Tuesday, August 11, 2020 01:08 AM

हवा में कोरोना

कोरोना वायरस का संक्रमण हवा के जरिए भी फैल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों और चिकित्सा विशेषज्ञों के ऐसे शोध को बुनियादी तौर पर स्वीकार कर लिया है। अब इस पर भी अध्ययन और परीक्षण किए जाएंगे। उसके बाद ही किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा, लेकिन संक्रमण के ऐसे फैलाव से बचने की हिदायतें विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दी हैं। संगठन कोरोना के ऐसे संक्रमण के पक्ष में नहीं था। उसका आकलन था कि जहां कोरोना मरीज होंगे, वहां हवा के जरिए संक्रमण फैलने के आसार ज्यादा हैं, लिहाजा स्वास्थ्यकर्मियों को लगातार सचेत किया जाता रहा है। वैज्ञानिकों का नया शोध क्या है, उसका सारांश भी सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन इतना कहा गया है कि खांसने, छींकने और बोलने से जो बूंदें बाहर आती हैं, उनसे संक्रमण फैल सकता है। अभी तक वैज्ञानिकों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने आगाह किया था कि कोरोना संक्रमण का फैलाव सांस के जरिए होता है। इसके अलावा, संक्रमित जगह या सतह को छूने और फिर हाथ को मुंह और नाक तक ले जाने से भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है।  अब दावा किया जा रहा है कि छींकने, खांसने की भारी बूंदें ज्यादा दूर नहीं जातीं, लेकिन छोटी बूंदों में भरा वायरस घंटों तक स्थिर हवा में जिंदा रह सकता है। जो लोग इस हवा में सांस लेंगे और मास्क जैसा आवरण  नहीं पहना होगा, तो वे संक्रमण का शिकार हो सकते हैं। कोरोना वायरस के कण, बिना हवा के भी, 8-13 फुट तक की दूरी तक जा सकते हैं और दायरे में आने वालों को संक्रमित कर सकते हैं। यह शोध भारतीय और अमरीकी संस्थानों की एक टीम ने किया है। हालांकि  अभी तक दुनिया के प्रख्यात चिकित्सकों से यही सुना था कि कोरोना का विषाणु ताकतवर नहीं होता। वह उड़कर दूर तक नहीं जा सकता। यदि कुछ ही देर में वह मानव-देह के संसर्ग में नहीं आता है, तो उसका खत्म होना तय है। लिहाजा अब यह जानना बेहद जरूरी है कि नया शोध किन मानदंडों पर आधारित है? वैज्ञानिकों का दावा है कि छींक की बूंदें एक बड़े कमरे के आकार जितने क्षेत्र में फैल कर आसानी से लोगों को संक्रमित कर सकती हैं। चूंकि अब लोगों ने दफ्तर, फैक्टरी, बाजार, रेस्तरां, धार्मिक स्थलों और नर्सिंग होम आदि में जाना शुरू कर दिया है, नतीजतन कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है। वायरस की ऐसी प्रवृत्ति की पुष्टि होती है कि वह बंद जगहों पर ठहर जाता है और लोगों को बीमार करता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि एक बार छींकने से 40,000 से ज्यादा बूंदें बाहर निकलती हैं, लिहाजा अनुमान लगाया जा सकता है कि कोरोना संक्रमण का प्रसार कितना व्यापक हो सकता है? हवा में संक्रमण उन लोगों को भी सचेत करता है, जो सुबह के समय टहलने, घूमने या जॉगिंग करने सार्वजनिक पार्कों में जाते हैं। सैर करते समय आपको ध्यान नहीं रहता कि बगल से गुजरने वाला कितनी बार खांसा है या वह लगातार खांसता रहा है अथवा उसका सांस किस दर्जे का संक्रमण लिए है! बहरहाल वैज्ञानिकों और चिकित्सा विशेषज्ञों का इस अनुसंधान के लिए ढेरों आभार प्रकट करते हैं, क्योंकि यह मानवीय जिंदगियों को बचाने का एक पुनीत कर्म है। दुनिया में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1.5 करोड़ को लांघ चुकी है। मौतें भी 5.5 लाख को छू चुकी हैं। भारत में भी संक्रमण का आंकड़ा 7.5 लाख को तो पीछे छोड़ चुका है और आठ लाख की संख्या दूर नहीं है। करीब दो माह पूर्व एक बहस के दौरान अधिकतर चिकित्सकों ने ऐसे अनुमानित आंकड़े को खंडित किया था, लेकिन आज का यथार्थ यही है। ऐसे निर्णायक समय में कोरोना वायरस से जुड़ी छोटी से छोटी जानकारी भी बेशकीमती है और वह कारगर साबित हो सकती है। हवा से सावधान और सचेत रहने की जरूरत है। बंद कक्षों से दूर रहें और अपने माहौल को हवादार बनाए रखें। किसी भी शोध और एहतियात को नकारना सेहत के लिए ठीक नहीं होगा, लिहाजा मास्क को लेकर उदासीनता मत बरतिए। कोरोना काल में वही आपको संक्रमित हवा से बचाए रख सकता है।

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