Tuesday, September 29, 2020 09:31 PM

कितनी कारगर ऑनलाइन एजुकेशन

कोरोना महामारी से जंग के बीच हुए लॉकडाउन ने शैक्षणिक संस्थानों को भी पूरी तरी तरह लॉक कर दिया है। स्कूल-कालेज-विश्वविद्यालयों के भवनों पर ताला लटक गया है। अब शिक्षकों के पास छात्रों से रू-ब-रू होने का कोई तरीका है, तो वह है ऑनलाइन एजुकेशन। ऐसे हालात के बीच लाखों का एकमात्र सहारा था, तो वह थी ऑनलाइन एजुकेशन। बंद कमरों में छात्रों को पढ़ाई के साथ जोड़ रही ऑनलाइन शिक्षा हिमाचल में कितनी कारगर साबित हुई…। कितने जुड़े,  कितने पिछड़े… दखल में अहम पहलुओं के जरिए बता रहे हैं शिमला से प्रतिमा चौहान के साथ पालमपुर से जयदीप रिहान और सोलन से मोहिनी सूद….

लॉकडाउन के बीच सरकारी व निजी स्कूलों के लिए ऑनलाइन स्टडी ही एकमात्र सहारा था। प्रदेश में कोविड के हिमाचल में दस्तक देते ही 24 मार्च को शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया था। इसके साथ ही सरकारी स्कूल भी पूरी तरह बंद हो गए थे। ऐसे में सरकार के आदेशों के बाद समग्र शिक्षा विभाग की सहायता से शिक्षा विभाग ने 16 अप्रैल को ‘हर घर बने पाठशाला’ की लांचिंग की। इसके तहत सरकारी स्कूलों के छात्रों की घर पर बैठकर ऑनलाइन स्टडी शुरू करने का काम शुरू हुआ। तभी से टीवी पर भी छात्रों की ऑनलाइन स्टडी शुरू हो गई थी। इस तरह शुरुआती दौर में ऑनलाइन पढ़ाई में प्राइवेट स्कूलों से आगे सरकारी स्कूल चल रहे थे। हालांकि  15 मई के बाद जब स्कूलों में छुट्टियां घोषित की गईं, तो सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए ऑनलाइन स्टडी भी बंद करवा दी गई। यानी 15 मई से लेकर अभी तक सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले साढ़े आठ लाख छात्रों की पढ़ाई खतरे में है। वहीं, अब निजी स्कूलों का ग्राफ ऑनलाइन स्टडी में सरकारी स्कूलों से कहीं ज्यादा आगे बढ़ गया है। फिलहाल अब 15 मई से सरकारी स्कूलों के छात्रों की पढ़ाई राम भरोसे है। हालांकि इस बीच जनजातीय क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों के शिक्षक जरूर आगे आ रहे हैं। उन्होंने लॉकडाउन के बीच ऐसी मिसाल पेश की है, जिसमें  घर पर जाकर छात्रों को नोट्स भिजवाए जा रहे हैं।  अगर बात करें की लॉकडाउन के बीच ऑनलाइन स्टडी छात्रों के लिए कितनी फायदेमंद रही, तो इसका जवाब यही रहेगा कि कहीं न कहीं ऑनलाइन माध्यम ही था, जिसने छात्रों को उनकी पढ़ाई के साथ जोड़े रखा। सरकार का तर्क है कि ऑनलाइन स्टडी पर्मानेंट सॉल्यूशन नहीं है। हालांकि फिर भी सरकार व शिक्षा विभाग का दावा है कि आने वाले समय में ऑनलाइन स्टडी को और भी बेहतर बनाया जाएगा, वहीं इंटरनेट समस्या भी दूर की जाएगी। प्रयास किया जाएगा कि हर छात्र को आगामी दिनों में भी ऑनलाइन स्टडी के साथ जोड़ा जाए। सरकार व शिक्षा विभाग की योजना है कि स्कूलों में बनाई गई आईसीटी लैब का इस्तेमाल ऑनलाइन पढ़ाई को सफल बनाने के लिए किया जाएगा।

