Saturday, September 26, 2020 02:44 PM

कोलडैम की लहरों में तैरेगी ठंडे पहाड़ों की ट्राउट

 बिलासपुर-हिमाचल के ऊपरी ठंडे इलाकों में पलने वाली रेंबो ट्राउट अब कोलडैम की लहरों पर भी तैरते हुए नजर आएगी। ट्राउट पालन के लिए मत्स्य विभाग ने केज कल्चर प्रोजेक्ट का सहारा लिया है, जिसके तहत कोलडैम में कसोल के समीप 24 केज लगा दिए गए हैं। ट्रायलबेस पर शुरू किए जा रहे इस केज कल्चर के सफल रहने के बाद हरनोड़ा से लेकर तत्तापानी तक बड़े स्तर पर ट्राउट उत्पादन किया जाएगा। विभाग की मानें, तो जैसे ही जलाशय का टैंप्रेचर 18 डिग्री सेल्सियस तक आ जाएगा, तो ट्राउट मछली का बीज केज में डाला जाएगा। अभी तक ट्राउट मछली की प्रजाति प्रदेश के ऊपरी इलाकों में ही पल रही है। शिमला, कुल्लू, किन्नौर व चंबा इत्यादि जिलों में ट्राउट पालन किया जा रहा है। मत्स्य विभाग के फार्मों के अलावा निजी क्षेत्र में भी अब बड़े स्तर पर ट्राउट मछली का उत्पादन किया जा रहा है। जब से बिलासपुर, मंडी शिमला व सोलन जिलों को छूने वाला कोलडैम अस्तित्व में आया है, तो विभाग ने भी अपनी गतिविधियां शुरू कर दी हैं, जिसके तहत मत्स्य सहकारी सभाओं के गठन के साथ ही हर साल कार्प प्रजाति की मछली बीज भी जलाशय में डाला जा रहा है। अब विभाग ने कोलडैम में ट्राउट पालन को लेकर भी एक योजना बनाई है, जिसके तहत केज कल्चर प्रोजेक्ट के तहत ट्राउट का ट्रायल किया जाएगा। इस बाबत विभाग ने कोलडैम में कसोल के पास दो दर्जन केज लगा भी दिए हैं।

यहां बता दें कि कोलडैम से लेकर तत्तापानी तक 30 किलोमीटर से ज्यादा एक लंबी झील बन चुकी है, जहां बड़े स्तर पर मछली पालन की संभावनाएं हैं। मत्स्य निदेशक सतपाल मेहता ने बताया कि यदि ट्रायल सफल रहता है, तो कोलडैम में हरनोड़ा से लेकर तत्तापानी तक बड़े पैमाने पर ट्राउट मछली का उत्पादन किया जा सकेगा। इससे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष तौर पर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे। वैसे भी सरकार मत्स्यपालन के जरिए बेरोजगार युवाओं के लिए घरद्वार के पास ही रोजगार के विकल्प खोल रही है। उन्होंने बताया कि विभाग की ऐसी कई योजनाएं हैं, जिनके जरिए बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा। वहीं भाखड़ा डैम में भी विभाग ने केज कल्चर प्रोजेक्ट चलाया है, जिसके तहत पंगेशियस प्रजाति की मछली का बीज तैयार किया जा रहा है। जब मछली का आकार 70 एमएम तक हो जाता है, तो उसके बाद मछली को डैम में डाल दिया जाता है। भाखड़ाडैम में विभाग ने 24 केज लगाए हैं जहां छोटी छोटी मछलियों को रखा जाता है और आकार बड़ा होने के बाद जलाशय में डाल दिया जाता है।

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