आखिर डीपीई के संदेह को क्यों दूर नहीं कर रही सरकार, बच्चों का विकास शारीरिक शिक्षा द्वारा ही संभव

हिमाचल प्रदेश डीपीई संघ ने दिए संयुक्त ब्यान में कहा है कि नई शिक्षा नीति को लागू करने से पहले डीपीई संघ को भी विश्वास में लिया जाए। उन्होंने कहा कि शारीरिक शिक्षा की अनिवार्यता से कोई इंकार नहीं कर सकता। बच्चों का सर्वांगीण विकास शारीरिक शिक्षा द्वारा ही संभव है। इसके द्वारा ही आदर्श नागरिक के गुणों का विकास होता है। समाज के संतुलित विकास में और आज के व्यस्त दौर में शारीरिक शिक्षा का महत्वपूर्ण रोल है। ऐसे में डीपीई संघ ने कहा कि नई शिक्षा नीति को लागू करने से पहले उनसे भी विचार-विमर्श किया जाए, ताकि उनके मन में किसी प्रकार संदेह न रहे। डीपीई संघ ने मांग कि है कि प्रदेश के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत डीपीई वर्ग के लिए पदोन्नति व भर्ती के नियम बनाए जाये। इस वर्ग के लिए अभी आरएंडपी नियम नहीं बने हैं, जबकि यह वर्ग 1986 से अपनी सेवायें लगातार दे रहा है।

डीपीई संघ ने कहा है कि कि सरकारी विभाग में एक पद के लिए दो प्रकार का वेतन नहीं दिया जाता। उन्होंने मांग की है कि डीपीई वर्ग को एक कार्य पर एक पद के लिए दो प्रकार के वेतन व ग्रेड पे न देकर समान व्यवस्था लागू की जाये। ताकि वेतन विसंगतियां न हो। इसके साथ संघ की मांग है कि सभी माध्यमिक विद्यालयों में डीपीई के पद सृजित करके भर्तीयां की जाए। प्रदेशाध्यक्ष मोहन जोगटा, महासचिव बलविन्दर राणा, वरिष्ठ उपप्रधान प्रदीप ठाकुर, कोषाध्यक्ष अषोक कुमार, संगठन वषिष्ठ राकेष कुमार, प्रैससचिव गोपाल कृष्ण, और जगमोहन राणा तथा राज्य कार्यकारिणी के समस्त सदस्यों ने संयुक्त रूप से अपना पक्ष रखा है।

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