Saturday, September 19, 2020 09:31 PM

कीचड़ उछालने की राजनीति

आज सरकारी, सामाजिक, राजनीतिक और कोरोना संबंधी तमाम खबरों को छोड़ कर दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत पर बात करेंगे। यह मानवीय मुद्दा भी है और इसमें साजिश के सुराग भी छिपे हैं। सुशांत पूरे देश का चहेता बेटा और प्रिय, होनहार अभिनेता था। उसकी मौत और मानसिक बीमारी की तमाम थ्योरियां सवालों के घेरे में हैं। महाराष्ट्र पुलिस ने आनन-फानन में सुशांत की मौत को ‘आत्महत्या’ और ‘अवसाद का नतीजा’ करार कैसे दे दिया? ऐसे ढेरों सवाल अनुत्तरित हैं, जबकि उनकी मौत को करीब दो माह बीत चुके हैं। आश्चर्य है कि महाराष्ट्र पुलिस सुराग के किसी निष्कर्ष को छू तक नहीं सकी है, आखिरी सच तो बहुत दूर की कौड़ी है। सुशांत की मौत सामान्य हादसा नहीं है, हालांकि मुंबई तो हादसों का ही शहर है। यह ऐसा मामला है, जिसकी जांच महाराष्ट्र और बिहार पुलिस अपने-अपने स्तर पर कर रही हैं। कोई समन्वय और सहयोग नहीं। बेशक महाराष्ट्र सरकार और पुलिस अधिकार-क्षेत्र के कुछ भी दावे करती रहें। जांच सीबीआई ने भी शुरू कर दी है। मोटी राशि के गोल-गपाड़े के मद्देनजर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी धन-शोधन के कोण से जांच कर रहा है।

 सबसे अहम यह है कि सर्वोच्च न्यायालय में, इस संदर्भ में ही, कुछ याचिकाएं विचाराधीन हैं। इतना कुछ होने के बावजूद शिवसेना ने सुशांत से जुड़े मानवीय रिश्तों का मजाक उड़ाने और उन पर कीचड़ उछालने की राजनीति और हरकतें जारी रखी हैं। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में यह तक छाप दिया है कि सुशांत के पिता ने दूसरी शादी कर ली थी, लिहाजा बाप-बेटे के संबंध बिगड़ गए थे। सुशांत की मां का कई साल पहले देहावसान हो चुका है। यह अनर्गल सच भी स्थापित करने की कोशिश जारी रही है कि सुशांत के अपनी बहनों के साथ रिश्ते भी अच्छे नहीं थे। इन बकवासों और दुष्प्रचार का जवाब कौन देगा? सुशांत तो अब इस दुनिया में नहीं हैं। कमोबेश किसी मृत व्यक्ति से जुड़ी मानवता, नैतिकता और संवेदनशीलता पर तो विचार करना चाहिए। शिवसेना सांसद संजय राउत को किस अभियान पर लगाया गया है? कीचड़ उछाल कर शिवसेना को आखिर हासिल क्या होगा? रिया के पक्ष में एक राजनीतिक पार्टी का इस तरह कूदना आश्चर्यजनक लगता है! शायद यह इसीलिए किया जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के मंत्री-पुत्र आदित्य ठाकरे का नाम इस केस में उछल रहा है। सच तो जांच एजेंसियां ही सत्यापित करेंगी। बहरहाल ईडी फिलहाल सुशांत की प्रेयसी रही रिया चक्रवर्ती और उसके परिवार की भूमिकाओं को खंगाल रहा है। रिया इस कांड की मुख्य पात्र है।

आरोप सुशांत के पिता के हैं और बेहद गंभीर हैं। उनसे सुशांत की मानसिक बीमारी और मौत के तार जुड़े हैं। सुशांत के पास जो भी संपदा शेष थी, उसका कानूनी हकदार उनके पिता ही हैं, क्योंकि सुशांत अविवाहित थे। आरोप 15 करोड़ रुपए गबन और हेराफेरी के हैं। हालांकि अभी तक रिया के बैंक खातों में कोई मोटा लेन-देन ईडी को नहीं मिला है, लेकिन रिया की घोषित आमदनी के अनुपात में कई गुना ज्यादा और सवालिया धन जरूर पाया गया है। उसके जवाब रिया और उसके भाई, पिता को देने होंगे। ईडी ने रिया की आमदनी और मुंबई जैसे महानगर में संपत्तियों की खरीद के लिए धन के स्रोत पूछे हैं। यह भी जानना चाहा है कि सुशांत का क्रेडिट कार्ड और बैंक खातों को इस्तेमाल करने का कोई अधिकार-पत्र रिया के पास है? सुशांत के फिक्स डिपॉजिट में से 2.65 करोड़ रुपए कहां गए? दरअसल पैसे की हेराफेरी से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है-सुशांत का पिता और बहनों से संवाद की कड़ी का टूटना…! अभिनेता के पापा का रिया के नाम एक व्हाट्स एप संदेश भी सामने आया है-जब तुम जानती हो कि मैं सुशांत का पापा हूं, तो तुमने बात क्यों नहीं की? एक और तथ्य उद्घाटित हुआ है कि सुशांत की मौत के बाद रिया ने फिल्म के दो नामी निर्माता-निर्देशकों से मदद मांगी थी कि नेगेटिव प्रचार बंद कराया जाए! रिया ने ही देश के गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिख कर आग्रह किया था कि इस केस को सीबीआई को जांच के लिए दिया जाए। अब सीबीआई के पास भी जांच है, तो रिया उससे भाग क्यों रही है?  दरअसल ज्यादातर सवाल रिया से ही पूछे जा रहे हैं, क्योंकि उसका किरदार ही संदिग्ध है। बहरहाल अब उम्मीद एजेंसियों से ही की जानी चाहिए कि वे सुशांत को न्याय दिलवा सकेंगी।

The post कीचड़ उछालने की राजनीति appeared first on Himachal news - Hindi news - latest Himachal news.