Monday, October 18, 2021 05:12 PM

MANREGA : हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में मनरेगा का हिसाब-किताब शुरू

सोशल ऑडिट में सामने आएंगी गड़बडिय़ां, कोरोना के कारण अभी तक नहीं हो पाया था लेखा-जोखा

रोहित शर्मा – शिमला

हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में मनरेगा के सोशल ऑडिट का काम शुरू हो गया है। पंचायतों में मनरेगा के तहत होने वाले कामों को पूरा लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा। अगर पंचायतें मनरेगा के कामों में हेराफेरी करती हैं, तो उनकी हेराफेरियां सोशल ऑडिट के दौरान पकड़ी जा सकती हैं। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पंचायतों में सोशल ऑडिट वर्ष में दो बार होता है, लेकिन यह कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया था, क्योंकि पंचायतों में कोविड संक्रमण के कारण ग्राम सभाओं पर रोक लगाई गई थी। ग्राम सभाओं पर रोक लगने के कारण यह प्रक्रिया नहीं हो पाई थी। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की मानें तो प्रदेश की सभी पंचायतों में सोशल ऑडिट का काम होगा। एक पंचायत में करीब छह दिनों में यह प्रक्रिया पूरी होगी।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की धारा-17 में योजना में हुए कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण कराने का प्रावधान है। राज्य स्तर पर इस कार्य के लिए राज्य सामाजिक अंकेक्षण इकाई की भी स्थापना की गई है। यह इकाई राज्य भर में सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया करती है। मनरेगा योजनाओं के क्रियान्यवन का लेखा-जोखा और अनियमितताओं की जानकारी भी इस प्रक्रिया से मिलती है। सोशल ऑडिट प्रक्रिया में ग्राम पंचायत में हुए कार्यों का कार्य स्थल सत्यापन, भौतिक सत्यापन तथा दस्तावेज सत्यापन किया जाएगा। ऑडिट के दौरान घर-घर जाकर लोगों के जॉब कार्ड व मजदूरी राशि भुगतान का भी सत्यापन किया जाएगा। छह दिवसीय आवासीय जांच के बाद मनरेगा अधिनियम की धारा-19 के तहत ग्राम सभा का आयोजन किया जाता है। (एचडीएम)

कोविड में प्रक्रिया प्रभावित

कोरोना संक्रमण के कारण सोशल ऑडिट की प्रक्रिया प्रभावित हुुई थी। पिछले वर्ष जहां ज्यादात्तर समय देश व प्रदेश में लॉकडाउन की समस्या थी, तो वहीं इस वित्तीय वर्ष के शुरुआत में भी प्रदेश में कोरोना संक्रमण अधिक था। इसके कारण पहले जहां प्रदेश में लॉकडाउन था, तो लॉकडाउन के काफी बाद भी पंचायतों में ग्राम सभाओं के आयोजनों पर रोक थी। ऐसे में यह प्रक्रिया नहीं हो पाई थी।