Sunday, March 07, 2021 04:39 PM

सोलन के दरबारी हॉल में रखा था हिमाचल का नाम, वर्तमान में ऐतिहासिक इमारत जर्जर हालत में

विशेष संवाददाता—शिमला

स्वर्णिम हिमाचल कार्यक्रम के बाद पीटरहाफ में भाजपा प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक हुई। शाम के वक्त शुरू हुई बैठक से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पीटरहाफ में पदाधिकारियों से मुलाकात की। वहां दोपहर का भोजन करने के दौरान उन्होंने अलग-अलग नेताओं से बातचीत की और प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य को जाना। इसके बाद जेपी नड्डा व अनुराग ठाकुर के साथ दिल्ली लौट गए। यहां पीटरहाफ में पार्टी के प्रभारी अविनाश रॉय खन्ना  की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें सह प्रभारी श्री टंडन, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप मौजूद रहे। यहां सभी पदाधिकारियों से उनके कार्यक्षेत्र में आए चुनावी नतीजों की चर्चा हुई और जाना कि पार्टी के समर्थक प्रत्याशी कहां-कहां जीत कर आए हैं? क्योंकि अभी जिला परिषद व पंचायत समिति के अध्यक्षों-उपाध्यक्षों का चयन किया जाना है। लिहाजा अपने-अपने समर्थकों को जिला परिषद व पंचायत समिति में ओहदा दिलाने को लेकर भी यहां बातचीत हुई है।

राज्यपाल बोले, पचास वर्षों में हिमाचल में स्थापित हुए सफलता के नए आयाम

दिव्य हिमाचल ब्यूरो—शिमला

हिमाचल प्रदेश के राज्यत्व दिवस के 50 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह सोमवार को प्रदेश भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। रिज पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे, जबकि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। राष्ट्रीय भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और केंद्रीय वित्त एवं कार्पोरेट मामले राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर विशेष रूप से इस समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर राज्यपाल ने प्रदेशवासियों को पूर्ण राज्यत्व दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि इस छोटे पहाड़ी राज्य ने 50 वर्षों की यात्रा में उल्लेखनीय विकास किया है। राज्यपाल ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी लोगों के सहयोग और सशक्त नेतृत्व से प्रदेश में विकास के नए आयाम स्थापित होंगे। इस अवसर पर सूचना एंव जन संपर्क विभाग द्वारा राज्य की स्वर्ण जयंती पर आधारित गीत और वृत्त चित्र हिमाचल को दिखाया गया और विभाग द्वारा प्रकाशित एक कॅफी टेबल बुक-स्वर्णिम हिमाचल का भी विमोचन किया गया। इस अवसर पर स्वर्ण जयंती पर एक डाक टिकट भी जारी किया गया।

स्टाफ रिपोर्टर—शिमला

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हिमाचल सबसे बड़ी देन है। पच्चीस जनवरी, 1971 को आज ही के दिन ऐतिहासिक रिज पर भारी बर्फबारी के बीच हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया था। इन्हीं ऐतिहासिक लम्हों को याद करते हुए कांग्रेस नेताओं ने अपने नेताओं को याद करते हुए पूर्व पीएम स्वर्गीय इंदिरा गांधी, राज्य के पहले सीएम डा. यशवंत सिंह परमार को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने हिमाचल के निर्माण में इनके योगदान को याद करते हुए समस्त प्रदेशवासियों की ओर से इनके चरणों मे पुष्प अर्पित किए। कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में पार्टी के मुख्य कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष श्री राठौर ने कहा कि 25 जनवरी, 1971 का वह ऐतिहासिक दिन जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रिज मैदान से भारी बर्फबारी के बीच हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा घोषित कर प्रदेश कांग्रेस नेताओं की मांग को पूरा किया था।

