Sunday, October 25, 2020 07:25 AM

आधुनिकता और इंटरनेट के युग में सिमटने लगा हिंदी लेखकों का दायरा

हिंदी भाषा को आज के दौर में केवल एक औपचारिक भाषा बन कर ही रह गई है। हालांकि हिंदी भाषा को लोग आम बोलचाल में बोलना बेहद पसंद करते हैं, लेकिन आज के युवाओं की बात करें, तो वे हिंदी के बजाय अंगे्रजी भाषा को विशेष तवज्जो देते हैं। हिंदी को केवल एक विषय समझा जाता है। हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित कर दिया गया और हिंदुस्तानी होने में गर्व किया जाता है, लेकिन हिंदी भाषा बोलने में अपमान महसूस किया जाता है। लोग कहते हैं हिंदी नहीं, अंग्रेजी सिखाएंगे और अंग्रेजी सीखेंगे तो कुछ बनकर दिखाएंगे। यही कारण है कि आज के दौर में हिंदी भाषा के लिए पाठकों का रूझान कम देखने को मिल रहा है। इसी को लेकर ‘दिव्य हिमाचल टीम’ ने हिमाचल प्रदेश के साहित्यकारों और पाठकों का हिंदी भाषा के प्रति किस तरह का रुझान है, को लेकर नब्ज उनकी टटोली है।

-हमीरपुर से मंगलेश कुमार की रिपोर्ट

हिंदी को सरकारी कामकाज में ढालने की जरूरत

किताबों से कभी गुजरो तो यूं किरदार मिलते हैं, गए वक्तों की ड्योढ़ी में खड़े कुछ यार मिलते हैं, जिसे हम दिल का वीराना समझकर छोड़ आए थे, वहां उजड़े हुए शहरों के कुछ आसार मिलते हैं…मशहूर शायर और लेखक गुलज़ार साहब द्वारा लिखी ये पक्तियां किताबों की अहमियत और जरूरत बताने के लिए काफी हैं। वहीं अब वक्त के साथ-साथ आधुनिकता और इंटरनेट के इस युग में जहां हिंदी के लेखकों का दायरा सिमटने लगा है।

अब किताबें सिर्फ प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारियों तक ही अपना अस्तित्व बचाती हुई दिखती हैं। पुस्तकालयों में हिंदी साहित्य से जुड़ी किताबें कोई नहीं पढ़ रहा। सिर्फ वरिष्ठ नागरिक व पीएचडी के छात्र ही इनकी मांग कर रहे हैं। अगर हम इंदिरा गांधी राजकीय जिला पुस्तकालय हमीरपुर की बात करें, तो यहां पर हिंदी के लेखकों की किताबों में जरूर कमी आई है। पाठक हिंदी की किताबें पढ़ना पसंद नहीं कर रहे हैं।

जिला पुस्तकालय हमीरपुर में वैश्विक महामारी से पूर्व सुबह से लेकर शाम तक 150 से 200 पाठक स्ट्डी करते थे, जो कि आजकल सुना पड़ा हुआ है। लाइब्रेरी के बहुमंजिला भवन में युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों व बच्चों को बैठने के लिए अलग कैबिन बनाए गए हैं। पुस्तकालय में 39858 पुस्तकें, 15 न्यूज पेपर, 18 मैग्जीन और कई तरह की धार्मिक किताबें मौजूद हैं। इनमें 18 पुराण, वेद, गीता, शिवपुराण, रामायण व महाभारत जैसे धार्मिक ग्रंथ भी लाइबे्ररी की शोभा बढ़ा रहे हैं। लाइब्रेरी में 1555 रजिस्टर मेंबर हैं। इसके अलावा 585 पुरुष, 302 महिलाएं व 15 बच्चे लाइबे्ररी में एक्टिव हैं, जो कि लाइब्रेरी में पढ़ने पहुंचते हैं। लाइब्रेरी में बच्चों के लिए भी काफी किताबें उपलब्ध हैं।

अंगे्रजी माध्यम का सहारा

हमीरपुर से प्रसिद्ध लेखक डा. मनोज डोगरा का कहना है कि पाठकों का हिंदी के प्रति रूझान में कोई कमी नहीं आई है, अपितु उसमें बढ़ोतरी ही हुई है। हालांकि हिंदी साहित्य की किताबें पढ़ने वाले पाठकों में जरूर कमी आई है। कई पाठक इंग्लिश माध्यम की पुस्तकों का सहारा ले रहे हैं। हिंदी को सरकारी कामकाज में ढालने की जरूरत है।

नहीं पढ़ रहे हिंदी साहित्य

जिला पुस्तकालय हमीरपुर की प्रभारी कुसुम कुमारी का कहना है कि लाइबे्ररी में हिंदी लेखकों की किताबों में जरूर कमी आई है। खासकर हिंदी साहित्य की किताबें कोई नहीं पढ़ रहा है। वरिष्ठ नागरिक व पीएचडी के पाठक ही इनकी डिमांड कर रहे हैं। जो पाठक लाइबे्ररी पहुंच रहे हैं, वे ज्यादातर प्रतियोगी किताबों की ही डिमांड कर रहे हैं। पाठक डिमांड के मुताबिक ही लाइबे्ररी में स्टडी कर रहा है।

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