सरकारी संस्थानों में छुट्टियों के बाद सब बंद

15 मई के बाद स्कूल-कालेजों में अवकाश घोषित होने के बाद सरकारी संस्थानों में ऑनलाइन स्टडी नहीं चल रही। विभागीय जानकारी के अनुसार राज्य के 500 सरकारी स्कूल ऐसे होंगे, जहां कुछेक शिक्षक ही व्हाट्सऐप के जरिए छात्रों को पढ़ा रहे होंगे। दरअसल पहले 70 प्रतिशत छात्र ऑनलाइन स्टडी से जुड़ गए थे, लेकिन छुट्टियां घोषित होने के बाद यह ग्राफ बहुत नीचे आ गया है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार 15 मई से पहले जब सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई चल रही थी, तो उस समय 96 प्रतिशत शिक्षकों ने ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से छात्रों को पढ़ाना शुरू किया था, लेकिन जैसे ही सरकार ने छुट्टियों में ऑनलाइन कक्षाएं लगाना जरूरी नहीं किया, तो उसके बाद शिक्षकों ने छात्रों से ऑनलाइन पढ़ाई से किनारा कर दिया।

यूनिवर्सिटी कालेज में ऑनलाइन शिक्षा नहीं

कालेज व यूनिवर्सिटी की बात करें, तो 129 डिग्री कालेजों में ऑनलाइन पढ़ाई अनिवार्य नहीं की गई है। ऐसे में ऑनलाइन स्टडी कालेजों में तो बिल्कुल ही ठप है। इसी तरह विश्वविद्यालय में भी शिक्षक अपने लेवल पर छात्रों से व्हाट्सऐप व ऑडियो-वीडियो के माध्यम से अपने लेवल पर पढ़ा रहे हैं। सरकार की ओर से किसी भी तरह के कोई सख्त आदेश जारी नहीं हुए हैं कि विश्वद्यिलय के छात्रों को अनिवार्यता के रूप में ऑनलाइन पढ़ाया जाए।

40 प्रतिशत छात्र पढ़ाई से कोसों दूर

शिक्षा विभाग के अनुसार प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 40 प्रतिशत छात्रों के अभिभावक ऑनलाइन स्टडी से बिल्कुल भी नहीं जुड़े। यानी कि ये वे अभिभावक हैं, जो गरीब तबके के हैं या जिनके पास स्मार्टफोन नहीं हैं। वहीं, राज्य के कई ऐसे भी ग्रामीण क्षेत्र हैं, जहां इंटरनेट सुविधा नहीं है। इस वजह से उन क्षेत्रों के छात्र व अभिभावक ऑनलाइन स्टडी के बारे में कोई भी विचार तक नहीं कर रहे हैं। हालांकि 15 मई से पहले सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन स्टडी में साढ़े आठ लाख में से छह लाख छात्र ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से कनेक्ट होकर कक्षाएं लगा रहे थे। निजी स्कूलों की ऑनलाइन स्टडी का भी यही हाल है, ऑनलाइन व्हाट्सऐप ग्रुप के साथ सभी अभिभावकों को जोड़ा तो गया है, लेकिन यहां भी 60 प्रतिशत तक ही छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई तय शेड्यूल से हो पा रही है। छोटे बच्चों की आंखें खराब न हो जाएं, इसीलिए निजी स्कूल के अभिभावक भी अपने बच्चों को ऑनलाइन स्टडी से दूर रख रहे हैं।

