Tuesday, November 30, 2021 08:17 AM

अठारह करोड़ देवी-देवताओं का महामिलन आज

मुहल्ला में शरीक होंगे ढालपुर आए सभी देवी-देवता, रघुनाथ के रजिस्टर में लगेगी हाजिरी

दिव्य हिमाचल ब्यूरो — कुल्लू विश्व के सबसे बड़े देव महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा पर्व में गुरुवार को ढालपुर मैदान पहुंचे सभी देवी-देवता भगवान रघुनाथ जी के अस्थायी कैंप में जाकर हाजरी भरेंगे। यही नहीं, सभी देवी-देवताओं का भगवान रघुनाथ जी के रजिस्टर में बाकायदा एंट्री होने के बाद अठारह करोड़ देवी-देवताओं का देव महामिलन होगा। इस देव महामिलन को मुहल्ला कहते हंै। इसके पश्चात देवी-देवताओं के दशहरा पर्व में गुरुवार को रघुनाथ के दरबार में शक्ति का आह्वान होगा। दशहरा पर्व में इस शक्ति आह्वान को विधिवत रूप से किया जाएगा। मुहल्ला पर्व के लिए सभी देवी-देवताओं ने तैयारियां कर ली हैं। देवी हिडिंबा माता का फूलों का गुछा जिसे (शेश) कहा जाता है मिलने पर ही मुहल्ला पर्व शुरू होगा।

मुहल्ला पर्व में ही देवी-देवता भगवान रघुनाथ जी के रथ पर हाजिरी भरेंगे और रघुनाथ के पुजारी रथ पर बैठकर बाकायदा देवताओं के नाम रजिस्टर में दर्ज करेंगे, लेकिन सबसे पहले हिडिंबा देवी का नाम दर्ज होता है। देवी-देवता राजा की चानणी के पास भी हाजिरी देते हैैं। देवी-देवताओं से लिया गया शेश राज गद्दी पर बिठाए जाएंगे तथा राजा अपनी राजगद्दी को छोड़कर साधारण कुर्सी पर बैठेंगे तत्पश्चात ही शक्ति का आह्वान होता है। इस दौरान परंपरा भी निभाई जाती है। इस दिन लंका पर विजय के लिए शक्ति से रक्षा की अपील की जाती है।

अनूठी परंपरा का संगम है कल्लू का दशहरा

कुल्लू दशहरा पर्व अनूठी परंपरा का संगम है। शेष विश्व में दशहरा पर्व समाप्त होता है तथा कुल्लू में शुरू होता है। इसके पीछे धारणा यह है कि रावण पूर्णिमा के दिन मारा गया था। इसलिए कुल्लू का दशहरा पर्व पूर्णिमा से सात दिन पहले शुरू होता है तथा सातवें दिन लंका दहन में रावण को परंपरा अनुसार भेदा जाता है। बहरहाल छठे दिन कुल्लू के समस्त देवी-देवता रावण का सफाया करने के लिए मुहल्ला में एकत्र होंगे और शक्ति का आह्वान करके सातवें दिन लंका पर चढ़ाई करेंगे।