Saturday, November 27, 2021 11:07 PM

फीस के बदले सिर्फ 'हनुमान चालीसा

अंबोटा में तैयार हो रहे जवान; सेना से रिटायर दो पूर्व सैनिक दे रहे नौजवानों को ट्रेनिंग, चार हुए भर्ती

अजय ठाकुर- गगरेट अपने गांव के युवाओं का भविष्य संवारने का जनून भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए दो पूर्व सैनिकों के सिर ऐसा चढ़ा कि गांव के स्कूल का खेल मैदान देखते ही देखते ट्रेनिंग सेंटर बन गया और चार युवा सेना में भर्ती तो हुए ही बल्कि आठ युवा ग्राउंड व मेडिकल टेस्ट पास कर अब लिखित परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। युवा महज सेना के लिए ही तैयार नहीं हो रहे हैं बल्कि ग्यारह युवाओं ने हाल ही में वन विभाग में वन रक्षक की भर्ती का ग्राउंड टेस्ट पास कर लिया है और अब लिखित परीक्षा की तैयारी में जुट गए हैं। दो साल में इन पूर्व सैनिकों के पास प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं की संख्या सौ के करीब हो गई और अब कई युवतियां भी अपनी मंजिल पाने के लिए यहां खूब पसीना बहा रही हैं। ट्रेनिंग के बदले फीस के नाम पर हनुमान चालीसा का पाठ कंठस्थ करवाया जाता है।

उपमंडल गगरेट की ग्राम पंचायत अंबोटा के पूर्व सैनिक गोल्डी ठाकुर सेना में पीटीई इंस्ट्रक्टर थे और जब सेवानिवृत्त होकर गांव आए तो युवाओं को सही दिशा देने में जुट गए। उन्होंने अंबिका अकादमी शुरू की और गांव के युवाओं को सेना, पुलिस व पैरामिल्ट्री फोर्स में भर्ती होने के लिए ग्राउंड ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। कुछ ही समय बाद उन्हें सेना से ही सेवानिवृत्त होकर आए रमन ठाकुर जानी का साथ मिल गया। फिर क्या था देखते ही देखते अंबोटा स्कूल का मैदान ट्रेनिंग सेंटर बन गया और अब यहां हर सुबह युवाओं को कड़ी मेहनत करवाई जाती है। युवक आगे आए तो गांव की युवतियां भी बीएसएफ, सीआरपीएफ व पुलिस में भर्ती होने की तमन्ना लिए यहां आकर ट्रेनिंग कर रही हैं। जाहिर है कि आज के इस भौतिकवादी युग में कोई व्यक्ति ऐसा नहीं जो बिना पैसे के काम करे, लेकिन युवाओं का भविष्य संवारने की ऐसी ललक कि ये पूर्व सैनिक ट्रेनिंग के बदले कोई फीस नहीं लेते। हां, बस यहां आने वाले युवक-युवती को हनुमान चालीस कंठस्थ होना आवश्यक है और हनुमान चालीसा का रोजाना ट्रेनिंग के बाद पाठ भी करवाया जाता है। खुद फुटबाल के बेहतरीन खिलाड़ी रहे इन पूर्व सैनिकों ने गांव की फुटबाल टीम तैयार कर दी जो क्षेत्र में होने वाले फुटबाल टूर्नामेंट अपने नाम कर इस गांव का नाम रोशन कर रही है। कभी इस गांव के युवाओं पर पुलिस मादक द्रव्य पदार्थ अधिनियम के तहत मामले भी दर्ज कर चुकी है लेकिन युवा अब अपना भविष्य संवारने का ही नशा कर रहे हैं।