कनेक्टिविटी में भी दिक्कत है…

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे भी अभिभावक हैं, जो गरीब तबके से हैं और उनके पास स्मार्टफोन तक नहीं हैं। ऐसे में दूरदराज के क्षेत्रों के सरकारी स्कूल के छात्र ऑनलाइन स्टडी से बिल्कुल ही वंचित हैं। दिक्कतों की अगर बात करें, तो कई छात्र ऐसे भी हैं, जिन्होंने 24 मार्च के बाद पढ़ाई ही नहीं की है। किताबें तो हैं, लेकिन छात्रों को पढ़ाने वाला कोई नहीं है। फिलहाल ज्यादातर सोलन, सिरमौर, चंबा, पांगी, नाहन के ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी न होने से छात्र ऑनलाइन स्टडी से वंचित रह रहे हैं।

‘समय 10 से 12 वाला, हर घर बने पाठशाला’

इस अभियान के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के करीब डेढ़ लाख विद्यार्थी विभिन्न कक्षावार व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ चुके हैं। ई-कंटेंट शेयर करने के लिए बनाई माइक्रो वेबसाइट पर भी 15 लाख से ज्यादा लोगों ने क्लिक कर देखा है। इन कक्षाओं के विद्यार्थियों को फिलहाल व्हाट्सऐप ग्रुप और वेबसाइट से ही ई-कंटेंट भेजा जाएगा। जिन बच्चों के अभिभावकों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, उन्हें टेक्स्ट मैसेज से होमवर्क मिलेगा। इस अभियान के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के करीब डेढ़ लाख विद्यार्थी विभिन्न कक्षावार व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़ चुके हैं। जिन बच्चों के अभिभावकों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, उन्हें टेक्स्ट मैसेज से होमवर्क मिलेगा।

डिजिटल स्टडी से जुड़ेगा हिमाचल का हर छात्र

आशीष कोहली

निदेशक, समग्र शिक्षा विभाग से बातचीत के अंश

ऑनलाइन एजुकेशन की कमजोरियां — ऑनलाइन शिक्षा को कई साल बाद सरकारी स्कूलों में शुरू किया गया। इसके बेहतर परिणाम मिले हैं। मेरा मानना है कि इस बार जो कमजोरियां हमारी रही हैं, वे सिर्फ कई क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधा न मिलना है। प्रयास किया जाएगा कि आगामी दिनों में इंटरनेट सुविधा फिर शुरू की जाए।

शिक्षक के लिए छात्र पर नजर रखना असंभव है – यह सच है कि ऑनलाइन स्टडी से शिक्षक सभी छात्रों पर नजर नहीं रख सकते, लेकिन फिर भी ऑनलाइन स्टडी से यह जरूर कोशिश रहती है कि सभी के साथ कनेक्टिड रहा जाए।

टेस्ट व परीक्षा ऑनलाइन लेना चुनौती— साढ़े आठ लाख छात्रों के ऑनलाइन टेस्ट व परीक्षा लेना इस वजह से मुश्किल है, क्योंकि सभी छात्रों के पास स्मार्टफोन नहीं होते, तो कई बार सभी जगह इंटरनेट कनेक्टिविटी होना भी मुश्किल है।

कटघरे में खड़े नहीं किए प्राइवेट स्कूल—  निजी स्कूलों को कटघरे में खड़ा नहीं किया गया, बल्कि ऑनलाइन स्टडी प्राइवेट स्कूलों की भी बेहतर रही है। रही बात सरकारी स्कूलों की, तो लॉकडाउन के बीच शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन स्टडी में सफलता प्राप्त की है, कुछ ही दिनों में 70 प्रतिशत छात्रों और 96 प्रतिशत शिक्षकों को ऑनलाइन स्टडी के साथ जोड़ा गया। ऐसा नहीं है कि सरकारी स्कूलों के छात्रों को पढ़ाया नहीं जा रहा है। अभी भी शिक्षक छुट्टियां होने के बावजूद छात्रों को पढ़ा रहे हैं। यह बात और है कि छुट्टियां घोषित होने के बाद शिक्षकों को रोज होमवर्क भेजने के लिए बाध्य नहीं किया गया है।

