Friday, October 30, 2020 04:37 AM

कहीं कोरोना की भेंट न चढ़ जाए कांगड़ा की रामलीला

महामारी के चलते धार्मिक आयोजन पर बना संशय, मुंह पर मास्क लगाकर कैसे किया जाए किरदारों का मंचन

रामलीला में प्रतियोगिताओं के सहारे भारतीय संस्कृति को जिंदा रखने की जो कवायद पिछले सालों में यहां शुरू हुई थी उस पर भी इस बार संशय है। दरअसल कोरोना महामारी के चलते  रामलीला के मंचन पर सवाल उठ रहा है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने  भीड़ इकट्ठा होने वाले कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाया है। ऐसे में  रामलीला के मंचन पर संशय है । रामलीला कमेटी कांगड़ा के प्रधान अजय वर्मा का कहना है कि  प्रशासन से मंजूरी लेने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन लगता नहीं  कि प्रशासन कांगड़ा में रामलीला की मंजूरी दे।

वैसे भी मुंह पर मास्क लगाकर रामलीला में किरदार निभाना असंभव है। आज कोरोना महामारी के चलते  कांगड़ा में राम लीला के मंचन पर सवाल उठ रहा है तो कभी 80 के दशक में कांगड़ा में दो-दो रामलीला हुआ करती थी। नगर परिषद मैदान कांगड़ा के अलावा बहुतकनीकी संस्थान के ग्राउंड में भी रामलीला का मंच सजा करता था। तब स्थानीय कलाकार रामलीला का मंचन करते रहे, लेकिन पिछले सालों से कृष्ण नगरी वृंदावन से आए कलाकारों ने हालांकि कांगड़ा में रामलीला का मंचन कर माहौल को भक्तिमय बनाने की कोशिश की थी। बावजूद इसके भीड़ उतनी  नहीं उमड़ पाई।

लिहाजा आयोजकों को रामायण प्रतियोगिता का सहारा लेना पड़ रहा था। इस प्रतियोगिता में रोजाना बच्चों से रामायण से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं और सही जवाब देने वाले को इनाम दिया जाता था। जहां तक रामलीला के मंचन का सवाल है तो पहले यह अभिनय स्थानीय लोग ही किया करते थे, लेकिन मौजूदा समय में नई पीढ़ी के बच्चों की दिलचस्पी  खत्म होने के कारण रामलीला सभा को रामलीला के मंचन के लिए कलाकार वृंदावन से बुलाने   पड़े थे। दीगर है 21 कलाकारों की यह टीम पूरे भक्ति भाव के साथ रामलीला का मंचन करती रही है। उल्लेखनीय है कि टीवी और इंटरनेट ने बच्चों के कदम रामलीला मैदान  से पीछे खींच लिए तो रामलीला में युवाओं की भीड़ कम हुई। पहले लोग खुद रामलीला देखने आते थे  लेकिन पिछले सालों में उन्हें लुभाने के लिए रामलीला आयोजकों को इनामी प्रतियोगिताओं का सहारा लेना पड़ रहा था।

अस्सी के दशक में शहर में  दो रामलीला हुआ करती थी लेकिन आज नगर परिषद मैदान कांगड़ा में होने वाली एक अदद  रामलीला को जारी रखने के लिए रामलीला सभा को भरसक प्रयास करने पड़ रहे थे। लोग रामलीला सभा को साधुवाद इसलिए देते हैं कि मौजूदा हालातों में सभा ने वर्षों पुरानी परंपरा को जीवित रखे रखा। रामलीला सभा कांगड़ा के प्रधान अजय वर्मा का कहना है कि वह बरसों पुरानी परंपरा को जीवित रखने के लिए हर संभव कोशिश करते रहें है। लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते कुछ नहीं कहा जा सकता ।क्योंकि प्रशासन के आदेश अनुसार 100 से ज्यादा की भीड़ इकट्ठी नहीं की जा सकती दूसरा मुंह पर मास्क लगाकर रामलीला में किरदार नहीं निभाया जा सकते हैं। ऐसे में रामलीला पर संशय है।

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