 डा. वाईएस परमार के अथक प्रयासों से ही हिमाचल प्रदेश के पूर्ण राज्यत्व का सपना पूरा हो सका था। ठाकुर रामलाल के बाद वीरभद्र सिंह ने आधुनिक हिमाचल के विकास की गाथा को लिखा, जो आज प्रदेश पहाड़ी राज्यों के स्वर्णिम विकास में अग्रणी राज्य के तौर पर जाना जाता है। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने इंदिरा गांधी व डा. यशवंत सिंह परमार के छाया चित्रों पर पुष्प अर्पित किए। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी, वेद प्रकाश ठाकुर, यशपाल तनाइक, सुशांत कपरेट, शशि बहल, सोनिया चौहान, जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष यशवंत सिंह छाजटा, शहरी अध्यक्ष जितेंद्र चौधरी, महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैनब चंदेल, युवा कांग्रेस अध्यक्ष निगम भंडारी के अतिरिक्त अरुण शर्मा, आचार्य मस्तराम शर्मा, सेवादल, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई व पार्टी के अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

73 वर्ष पहले बघाट रियासत के भवन में हुआ था नामकरण

मुकेश कुमार—सोलन

हिमाचल प्रदेश 25 जनवरी को पूर्ण राज्यत्व दिवस मना रहा है, किंतु इतिहास के पन्ने पलटकर देखें, तो हिमाचल का नामकरण करीब 73 वर्ष पूर्व सोलन के दरबारी हॉल में हुआ था। यह दरबारी हॉल बघाट रियासत के राजा कंवर दुर्गा सिंह के शासनकाल में जनता की फरियादें सुनने के लिए बनाया गया था। आज से 73 वर्ष पूर्व 1948 को प्रदेश की 28 रियासतों के राजाओं ने अपनी-अपनी अलग रियासतों को छोड़कर केंद्र सरकार से हाथ मिला लिया था। उस समय प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डा. वाईएस परमार यहां के दरबारी हॉल में कुल 28 रियासतों के राजाओं ने एक बैठक का आयोजन किया था। बैठक में इन राजाओं ने एकजुटता का पिरचय देते हुए डा. यशवंत सिंह परमार की उपस्थिति में अपनी गद्दी छोड़ने के लिए हामी भर दी।

 एक ओर आजादी के बाद का भारत वश्वि मानचित्र पत्र अपनी नई पहचान बना रहा था, इसी बीच सोलन बघाट रियासत के दरबारी भवन की दीवारों के बीच प्रदेश के नाम को लेकर 28 रियासतों के राजा और प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डा. वाईएस परमार के बीच प्रदेश के नाम को लेकर खींचतान चल रही थी।  दरअसल, डा. परमार चाहते थे कि उत्तराखंड राज्य का जौनसर बाबर क्षेत्र भी हिमाचल में मिले और इसका नाम हिमालयन एस्टेट रखा जाए, लेकिन बैठक में मौजूद 28 राजाओं के बीच डा. परमार को किसी का साथ नहीं मिला और देवभूमि का कागजी नाम हिमाचल प्रदेश रखने पर सहमति बनी, जिसके बाद एक प्रस्ताव पारित कर तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को मंजूरी के लिए भेजा गया। सरदार पटेल ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगाकर हिमाचल का नाम घोषित किया और आज यह नाम इस पहाड़ी राज्य की पहचान है। (एचडीएम)

तीन कुर्सियां अब भी मौजूद

आजादी के साज दशक बाद भी ऐतिहासिक धरोहर की सुध नहीं ली जा रही है, हालांकि दरबारी हॉल में आज भी कुछ चीजों में उस समय की झलकियां देखने को मिलती हैं। दरबार द्वार और उस पर की गई नक्काशी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। हॉल में उस समय की तीन कुर्सियां आज भी मौजूद हैं, लेकिन पर्याप्त रखरखाव न होने के कारण इतिहास की गवाह इन कुर्सियों की हालत भी बद से बद्तर हो चली है।

दम तोड़ रही इमारत

एक समय में राजसी शान-ओ-शौकत का गवाह रही यह इमारत आज धीरे-धीरे दम तोड़ रही है। मौजूदा समय में यहां लोक निर्माण विभाग का कार्यालय है, जो बीते कई सालों से इस ऐतिहासिक इमारत में चल रहा है, लेकिन जिलाभर के सरकारी भवनों को बनाने और रखरखाव करने वाले लोक निर्माण विभाग का कार्यालय इस जर्जर भवन में चल रहा है।