Saturday, August 15, 2020 04:43 PM

कोविड संकट में खुद को बचाने में सफल रही ग्रामीण आर्थिकी : मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर

शिमला –कोविड संकट में सिर्फ ग्रामीण आर्थिकी ही खुद को बचा पाई है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए मजबूत आधार उपलब्ध है। यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग से मुख्यमंत्री ग्राम कौशल योजना के लाभार्थियों से कही। उन्होंने कहा कि छह जनवरी को आरंभ की गई यह योजना पारम्परिक हस्तकला, हस्तशिल्प, स्थानीय कलाकृतियों, लकड़ी व धातु शिल्प कलाओं को पुनर्जीवित करने के अतिरिक्त युवाओं को लाभप्रद रोजगार प्रदान करने के लिए है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रशिक्षकों को 7500 रुपए तथा प्रशिक्षणार्थियों को तीन हजार प्रतिमाह प्रदान कर रही है। प्रशिक्षण अवधि का समय तीन माह से एक वर्ष तक निर्धारित किया गया है। प्रत्येक बैच में अधिकतम पांच प्रशिक्षुओं को ट्रेनिंग की अनुमति प्रदान की जाएगी। इससे न केवल न हमारी परंपरागत कलाएं, शिल्प और संस्कृति का पुनरुद्धार होगा, बल्कि युवाओं को स्वरोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने बीते अढ़ाई वर्ष के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए विभिन्न योजनाएं आरंभ की हैं। मुख्यमंत्री एक बीघा योजना कामयाब साबित हुई है, क्योंकि इस योजना के तहत लाभ उठाने के लिए 3500 परिवारों ने अपना पंजीकरण करवाया है। उन्होंने ई-पंचायत में भी प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने के लिए विभाग को बधाई दी। सचिव ग्रामीण विकास डा. संदीप भटनागर ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। निदेशक ग्रामीण विकास ललित जैन ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए योजना की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव डा. आरएन बत्ता व अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।  ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि राज्य सरकार का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण आर्थिकी को पुनर्जीवित करना है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में गहन रुचि रखने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

प्रदेश के 18 ब्लॉक में योजना शुरू

मुख्यमंत्री ग्राम कौशल योजना राज्य के चार जिलों के 18 खंडों में आरंभ की गई है। योजना के अंतर्गत निर्धारित पाठ्यक्रम में काश्तकला, धातु शिल्प, मंडी कलम, पत्थर शिल्प, बांस शिल्प, लकड़ी का शिल्प, चीड़ की पत्तियों के उत्पाद और मिट्टी के बर्तन बनाने का शिल्प आदि शामिल किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर योजना से संबंधित पोस्टर और सूचना पुस्तिका भी जारी की।

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