंद्र सिंह का पसंदीदा निर्णय रहा होगा। मुख्यमंत्री के आसपास रहे विभागीय जौहर में पुनः आरडी धीमान और राम सुभग सिंह का बढ़ता दायरा देखा जा सकता है। सरकार को अपने कार्यकाल के अंतिम पड़ाव में नई ऊर्जा का संचार इसलिए भी करना है, क्योंकि मंजिल से पहले दो उपचुनाव, कोरोना काल में रुके हुए विकास का अंजाम, घोषणाओं और वादों का इंतजाम और सुशासन की पटरियों पर बहुत कुछ लिखना होगा। यह सरकार इन्वेस्टर मीट के बहाने आशाओं के कई सेतु बनाती रही है, तो अब इनसे गुजरने का वक्त नजदीक आ रहा है। विकास के नए मॉडल में इतिहास रचने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जो खाका खींचा था उसमें इसलिए भी रंग भरने जरूरी हैं, क्योंकि जनता ने डबल इंजन सरकार के मुहावरे का अब अर्थ ढूंढना है। बेशक सचिवालय की बैठकों में तमाम कार्यों की समीक्षाएं अनवरत जारी होंगी, लेकिन इस दौर की सबसे बड़ा विश्लेषण कोरोना काल कर रहा है। इस समय हिमाचल का सबसे अहम विभाग हर दिन पूरी जनता के स्वास्थ्य का हाल पूछ रहा है, अतः सचिव अमिताभ अवस्थी का दायित्व पूरी सरकार की छवि का उत्तर होगा। सरकार ने एक साथ तीन नए नगर निगम बना कर शहरी विकास मंत्रालय का प्रसार किया है, तो समूची व्यवस्था में आयुक्त स्तर के अधिकारियों के दम पर परिवर्तन सामने लाना पड़ेगा। इसी तरह बिना परीक्षा और स्कूल से दूर ऑनलाइन शिक्षा में नए लक्ष्य और उम्मीदें पिरोने के लिए संबंधित विभाग के सचिव की भूमिका में कई प्रयोग व नवाचार की ऊर्जा अभिलषित है।

ट्रांसफर की सुगबुगाहट जिला और उपमंडल स्तर तक अगर पहुंच रही है, तो ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार एक नई पिच पर खुद को आजमाने जा रही है। कोरोना काल के दौरान कई उपायुक्तों ने अपने दायित्व के ऐसे उदाहरण पेश किए हैं कि जनता भी सोशल मीडिया में उनके प्रति अपना मोह व कृतज्ञता पेश करती दिखाई देती है। हमारा मानना है कि चिकित्सा संकट के इस दौर में प्रशासन ने न केवल तत्परता दिखाई, बल्कि नेक कार्य भी किए। इसलिए आगामी स्थानांतरणों में जिलाधीश बदले जाते हैं, तो पहले से स्थापित रिवायतों का अनुसरण करना पड़ेगा। कांगड़ा, मंडी या शिमला जैसे बड़े जिलों के कोरोना आंकड़ों का विश्लेषण सीधे-सीधे प्रशासनिक नेतृत्व से जुड़ा रहा, तो बार्डर जिलों की चौकसी में प्रशासनिक व पुलिस व्यवस्था ने खुद को पारंगत किया है। कोरोना काल के मध्य हर स्थानांतरण का मतलब केवल स्थानांतरण नहीं, बल्कि एक खास परिपाटी का अनुसरण है। उम्मीद है सरकार आगे चलकर जनता की बेहतरी के लिए प्रशासनिक क्षमता व ऊर्जा को एक नए आयाम तक पहुंचा पाएगी।