Sunday, January 24, 2021 05:55 AM

नशे में ‘कॉमेडी क्वीन’!

बॉलीवुड में एक बार फिर तहलका मचा है। फिल्मों के खूबसूरत चेहरे बार-बार आईने में झांक कर देख रहे होंगे कि क्या वे भी ‘नशेड़ी’ लगते हैं? क्या अगली बारी उन्हीं की है? क्या वे भी किसी संजाल में फंसे हुए हैं? कोई सिंडिकेट उनका गलत ‘इस्तेमाल’ कर रहा है? कमोबेश हम  तो सोच भी नहीं सकते थे कि खिलखिलाने वाली कॉमेडी के नेपथ्य में नशा भी हो सकता है? लेकिन यही हकीकत सामने आई, जब ‘कॉमेडी क्वीन’ मानी जाने वाली भारती सिंह के घर से 86.5 ग्राम गांजा बरामद किया गया। भारती और उनके पति ने कबूल भी किया कि वे गांजे का सेवन करते रहे हैं। हालांकि अपराध इतना संगीन नहीं है, क्योंकि नशीले पदार्थों से जुड़े कानूनों में यह ‘अल्प मात्रा’ का नशा है। यदि 900 ग्राम तक मादक पदार्थ बरामद किया जाता है, तो उसे ‘कमर्शियल’ नहीं मानते। वह ‘सेवन’ की श्रेणी में आता है। अलबत्ता वह अपराध तो है, नतीजतन भारती और उनके पति हर्ष लिंबाचिया फिलहाल गिरफ्तार हैं। अदालत के निर्णय पर ही टिका है कि उन्हें जेल भेजा जाता है अथवा जमानत देकर कुछ शर्तें थोप दी जाती हैं, लेकिन नशे के इस अध्याय से कुछ मिथक टूटे हैं, छवियां भंग हुई हैं, साधारणीकरण की प्रक्रिया में कुछ दरारें उभरी हैं और फिर शक गहराने लगा है कि क्या अधिकतर फिल्मी हस्तियां ‘नशेड़ी’ हैं?

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) उन चेहरों को कब बेनकाब करेगा? क्या उन खूबसूरत चेहरों के जरिए उन ‘बड़ी मछलियों’ तक पहुंचना और उनकी कानूनी धर-पकड़ संभव होगी, जो नशे के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की हिस्सा हैं और अवैध काम करते हुए अकूत संपदाओं की मालिक हैं और एक कलाकार जमात को भ्रमित कर खोखला करने पर आमादा हैं? एनसीबी के छापों और जांच ने प्रिय युवा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी मौत के संदर्भ में नई गति पकड़ी थी। उस रहस्य से जुड़े सवाल तो आज भी अनुत्तरित हैं, लेकिन ऐसे खुलासे लगातार हो रहे हैं कि बॉलीवुड की थाली ‘जहरीली’ है! बुजुर्ग अभिनेत्री एवं राज्यसभा सांसद जया बच्चन को अब एहसास हो रहा होगा! एनसीबी ने अभिनेता एवं मॉडल अर्जुन रामपाल, उनकी लिव-इन फ्रेंड गेब्रिएला, फिल्म निर्माता फिरोज़ नाडियाडवाला और उनसे पहले सुपर अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और रकुल प्रीत सिंह सरीखी अभिनेत्रियों को भी समन कर घंटों पूछताछ की थी। उनके निष्कर्ष भी गोपनीय रखे गए हैं, जबकि देश को यह जानने का अधिकार है कि उनकी कल्पनाओं और सपनों के ये चेहरे किन कुत्सित आदतों में लिप्त रहे हैं। बेशक भारती भी फिल्म, टीवी और रियल्टी शोज का एक प्रख्यात नाम है। उन्होंने बीते 10 सालों के संघर्षों, मेहनत और अपने स्वाभाविक हुनर के बल पर फोर्ब्स लिस्ट में भी स्थान पाया है और करोड़ों देशवासियों को हंसा कर, गुदगुदा कर तनावमुक्त करने की सार्थक कोशिश की है। नशे की परंपरा कोई हमारे समय की देन नहीं है। फिल्मी दुनिया में नशे की आदत पुरानी है।

कई चेहरे नशे के आदी तक हो चुके हैं। 1980 के दशक को याद करें, तो संजय दत्त और फरदीन खान सरीखे चेहरे सामने आते हैं। नशे के एनडीपीएस कानून के तहत ड्रग्स खरीदना, बेचना और उनका सेवन करना अपराध हैं। उसमें 10-20 साल तक की सजा के प्रावधान भी हैं। बहरहाल एनसीबी की मौजूदा मुहिम के कारण जिन फिल्मी चेहरों और नशे के कारोबारियों के नाम सामने आए हैं और गिरफ्तारियां भी की गई हैं, उनके मद्देनजर अहं सवाल यह है कि क्या ‘बड़ी मछलियां’ भी कभी जाल में फंसेंगी? क्या उनके सुराग ठोस रूप से मिलने संभव नहीं हैं, क्योंकि अभी तक जो भी पेडलर पकड़े गए हैं, वे बहुत छोटे और सीमित हैं। वे नशे के सिंडिकेट नहीं हो सकते। फिल्मी चेहरों के जरिए एनसीबी नशे की सीमित खरीद, पार्टियों और कुछ बिचौलियों को चिह्नित कर सकता है, लेकिन नशे के बड़े व्यापारी सामुदायिक आधार पर ही नहीं, आर्थिक आधार पर भी देश का बड़ा नुकसान कर रहे हैं। वे आतंकियों के स्रोत भी बन सकते हैं। वे हवाला जैसे अवैध कारोबार को नए क्षितिज दे सकते हैं, लिहाजा एनसीबी से उन मछलियों तक पहुंचने की राष्ट्रीय अपेक्षा भी है।

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