ऐसे दूर होंगी ऑनलाइन एजुकेशन की खामियां —  ऑनलाइन स्टडी में अब जो कमियां रही हैं, उन्हें दूर करने का प्रोसेस शुरू कर दिया है। हर छात्र तक डिजिटल स्टडी पहुंचाई जाएगी। इसके साथ ही स्कूलों में बनाई गई आईसीटी लैब का भी इस्तेमाल अब ऑनलाइन स्टडी के लिए किया जाएगा। वहीं, शिक्षक भी स्टडी को लेकर नई तकनीक सीख सकें, इसके लिए उन्हें ऑनलाइन कक्षाओं की ट्रेनिंग दी जाएगी।

….मोबाइल बिगाड़ रहा मानसिक संतुलन, आंखें भी हो रही खराब

चिकित्सकों का कहना है कि ऑनलाइन स्टडी और गेम के लिए ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करने से छोटे बच्चों का मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है। इसके साथ ही छोटे बच्चों की आंखो में स्ट्रेस हो रहा है। आईजीएमसी के एमएस डा. जनक राज ने बताया कि ज्यादा मोबाइल देखने से छात्रों की आंखो की रोशनी खत्म होने का भी खतरा रहता है। ऐसे में जरूरी है कि पूरा दिन मोबाइल छोटे बच्चों को न दें। हर तीन घंटे बाद कुछ देरी के लिए अपनी आंखों को बंद करें और ठंडे पानी से धोएं। डा. के अनुसार एक-दो घंटे बाद फ्रेश हवा में भी घुमें, ताकि आंखों की रोशनी कम होने का खतरा न रहे। चिकित्सक कहते हैं कि अगर पूरा दिन ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल किया जाता है, तो ऐसे में छोटी उम्र में छात्रों को चश्मे तक भी लग सकते हैं।

बड़े स्तर पर कोई विरोध नहीं

ऑनलाइन स्टडी से भले ही अभिभावकों को अपने बच्चों की आंखे खराब रहने का खतरा रहता हो, लेकिन लॉकडाउन के बीच अभिभावकों ने ऐसा कोई विरोध नहीं किया कि सरकार या विभाग के  खिलाफ मोर्चा खोला हो। अभिभावकों को भी पता है कि इस वायरस से अपने बच्चों को बचाने के लिए अभी स्कूलों में छात्रों को भेजना किसी खतरे से खाली नहीं है।

लाहुल-स्पीति और काजा ने पेश की मिसाल, घर तक पहुंचाए नोट्स

लॉकडाउन व अनलॉक-टू में लाहुल-स्पीति और काजा के शिक्षकों ने दूसरे जिलों से बेहतर मिसाल पेश की है। एक तरफ दूसरे जिलों में ऑनलाइन स्टडी से छात्रों को पढ़ाया जा रहा था, तो वहीं लाहुल व काजा में इंटरनेट सुविधा न होने से शिक्षक छात्रों के घर-घर पहुंचकर नोट्स पहुंचा रहे थे। काजा और लाहुल के शिक्षकों ने लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी छात्रों की स्टडी नहीं छोड़ी और अभी भी घर-घर पहुंचकर छात्रों से संवाद रखा जा रहा है। हालांकि जिन छात्रों को स्मार्टफोन की सुविधा भी है, वहां भी 15 मई के बाद ऑनलाइन स्टडी पूरी तरह बंद है। कई जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में इन अभिभावकों की ऑनलाइन स्टडी राम भरोसे थी, जो नहीं हो पाई। 30 प्रतिशत छात्र ऐसे थे, जो समग्र शिक्षा विभाग के ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के साथ नहीं जुड़ पाए।

कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में 123 विषयों की रेगुलर ऑनलाइन क्लासेज

