Saturday, August 15, 2020 10:33 PM

मुझे इस देश में मास्क लगाकर आना पड़ा

मृदुला श्रीवास्तव,  मो.-9418539595

व्यंग्य

कोरोना शमशानी के मोबाइल की कॉलर ट्यून घनघनाई। ‘हैलो, ये मुम्बई से कोरोना शमशानी जी बोल रहे हैं?’ ‘जी, बोल रहा हूं। इंटरनेशनल वायरस प्राइवेट लिमिटेड का सीईओ कोरोना शमशानी। जी कहिए।’ ‘जी मैं नेशनल डेली ‘फटीचर टाइम्स’ का एडीटर बालेंदु भटनागर बोल रहा हूं। सर हमारे पेपर में आपके ऊपर एक राइटअप जाना है, उसी सिलसिले में आपके खिसकाव प्लान पर बात करनी थी, अगर आप कुछ समय दें तो।’ ‘अरे अरे क्यों नहीं। मेरे पास आज टाइम ही टाइम है। मेरा आज वीकली ऑफ  है।’ ‘जी, भारत में कैसे आना हुआ, कोई शादी अटैंड करनी थी या मीटिंग वगैरा।’ ‘नहीं नहीं, भारत में दो साल के लिए दरअसल चीन से टूर पर आया हूं।’ ‘जी अच्छा आपका हैडक्वार्टर तो चीन में है न। पर दो साल का टूर? कुछ ज्यादा लंबा नहीं है ये? टूर छोटा होगा तो स्पीडी खिसकाव प्लान से आपकी इमेज भी बैटर होगी। बस इसी मामले में आपके खिसकाव प्लान पर आपसे बात करना चाहता था। दरअसल कोई और आपसे बातें करते हुए डर रहा था तो मैंने कहा शमशानी जी कोई होव्वा थोड़े ही हैं। फिर आपका ये स्टे मुझे कुछ लंबा लगने लगा तो सोचा मैं खुद ही आपसे बात करूं। आप फिर इतनी बड़ी कंपनी के सीईओ हैं। हम सोचते हैं कि जैसे हम अपने दफ्तरों में पूरे साल के प्लान बनाते हैं तो आप से भी जानें कि आपके सरवाइवल की अवधि क्या है? आप भी तो किसी पर्पस से ही चीन से चले होंगे।’

‘भटनागर जी, मेरा खिसकाव प्लान लॉंग टर्म का है। यू नो, रिजल्ट्स भी बेहतर ही आ रहे हैं। एक दिन में एक लाख कोरोना पॉजिटिव, आपको भी तो फिर खबरें चाहिएं। इसलिए आप अखबार वाले बस खबरें भुनाइए। और कोरोना पर अपनी खबरों की रोटियां सेंकिए।’ ‘देखिए भटनागर जी हमने अपने अराइवल की योजना तो बनाई थी। खिसकाव की योजना दूसरी पार्टी यानी आप लोगों पर निर्भर करेगी। यूं कहें कि गेंद अब आपके पाले में है। मूल मंत्र वही है दिल मांगे मोर।’ ‘जी जी’ – भटनागर जी बोले। ‘डोंट वरी सर । फिर आपने ठीक कहा आपका ठहराव ही हम अखबार वालों का सरवाइवल है। यूं भी कोरोना लॉकडाउन के चक्कर में हमारी नैया डूबी सी हुई है। आधे स्टाफ  को निकालना पड़ा, पर आपकी खबरें तगड़ी-तगड़ी मिल रही हैं तो हेडलाइन्स भी कितने बड़े-बड़े फॉन्ट में लग रही है तो हमारी भी रोजी-रोटी चलती रहेगी। हमारा अखबार अब दो साल के लिए घोड़े की तरह भागेगा। अच्छा छोडि़ए ये सब, और सुनाइए, सर क्या चल रहा है? आपकी कंपनी की मरण मारण ग्रोथ की शेयर मार्किट तो आजकल पीक पर है। आप वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं या साइट पर भी जाते हैं? लॉकडाऊन में भी?- भटनागर जी ने बात को बदलते हुए कहा। ‘अरे नहीं नहीं भटनागर जी- कोरोना शमशानी ठहाका लगाते हुए बोले। ‘आपकी आवाज कुछ साफ  नहीं आ रही है। थोड़ा अपना मुंह मोबाइल से चिपका लीजिए। ‘अब ठीक है? ’ – भटनागर जी ने पूछा। ‘हां अब ठीक है। हां, तो आपने पूछा क्या चल रहा है तो जनाब आजकल फॉग नहीं बस अपना ही टाइम चल रहा है। हर व्यक्ति दिनभर में कम से कम 50 बार कोरोना बोल ही देता है। जिधर देखो कोरोना। यहां तक कि लोगों ने कोरोना बर्फी तक घरों में बना डाली। …आज तो मेरा वीकली ऑफ  है। मेरी पत्नी कोविदाबानो, जो मेरी ही कंपनी में मेरी ही सहकर्मी भी हैं, अपनी ड्यूटी पर ‘अनाज मंडी गई हुई हैं। मैंने कहा, आज तुम उधर का ट्रिप करो। दस में से एक भी मास्क लगाए मिलेगा तो छोड़ना मत, चिपट जाना नाक में। आसान रहेगा संक्रमित करना। 3000 का एक दिन का टारगेट है उसका। और 300 को मारने का।’ ‘और आपका?’ भटनागर जी तपाक से पूछ बैठे। ‘अरे भटनागर जी कुछ तो सीक्रेट रहने दीजिए। क्या सारे पत्ते खुलवा देंगे।’ ‘जी, अच्छा छोडि़ए -भटनागर जी उत्तर में बोले।

फिर बोले-‘अच्छा अपना प्रेजेंट स्टेटस तो बताइए।’ ‘व्हाट डू यू मीन बाई स्टेटस। ये तो बहुत ब्रॉड टर्म है। और रही बात परिचय की तो मेरा तो एरिया और स्कोप ऑफ  वर्क ही बहुत वास्ट है। क्या परिचय दूं आपको। अब देखिए न, अब जब यह क्लीयर नहीं है कि आप मेरे पूर्वजों का स्टेटस जानना चाहते या कि ये कि मेरे वार्डरोब में कितने पैंट कमीज है। इसका या आप मेरे चीन देश का स्टेटस जानना चाहते हैं या मेरे घर का। मेरे कार्यक्षेत्र का या मेरी गली का। मेरी पत्नी की ससुराल का या मेरी ससुराल का…?’ तो क्या उत्तर दूं आपको। अपना प्रश्न ठीक कीजिए। शमशानी जी कुछ तीखे से होकर बोले। ‘जी, जी समझा। दरअसल आप बताएं कि आपकी इस देश से खिसकने की योजना क्या है। और आपका उद्भव और विकास कैसे हुआ और दरअसल आपकी मंशा क्या है? ‘अच्छा, समझ गया आप मेरी कलई खुलवाना चाहते हैं। चलिए पहले आपको बता ही दूं कि मेरे दरअसल कोई पूर्वज नहीं हैं। मेरे जैसे कई वायरस पहले इस दुनिया में आए और चले गए, पर वे मेरे गोत्र के नहीं थे। मैं खुद ही अपना गोत्र हूं और अपना पूर्वज भी मैं खुद ही हूं। माय अल्टीमेट प्लान इज ‘दिल मांगे मोर अरे वहीं मरण मारण।’ ‘जी, ठीक है। नोटेड। पर आपने अपनी पत्नी की बात की। क्या आपकी पत्नी-बच्चे भी हैं?’      -क्रमशः

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