Sunday, July 25, 2021 09:16 AM

हिमाचल की सड़कों पर फिर दौड़ी एचआरटीसी, निजी बस आपरेटर दो गुटों में बंटे

दिव्य हिमाचल टीम
करीब पैंतीस दिनों के बाद सोमवार को हिमाचल पथ परिवहन निगम मंडी डिपो से 65 रूटों पर बसें चलाई गई। मंडी डिपो से सुबह पांच बजे पहली बस राजधानी शिमला के लिए भेजी गई, सभी बसों को रूट पर भेजने से पहले सेनेटाइज किया जा रहा है। वहीं, पहले दिन मंडी बस स्टैंड में कम ही सवारिया देखने को मिली और बसों में इक्का-दुक्का सावरियां ही बैठी नजर आई। मंडी क्षेत्रीय प्रबंधक गोपाल शर्मा ने बताया कि पिछले कल लगभग चार सौ चालक परिचालकों में से आधे स्टाफ को ड्यूटी पर बुला लिया गया है और आज मंडी से जिला के सभी क्षेत्रों में बसों को सेनेटाइज कर भेजा जा रहा है।

वहीं, बिलासपुर में निजी बस ऑपरेटरों ने बसें रूट पर चलाने के लिए साफ इनकार कर दिया है। जब तक इनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं तब तक निजी बस सेवा बंद रहेगी, लेकिन लोगों को एचआरटीसी की सेवाएं मिलना शुरू हो गई हैं। पहले दिन लोगों को अभी तक 50 रूट्स पर बस सेवा मिलना शुरू हो गई है। वहीं, शेष रूट पर भी जल्द ही निगम की ओर से चला दिए जाएंगे। दूसरी तरफ सोलन से हिमाचल पथ परिवहन निगम के 20 रूटों को हरी झंडी दिखाई गई है।

पहले दिन चले इन रूट्स में से चार रुट अंतर जिला के तहत शिमला, कांगड़ा और हमीरपुर भेजे गए, जबकि अन्य 16 रूटों को जिला के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों की तरफ रवाना किया गया है। बस सेवाओं के शुरू होने का इंतजार कर रहे लोगों ने पहले ही दिन खासी रुचि सफर करने में नहीं दिखाई, जिसके चलते शिमला कांगड़ा और हमीरपुर जाने वाली बसों में अच्छे खासे यात्री सवार रहे। जबकि जिला के लोकल रूट पर चली हिमाचल पथ परिवहन निगम की गाडिय़ां खाली ही देखी गई।

कोरोना कफ्र्यू में छूट के बाद मंडी निजी बस यूनियन दो गुटों में बंट गई है। सोमवार को निजी बस यूनियन द्वारा अपनी मांगों को लेकर बसों को नहीं चलाने का फैसला लिया था, लेकिन कुछ निजी बस मालिक अपनी बसों को रूट पर भेज रहे हैं, जिसके चलते आज मंडी बस स्टैंड पर निजी बस यूनियन और निजी बस मालिकों के बीच तनातनी देखने को मिली।

निजी बस यूनियन हिमाचल प्रदेश के उपाध्यक्ष वीरेंद्र गुलेरिया ने कहा कि आज मंडी बस स्टैंड में निजी यूनियन द्वारा औचक निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि कुछ निजी बस मालिक यूनियन के आदेशों के बाद भी मंडी जिला में अपनी बसों को चला रहे हैं और अपनी मनमानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जो 40 करोड़ रुपए का अनुदान ट्रांसपोर्टर सेक्टर को दिया गया है वह सिर्फ एक प्रलोभन है।