कोविड-19 के कारण बनीं परिस्थितियों ने अकादमिक कार्यक्रम और नौकरी की संभावनाओं पर अनिश्चितता के कारण युवाओं को एक विचित्र स्थिति में धकेल दिया है। प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय ने छात्रों को वर्तमान शैक्षणिक वर्ष के पाठ्यक्रम कार्य को पूरा करने के लिए तैयार करने और भविष्य के ज्ञान-गहन और प्रौद्योगिकी संचालित कार्य वातावरण के लिए प्रेरित करने की दृष्टि से ऑनलाइन मंच प्रदान करने का प्रयास किया। इसने ग्रामीण कृषि कार्य के अनुभव को जारी रखा। अंतिम वर्ष के कृषि और पशु चिकित्सा के अस्पतालों में पशु चिकित्सा अस्पतालों में इंटर्नशिप और साथ ही साथ उनके डिग्री कार्यक्रमों को समय पर पूरा करने के लिए और साथ ही प्रवेश अधिसूचना जारी की और यूजीसी और आईसीएस कार्यक्रम के अनुसार शैक्षणिक सत्र शुरू करने के लिए ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए गए। 123 स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की नियमित ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित की गईं। विभिन्न विश्वविद्यालयों और संगठनों द्वारा वेबिनार में छात्रों ने भाग लिया। प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में कई प्रशिक्षणों का मूल्यांकन ऑनलाइन माध्यमों से होगा। सत्र 2020-21 में विभिन्न महाविद्यालयों में प्रवेश परीक्षा की डेट कोविड-19 महामारी के कारण बढ़ानी पड़ रही है। स्नातक व स्नातकोतर स्तर की प्रवेष परीक्षा के लिए आवेदन ऑनलाइन प्राप्त किए जा रहे हैं। अब तक करीब 12 हजार आवेदन मिल चुके हैं।

नौणी यूनिवर्सिटी के छात्र भी जुड़े, दे रहे ऑनलाइन परीक्षाएं

लॉकडाउन के दौरान बच्चों के भविष्य के मद्देनजर डा. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी ने हर संभव प्रयास किए। लगातार बच्चों की ऑनलाइन क्लासेज और परीक्षाएं ली जा रही हैं। किसानों, बागबानों के लिए विभिन्न व्हटसऐप ग्रुप बनाए गए हैं, जिसके माध्यम से उन्हें जानकारियां प्रदान की जा रही हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय ने किसानों की समस्याओं को देखते हुए यूएचएफ किसान सेवा नामक एक पेज बनाया गया है, जिसके माध्यम से किसानों की हर संभव सहायता की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी दिवस भी यूनिवर्सिटी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मनाया गया, जिसमें कई तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। कोरोना के खिलाफ निवारक उपाय के रूप में अच्छी गुणवत्ता वाले सेनेटाइजर की बढ़ती मांग को देखते हुए यहां के वैज्ञानिकों ने एक हर्बल मॉइस्चराइजिंग सेनेटाइजर भी तैयार किया है। विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए अपने स्नातक, एमएससी और एमबीए एग्रीबिजनेस कार्यक्रमों के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है।

सरकारी स्कूलों में सिर्फ ऑनलाइन होमवर्क पर फोकस, टेस्ट नहीं

सरकारी स्कूलों में अप्रैल से ऑनलाइन स्टडी तो शुरू हुई, लेकिन छात्रों की पढ़ाई के आकलन की बात करें, तो सरकारी स्कूलों में जो ऑनलाइन स्टडी में पढ़ाया गया, उसके ऑनलाइन टेस्ट नहीं लिए गए, जबकि प्राइवेट स्कूलों में छात्रों के रोज ऑनलाइन टेस्ट हो रहे हैं। सरकारी स्कूलों में केवल ऑनलाइन होमवर्क भेजने पर ही फोकस हुआ।

