Saturday, August 15, 2020 03:49 PM

कर्ज में डूबी हिमाचल सरकार को 952 करोड़ की सौगात

शिमला – प्रदेश को केंद्र सरकार से रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट के रूप में 952 करोड़ रुपए मिले हैं। हिमाचल को यह किस्त मिल गई है, क्योंकि इस पूरे वित्त वर्ष में प्रदेश को केंद्र सरकार की ओर से लगभग 11 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि दी जाएगी उसमें से जुलाई की यह किस्त है। हिमाचल प्रदेश के बजट के हिसाब से खर्चे पूरा करने के लिए जो गैप रहता है, उसकी भरपाई केंद्र सरकार रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट के रूप में करती है। इस किस्त के मिलने का इंतजार किया जा रहा था, जिसके मिलने से अब लोन कुछ दिन के लिए टल जाएगा। आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रही जयराम सरकार के लिए यह राजस्व घाटा अनुदान की किस्त संजीवनी की तरह है, क्योंकि कोरोना काल में इस समय सरकार की वित्तीय हालत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है। हाल ही में सरकार ने 800 करोड़ रुपए के लोन की वापसी की है, जिसके बाद उसके पास पैसा नहीं बचा था। बता दें कि 15वें वित्तायोग की सिफारिश पर यह अनुदान हिमाचल को मिला है, जो अभी साल भर मिलना है। जुलाई में राजस्व घाटा अनुदान के एवज 952 करोड़ की रकम सरकार के खजाने में आ गई है। राजस्व घाटा अनुदान की राशि खजाने में आने से सरकार को कर्मचारियों व पेंशन भोगियों को भुगतान में सुविधा होगी। अभी जीएसटी में हिस्से के एवज प्रदेश को केंद्र से रकम मिलनी है। वित्त विभाग के प्रधान सचिव प्रबोध सक्सेना ने राजस्व घाटा अनुदान की राशि मिलने की पुष्टि की है।

प्रदेश का राजस्व संग्रहण घटा

कोरोना संकट काल में प्रदेश का राजस्व संग्रहण घट गया है। वित्तीय माहिरों के अनुमान के मुताबिक रकम खजाने में न आने से सरकार को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लिहाजा सरकार की तमाम उम्मीदें 15वें वित्तायोग द्वारा प्रदेश को चालू माली साल के लिए मंजूर की गई 11431 करोड़ की राजस्व घाटा अनुदान की राशि पर टिकी हैं। केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई तक चार समान किस्तों में 952 करोड़ की रकम प्रति माह अब तक जारी की है। इस तरह अप्रैल से जुलाई तक केंद्र से प्रदेश को 3808 करोड़ की रकम राजस्व घाटा अनुदान के तौर पर मिल चुकी है। अनुदान की इस राशि से सरकार किसी तरह काम चला रही है।

कर्मचारियों के वेतन-भत्तों के भुगतान के लिए 13099.47 करोड़ की दरकार

प्रदेश सरकार को चालू वित्त वर्ष में कर्मचारियों के वेतन व भत्तों के भुगतान के लिए 13099.47 करोड़ की रकम की दरकार है। इसके अलावा 7266 करोड़ की रकम पेंशन भोगियों के पेंशन के लिए चाहिए। कर्जों पर ब्याज की अदायगी पर सरकार को इस साल 4931.92 करोड़ की रकम खर्च करनी है, लेकिन कोरोना संकट काल में आर्थिक गतिविधियों के रफ्तार न पकड़ने की वजह से जीएसटी संग्रहण के अलावा वैट राजस्व में भी पिछले साल के मुकाबले कमी आई है। फिलहाल इस महीने सरकार का वित्तीय संकट कुछ हल हो गया है। सरकार के घाटे के निगम व बोर्ड भी पैसा मांग रहे हैं, जिन्हें भी उसे देखना है।

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