Tuesday, December 07, 2021 05:59 AM

मसरूर मंदिर

हिमाचल प्रदेश देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला में स्थित है मसरूर मंदिर। यह मंदिर 15 बड़ी चट्टानों पर बना है, जिसे हम रॉककट टेंपल के नाम से भी जानते हैं।  हिमालयन पिरामिड के नाम से विख्यात बेजोड़ कला का नमूना रॉककट टेंपल मसरूर एक अनोखा और रहस्यमयी इतिहास समेटे हुए है।

पुरातत्व विभाग के अनुसार 8वीं सदी में बना यह मंदिर उत्तर भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है, जिसमें पत्थरों पर सुंदर नक्काशी की गई है। इन्हें अजंता-एलोरा ऑफ  हिमाचल भी कहा जाता है। हालांकि यह एलोरा से भी पुराने हैं। पहाड़ काट कर गर्भगृह, मूर्तियां, सीढि़यां और दरवाजे बनाए गए हैं। मंदिर के बिलकुल सामने बहुत बड़ा तालाब है, जो मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगाता है।

इस मंदिर में भारी संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आते हैं तथा मंदिर के बाहर बोर्ड पर कथा का उल्लेख किया गया है। इस स्थल में आने वालों की टिकट भी लगती है। दंत कथाओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने किया था। झील में मंदिर के कुछ हिस्सों का प्रतिबिंब दिखाई देता है। सदियों से चली आ रही दंत कथाओं के मुताबिक मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान किया था और मंदिर के सामने खूबसूरत झील को पांडवों ने अपनी पत्नी द्रोपदी के लिए बनवाया था। मंदिर की दीवार पर ब्रह्मा, विष्णु, महेश और कार्तिकेय के साथ अन्य देवी-देवताओं की आकृति देखने को मिलती है। मंदिर के गर्भगृह में अभी भी श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ विराजमान हैं।

बलुआ पत्थर को काटकर बनाए गए इस मंदिर को 1905 में आए भूकंप के कारण काफी नुकसान भी हुआ था। इसके बावजूद यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सरकार ने इसे राष्ट्रीय संपत्ति के तहत संरक्षण दिया है। मंदिर को सर्वप्रथम 1913 में एक अंग्रेज एचएल स्टलबर्थ ने खोजा था। 8वीं शताब्दी में इसे निर्मित किया गया था तथा समुद्र तल से 2500 फुट की ऊंचाई पर एक ही चट्टान को काट कर बना देश का एकमात्र मंदिर माना जाता है। आज भी विशाल पत्थरों के बने दरवाजानुमा द्वार हैं, जिन्हें ‘स्वर्गद्वार’ के नाम से जाना जाता है। कुछ अन्य मान्यताओं के अनुसार पांडव अपने स्वर्गारोहण से पहले इसी स्थान पर ठहरे थे, जिसके लिए यहां स्थित पत्थरनुमा दरवाजों को ‘स्वर्ग जाने का मार्ग’ भी कहा जाता है।

                    - सुनील दत्त, जवाली