सरकारी स्कूलों में अब होगी सख्ती

सरकारी स्कूल न खुलने की स्थिति में अब सरकार व शिक्षा विभाग का प्लान है कि 13 जुलाई के बाद फिर से ऑनलाइन स्टडी शुरू की जाएंगी। जी हां! अब ऑनलाइन के साथ ही शिक्षा विभाग छात्रों को घर तक नोट्स भी भिजवाएगा। उच्च शिक्षा विभाग ने साफ हिदायत शिक्षकों को दे दी है। अब हर शिक्षक की जिम्मेदारी होगी कि अपने स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को ऑनलाइन व ऑफलाइन शत-प्रतिशत पढ़ाई करवाएं। इसके साथ ही अब 13 जुलाई के  बाद ऑडियो-वीडियो का माध्यम भी पढ़ाई के लिए अपनाया जाएगा। शिक्षा विभाग का दावा है कि छात्रों की पढ़ाई अब प्रभावित नहीं की जाएगी। विभाग ने शिक्षकोंं को अनिवार्य किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट न होने की वजह से जो छात्र नहीं पढ़ पा रहे थे, उनके घर पर जाकर शिक्षकों को कक्षाएं शुरू करनी होंगी, इसके साथ ही समय-समय पर छात्रों से इंटरेक्शन भी करनी होगी। यही वजह है कि छात्रों की ऑनलाइन स्टडी पर शिक्षकों को सतर्क रहने के आदेश शिक्षा विभाग ने एक बार फिर जारी किए हैं। इसमें शिक्षकों को साफतौर पर कहा गया है कि वे ‘स्वयं सिद्धम पोर्टल’ से कक्षा वाइज छात्रों का मटीरियल उठाएं।

क्या कहते हैं स्पेशलिस्ट

आईजीएमसी के चिकित्सकों का भी मानना है कि ऑनलाइन स्टडी हमेशा के लिए समाधान नहीं है। ऑनलाइन स्टडी की पद्धति को बदलना ही पड़ेगा। ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करने से छोटे बच्चे मानसिक रूप से बीमार तो होते ही हैं, साथ ही उन्हें माइग्रेन और दूसरी बीमारियां भी जल्द जकड़ सकती हैं। इसके अलावा स्टे्रस की वजह से चिढ़-चिढ़ापन भी छोटी उम्र में बच्चों को हो सकता है। पूरा दिन मोबाइल देखते रहने से भूख कम लगना, सिर में दर्द रहना, पूरे शरीर में दर्द रहने जैसी शिकायतें रहेंगी।

पूरा स्टडी मटीरियल शिक्षा पोर्टल पर अपलोड

सरकारी स्कूलों में छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए शिक्षा विभाग ने पूरा स्टडी मटीरियल तैयार किया है। 18 हजार सरकारी स्कूलों के साढ़े आठ लाख छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए कक्षा एक से जमा दो तक पूरा सिलेबस ऑनलाइन एसएसए ने छात्रों के लिए उपलब्ध करवाया। ऑनलाइन स्टडी मटीरियल बनाने के लिए लगभग 250 बीआरसीसी ने समग्र शिक्षा विभाग के साथ मिलकर ऑनलाइन स्टडी मटीरियल तैयार किया, जिसमें ऑनलाइन दीक्षा पोर्टल पर 80000 किताबें कक्षा एक से जमा दो तक के छात्रों के लिए मुहैया करवाई गई हैं। एनसीईआरटी, सीबीएसई का पूरा सिलेबस दीक्षा पोर्टल पर एमएचआरडी ने छात्रों की सुविधा को लेकर डाला है। अगर बात करें तो ई-पाठशाला के वेब पोर्टल पर भी एनसीईआरटी ने 1886 ऑडियो, 2000 वीडियोज़, 695 ई-बुक्स, 504 फिलिप्स बुक्स, ऑनलाइन उपलब्ध करवाई गई हैं। अहम है कि एमएचआरडी ने नेशनल रिपोज़िट्री ऑफ ओपन एजुकेशन रिसोर्सेज पोर्टल पर भी छात्रों के लिए स्टडी मटीरियल डाला है, जिसमें 14527 फाइल डाली गई हैं। वहीं, 401 कलेक्शन, 2779 डॉक्यूमेंट, 1345 इंटरएक्टिव, 1664 ऑडियो, 2586 इमेजिस, 6153 वीडियो अलग-अलग भाषाओं में एमएचआरडी ने डाली हैं। एमएचआरडी ने स्व्यं सिद्धम पोर्टल पर भी जमा एक व दो के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए सिलेबस तैयार किया है।

