Friday, September 24, 2021 05:07 AM

लाखामंडल शिव मंदिर

प्रकृति की वादियों में बसा लाखामंडल गांव देहरादून से 128 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यमुना नदी के तट पर है। यह जगह गुफाओं और भगवान शिव मंदिर के प्राचीन अवशेषों से घिरी हुई है। माना जाता है कि इस मंदिर में प्रार्थना करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है। लाखामंडल का शिव मंदिर एक ऐसी प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर है, जो हमें सौभाग्य से मिली है। यह कहना गलत न होगा कि अगर इसे अनदेखा न किया जाता, तो केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के बाद उत्तराखंड में यह तीसरा प्रमुख शिव धाम के नाम से प्रचलित होता। बहरहाल इस मंदिर की खास बात यह है कि यह मंदिर यमुनोत्री से निकलने वाली यमुना नदी के निकट सुंदर और सपाट जगह पर बसा हुआ है और इसके चारों ओर सात ऊंची पहाडिय़ां मानो इसकी रक्षा के लिए पहरा दे रही हों। मंदिर के मुख्य द्वार पर नंदी बाबा विराजमान हैं, तो मंदिर की पिछली दिशा में दो द्वारपाल पहरेदार के रूप में खड़े नजर आते हैं। दो द्वारपालों में से एक का हाथ कटा हुआ है, जो एक अनसुलझा रहस्य सदियों से बना हुआ है।

मंदिर के बिलकुल बराबर में करीब 20 फुट की दूरी पर एक अद्र्धनिर्मित चबूतरा नजर आता है, जिसमें एक विशालकाय शिवलिंग मौजूद है। इस चबूतरे का आकार देखकर ऐसा लगता है कि पांडवों ने यहां भी शायद एक और मंदिर बनाने का प्रयास किया था, लेकिन उसे अधूरा छोड़ दिया, सच क्या है यह अभी भी रहस्य बना हुआ है। एक दिलचस्प कहानी इस शिवलिंग की और भी है। शिवलिंग के पीछे एक शिवलिंग अभी चंद साल पहले ही धरती से बाहर निकला है और यह दुनिया का एक ऐसा अद्भुत शिवलिंग है, जिसे देख कर लोग अचंभित रह जाते हैं, इसमें पानी या दूध डालने से इसकी शाइनिंग इतनी बढ़ जाती है कि यह शिवलिंग दर्पण की तरह चमकने लगता है। कहा जाता है कि लाखामंडल के किसी व्यक्ति को स्वप्र में साधु बाबा यह गुजारिश करते नजर आए कि मैं दलदल मे फंसा हुआ, हूं कृपया मुझे बहार निकाल दो। उस व्यक्ति ने यह स्वप्र सुबह गांव के सभी लोगों को बताया। लोगों ने उसकी बात को गंभीरता से लेते हुए उस जगह को खोदना शुरू किया, तो उन्हें यह शिवलिंग नजर आने लगा। फिर वहां आसपास साफ -सफाई करके पूजा पाठ मंत्रोच्चारण के साथ इस शिवलिंग की आराधना की गई और आज यह शिवलिंग न सिर्फ आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, बल्कि दूर-दूर से लोग इसके दर्शन के लिए यहां आते हैं।