Tuesday, September 29, 2020 09:53 PM

हिमाचल के पहाड़ों पर गरज रहा राफेल, किन्नौर, लाहुल में रात को चल रहा अभ्यास

दिव्य हिमाचल ब्यूरो, केलांग

फ्रांस से हाल ही में मिले पांच राफेल फाइटर जेट हिमाचल के पहाड़ों पर खूब गरज रहे हैं। ये लड़ाकू विमान रात के समय हिमाचल के पहाड़ों पर प्रैक्टिस में जुटे हैं, ताकि गोल्डन एरोज स्क्वाड्रन के ये आसमानी योद्धा जरूरत पड़ने पर लद्दाख में लाइन ऑफ  एक्चुअल कंट्रोल पर एयर-टू-एयर मिसाइल और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलों के साथ दुश्मन को तबाह कर सकें। प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों किन्नौर और लाहुल-स्पीति की पहाडि़यों पर यह अभ्यास वायु सेना द्वारा करवाया जा रहा है।

बर्फीली पहाडि़यों के बीच चल रहे इस अभ्यास ने जहां चीन व पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है, वहीं बताया जा रहा है कि वायुसेना ने हिमाचल की बर्फीली पहाडि़यों का चयन इस अभ्यास के लिए इसलिए किया है, क्योंकि यहां की पहाडि़यों की चोटियों की बनावट लेह-लद्दाख से काफी मिलती जुलती है। गौर हो कि लाहुल-स्पीति की जहां अंतरराष्ट्रीय बार्डर के साथ करीब 105 किलो मीटर लंबी सीमा लगती है, वहीं किन्नौर क्षेत्र की करीब 120 किलो मीटर की सीमा अंतरराष्ट्रीय बार्डर से लगती है। हाल ही में प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सेना के अधिकारियों द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया था, वहीं अब यहां राफेल विमानों के अभ्यास ने वायुसेना की तैयारियों को लेकर भी नई चर्चा शुरू कर दी है।

यहां बता दें कि अभी ये विमान एलएसी से दूर रह रहे हैं, ताकि अक्साई चिन में तैनात पीएल के राडार इसके फ्रीक्वेंसी सिग्नेचर को न पहचान सकें, क्योंकि खराब स्थिति में वे इनका इस्तेमाल जैम करने के लिए कर सकते हैं। हालांकि, मिलिट्री एविएशन के एक्सपर्ट कहते हैं कि राफेल का इस्तेमाल लद्दाख में ट्रेनिंग के लिए भी हो सकता है, क्योंकि इन विमानों में युद्ध जैसी स्थिति में अपना सिग्नल फ्रीक्वेंसी बदल लेने की क्षमता है। ऐसे में राफेल को लेकर वायुसेना द्वारा प्रदेश की बर्फीली पहाडि़यों पर चल रहे अभ्यास से जहां भारतीय वायुसेना हर स्थिति में उक्त विमानों को उड़ाने का सही अभ्यास अपने पायलटों को करवा रही है, वहीं लाहुल-स्पीति व किन्नौर के सीमा वर्ती क्षेत्रों की पहाडि़यों पर रात के अंधेरे में लोगों ने इन्हें उड़ता देखा है। ऐसे में राफेल विमान के इस अभ्यास को लेकर जहां लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है, वहीं लाहुल-स्पीति के लोगों का कहना है कि चीन के साथ जिस तरह से हालात बने हुए हैं, उसे ध्यान में रख अब राफेल को उतारने का सही निर्णय भारतीय वायु सेना ने लिया है।  उधर, उपायुक्त लाहुल-स्पीति केके सरोच का कहना है कि प्रशासन को इस बारे में किसी भी तरह की सूचना नहीं है। वायुसेना अपने स्तर पर इस अभ्यास को अंजाम दे रही है।

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