और कोई ऑप्शन भी नहीं

ऑनलाइन स्टडी इतनी कारगर नहीं है। भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ऑनलाइन स्टडी के इतने सफल प्रयास नहीं रहे हैं। लॉकडाउन की वजह से कई लोगों की नौकरियां चली गई। किसी के पास रिचार्ज करने के लिए पैसे नहीं, ऐसे में ऑनलाइन स्टडी प्रैक्टिकली सफल नहीं हो पाई है

—नरेंद्र सूद, पिं्रसीपल, पोर्टमोर स्कूल

संकट के इस समय में बच्चे पढ़ाई के साथ जुड़े रहे, इसीलिए ऑनलाइन कक्षाएं एक बेहतर ऑप्शन हैं। इससे छात्रों को छुट्टियों में अपने शिक्षकों से संवाद करने का मौका भी मिल रहा है, और थोड़ा बहुत पढ़ाई भी कर पा रहे हैं

— बोबिल ठाकुर, शिक्षक, सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हैली चकटी

ऑनलाइन स्टडी ज्यादा लंबे समय तक कारगर साबित नहीं होगी। बच्चे कक्षाओं में जिस तरह आपस में रू-ब-रू होते थे, शिक्षक भी उनसे सवाल जवाब लेते थे, वह कुछ भी नहीं हो रहा। अभी सिर्फ शिक्षक छात्रों को ऑनलाइन होमवर्क दे रहे हैं, छात्रों पर पूरी तरह से फोकस रखना आसान नहीं है

 —शिव कुमार शर्मा, प्रिंसीपल, बीएसएन स्कूल

ऑनलाइन स्टडी से सिर्फ छात्रों के साथ कनेक्ट रहने का प्रयास किया जा रहा है। जो कक्षाओं में समझाया जा सकता है, वे ऑनलाइन समझाना बहुत मुश्किल है। फिलहाल इस संकट में ऑनलाइन स्टडी का ही माध्यम छात्रों को पढ़ाने के लिए बचा है

—मनदीप राणा, प्रिंसीपल, सरस्वती पैराडाइस स्कूल 

अभिभावक कितने संतुष्ट

पूरा दिन मोबाइल पर गेम खेलने से अच्छा है कि बच्चे ऑनलाइन अपने पढ़ने की क्षमता बढ़ाएं। हालांकि इसके नुकसान भी बहुत हैं, पर इस वक्त और कोई ऑप्शन भी नहीं है

 —कृष्णा देवी

सुबह आठ बजे से बच्चों के निजी स्कूलों से मैसेज आने लगते हैं। पूरा दिन होमवर्क दिया जाता है, इससे घर पर बच्चे व्यस्त रहते हैं। सीखने को भी नई चीजें मिल रही हैं, लेकिन आंखों में दर्द और स्ट्रेस की शिकायतें आ रही हैं। इससे लगता है कि स्कूल लगाना ही बेहतर हैं

—सोनिया रानी

ऑनलाइन स्टडी लॉकडाउन में पढ़ाई का एक अच्छा विकल्प है। भले ही इसके कई दुष्परिणाम भी हैं, पर छुट्टियों में केवल एक यही माध्यम छात्रों की पढ़ाई के लिए बचा है। अभी सरकारी स्कूल में काफी समय से ऑनलाइन स्टडी बंद है

—लक्ष्मी ठाकुर

सरकारी स्कूल में अभी ऑनलाइन स्टडी बंद है। ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान बच्चे घर में थोड़ी देर पढ़ते तो थे। हकीकत यही है कि ऑनलाइन पढ़ाई लंबे समय तक चलाना संभव नहीं है। जो कक्षाओं में छात्र समझते हैं, वे मोबाइल पढ़ाई के दौरान नहीं समझ पाते

—तारा ठाकुर

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